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सोमवार, 10 जुलाई 2017

दूसरे राज्‍यों के नक्‍सली नेताओं को बस्तर में सक्रिय कर रहे हैं नक्सली कमान्‍डर

सुकमा 10 जुलाई 2017 (जावेद अख्तर). बस्तर में इन दिनों पुलिस की सक्रियता बढ़ गयी है, पूर्व में बड़ी संख्या में नक्सली एवं संघम सदस्यों के हुए आत्मसमर्पण के बाद से बस्तर के कई नक्सली नेताओं की पहचान पुलिस को मिली है। इनमें से कई नक्सली नेताओं के घर के पते और उनकी तस्वीरें पुलिस के हत्थे चढ़ने से इन नेताओं पर खतरा मण्डराने लगा है। इसलिये नक्सली कमान्‍डर अब दूसरे राज्‍यों के नक्‍सली नेताओं को बस्तर में सक्रिय कर रहे हैं।

बारसूर एरिया कमेटी के सचिव विलास का पुलिस ने जिस तरह एनकाऊंटर किया, उससे नक्सलियों में चिंता बढ़ गयी है। नक्सली संगठन में पुलिस की सेंधमारी से घबराये नक्सली बस्तर क्षेत्र में अपनी रणनीति में फेरबदल करने पर मजबूर हो गये हैं। पुलिस दबाव के चलते क्षेत्र में सक्रिय बड़े आदिवासी नक्सली नेताओं को माओवादी बस्तर से बाहर तैनात कर रहे हैं, इनके स्थान पर तेलंगाना-आंध्रप्रदेश व महाराष्ट्र के नक्सली नेताओं को बस्तर में सक्रिय किया जा रहा है। इन नये नक्सली नेताओं को अबूझमाड़ में नक्सली ट्रेनिंग भी दे रहे हैं, इसके बाद उन्हें क्षेत्र में भेजा जाता है।
दरभा डिवीजनल कमेटी के सचिव रहे माओवादी नेता सुरेंद्र उर्फ मड़कामी भीमा को नक्सलियों ने नये जोनल कमेटी, जिसे एमएमसी (मध्यप्रदेश-महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़) के सचिव की जिम्मेदारी दी है। यह जानकारी पिछले दिनों नक्सलियों के बरामद साहित्य से मिली है, पुलिस के खुफिया सूत्रों ने इसकी पुष्टि भी की है। 

सौंपी जा रही नये ज़ोन की कमान - 
बस्तर में सक्रिय रहे तीन दर्जन से अधिक नक्सली एमएमसी जोनल कमेटी में भेजे गये हैं, दरभा डिवीजन के सचिव रहे सुरेंद्र और उसकी पत्नी राजंती, दोनों को नये जोनल क्षेत्र में भेजा गया है। आमतौर पर पहले नक्सली बस्तर के आदिवासी नेताओं को बड़े पदों पर तैनात नहीं करते थे, किन्तु अब बदली हुई परिस्थितियों में आदिवासी नेताओं को महत्वपूर्ण ओहदे में तैनात किया जाने लगा है। इसके अलावा संतोष, सुजाता, लक्ष्मी, राजो, प्रकाश सहित अन्य प्रमुख नक्सली नेताओं को बस्तर से इस क्षेत्र में नया संगठन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गयी है। राजंती को नांदगांव जिले के मानपुर क्षेत्र में तैनात किया गया है। इसी तरह पश्चिम बस्तर में डिवीजनल कमेटी की सचिव रही माधवी और उसके पति सुधाकर को महासमुंद से लगे ओडिशा सीमा क्षेत्र में डिवीजनल कमेटी के ही सचिव पद पर तैनात किया गया है।

बस्तर के दरभा क्षेत्र में जहां सुरेंद्र उर्फ मड़कामी भीमा सचिव की जिम्मेदारी निभा रहा था, वहीं श्याम दादा उर्फ चैतू उर्फ पंकज को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गयी थी, अब जबकि सुरेंद्र को दरभा से हटाकर दूसरे स्थान पर भेज दिया गया है, ऐसे में दरभा डिवीजन की कमान अब श्याम दादा के कंधों पर आ गयी है। वर्तमान में दरभा की बजाय दक्षिण बस्तर से वह दरभा को संभाल रहा है। पश्चिम बस्तर डिवीजन की सचिव माधवी के जाने के बाद वहां कोई नया सचिव न बनाकर वरिष्ठ नक्सली नेता व दक्षिण बस्तर रीजनल कमेटी के सचिव गणेश उइके को इस पश्चिम बस्तर डिवीजन की कमान दी गयी है। दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी की सचिव रह चुकी सुजाता को झारखण्ड भेजे जाने की जानकारी मिली है। वर्तमान में वेंकटेश को दक्षिण बस्तर डिवीजनल कमेटी के प्रभारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपे जाने की खबर है। 

नई रणनीति पर काम कर रहे नक्सली - 
नक्सलियों ने महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमाई इलाकों को मिलाकर नया जोन बनाया है, इसके तहत छत्तीसगढ़ में जहां राजनांदगांव, कवर्धा तथा मुंगेली का कुछ हिस्सा शामिल किया गया है, वहीं महाराष्ट्र में गोंदिया, भण्डारा व गढ़चिरौली का कुछ भाग, इसी तरह मध्यप्रदेश में बालाघाट व मण्डला के इलाकों को शामिल किया गया है। हालांकि इन सभी इलाकों में पहले नक्सलियों की सक्रियता रही है, किन्तु कालांतर में इन इलाकों में कोई वारदात नहीं हुई थी। महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि यह नक्सलियों के संगठन विस्तार की नयी रणनीति है, क्योंकि छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली क्षेत्र नक्सलियों के कथित दण्डकारण्य जोन का हिस्सा था, किन्तु अब एमएमसी बनाकर नक्सलियों ने मैदानी इलाके में अपने विस्तार की नयी दिशा तय कर दी है।

ट्रेनिंग देकर भेजने की तैयारी - 
अबूझमाड़ क्षेत्र में इन दिनों नये नक्सली नेताओं का जमावड़ा देखा जा रहा है, सूत्रों के मुताबिक बस्तर के कई आदिवासी नक्सली नेताओं की पहचान जाहिर होने के बाद नक्सलियों ने तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र से कई नक्सली नेताओं को बस्तर बुलाया है, इनमें से कई नये नक्सलियों को भाषा, क्षेत्र की जानकारी आदि से रूबरू करवाया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद इन्हें संगठन के बड़े ओहदे में तैनात किया जाएगा। मिले नक्सली साहित्य में नक्सलियों ने पुलिस की बढ़ती मुखबिरी से चिंता जाहिर करते हुए अपने कैडर को निर्देश दिये हैं कि, वे मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम से कम किया करें, यदि जरूरी हो तो कोड में ही बात करें। इसी तरह वॉकी-टॉकी में भी बात कोडवर्ड में करें। 




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