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कानपुर में भी हैं अनेक पर्यटन स्थल

कानपुर। लोग देश के कई हिस्सों में घूमने जाते हैं। मगर किसी को कानपुर जाने का ख्याल नहीं आता। मगर यकीन मनिए कानपुर जाने वाले पर्यटक निराश नहीं होंगे। यहां पर्यटन के लिहाज से कई स्थल हैं, जहां आप जा सकते हैं और देश की धरोहर के बारे में जान सकते हैं। आइए ले चलते हैं, उन स्थलों पर जहां आप कभी गए ही नहीं-


द्वारका मंदिर- यह मंदिर पूरी तरह भगवान कृष्ण को समर्पित है। सावन में यहां झूला फेस्टिवल मनाया जाता है। इस महीने यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ होती है। द्वारका मंदिर दर्शनीय है।

जैन मंदिर- कमला टॉवर के नजदीक महेश्वरी मोहाल स्थित यह कांच का बना मंदिर अलग ही दृश्य प्रस्तुत करता है। यह मंदिर जैन समुदाय को समर्पित है। भगवान महावीर और दूसरे 23 तीर्थकरों की आराधना यहां की जाती है। पूरा मंदिर कांच का बना है। इसकी छतों, दीवारों और फर्श पर आप कांच की बेहतरीन नक्काशी देख सकते हैं।

मक्का मस्जिद- शहर से पंद्रह किलोमीटर दूर स्थित यह मशहूर मस्जिद देखने दूर दूर से लोग आते हैं।

श्री राधाकृष्ण मंदिर- श्री राधाकृष्ण मंदिर को जेके मंदिर भी कहते हैं। यह मंदिर बेहतरीन वास्तुकला का अद्भुत नमूना हैं। पूरे शहर में यह मंदिर दर्शनीय है। यहां पांच मुख्य देवता विराजमान हैं। मध्य में राधा कृष्ण की प्रतिमा है। दूसरे चार देवताओं में श्री लक्ष्मी नारायण, श्री अर्द्धनारीश्वर, श्री नर्मदेश्वर और श्री हनुमान की प्रतिमा स्थापित है।

कानपुर मेमोरियल चर्च- 1875 में बने इस गिरजाघर को आल सोल्स कैथेडरल भी कहा जाता है। भवन की बेहतरीन वास्तुकला हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस भवन को लाल चटकीले ईटों से बनाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगे ईंटों से बनाया गया है। साथ ही रंग-बिरंगे ईंटों का भी बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया गया है। चर्च के अंदर उन सैनिकों की याद में कुछ टेबल रखे गए हैं, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दे दी थी। इन टेबलों पर उन शहीदों के नाम लिखे हैं।

बिठूर- बिठूर कानपुर से 20 किलोमीटर की दूरी पर है। इस जगह को ब्रह्यव्रत भी कहा जाता है। रामायण में भी महर्षि वाल्मीकि ने इस जगह के बारे में वर्णन किया है। उनके अनुसार लव-कुश का जन्म बिठूर में ही हुआ था। लक्ष्मीबाई, अजीमुल्ला खान, नानाराव पेशवा, मैनावती और तात्या टोपे ने आजादी की लड़ाई यहां से शुरू की थी। नानाराव किला यहां के ऐतिहासिक जगहों में शामिल है।

जाजमउ-  कानपुर से सटे गंगा नदी के किनारे हैं। यहां चमडे के छोटे-बड़े उद्योग भी देखे जा सकते हैं। पर्यटक स्थल की बात करें, तो यहां सिद्धनाथ और सिद्धा देवी का मंदिर दर्शनीय है। साथ ही फिरोजशाह तुगलक का बनवाया संत शाह अला-उल-हक का मकबरा और मस्जिद भी देखी जा सकती है।

इन सब के अतिरिक्‍त रेव-3, रेव मोती, साउथ एक्‍स और जेड स्‍क्‍वायर माॅल भी कानपुर की शान बढाते हैं, आप नानाराव पार्क में घूमने जा सकते हैं और फूलबाग में संग्रहालय भी देख सकते हैं। आप मोतीझील में पिकनिक मना सकते हैं और कानपुर से 25 किलोमीटर दूर शोभन में झील व मंदिरों के दर्शन कर सकते हैं।

कब जायें- पूरे साल कभी भी कानपुर जा सकते हैं। मगर अक्टूबर से मार्च तक का समय बेहतर है। कानपुर सड़क मार्ग से या ट्रेन से पहुंचा जा सकता है। जरूर जाएं क्योंकि पर्यटन के लिहाज कानपुर किसी भी पर्यटन स्थल से कम नहीं है।