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शनिवार, 29 दिसंबर 2018

घंटाघर का ये खुला पेशाब घर दे रहा है स्वच्छ भारत अभियान को चुनौती

कानपुर 29 दिसम्बर 2018 (महेश प्रताप सिंह). जब से उत्तर प्रदेश में भाजपा सरकार का आगाज हुआ है तब से लेकर आजतक सफाई के लिये बड़े नेताओं ने कई योजनायें बनाई। कई जगह स्वच्छ भारत अभियान के कार्यक्रम भी आयोजित किये गये। लेकिन नतीजा अपेक्षा के अनुसार नहीं निकला।

वैसे तो स्वच्छ भारत अभियान के नाम से देश की जनता में सफाई के प्रति जागरूकता आयी है। इसका असर भी देश के कई शहरों में देखने को मिला। गांवों और शहरों में शौचालय के निर्माण भी कराये गये व खुले में शौच के लियें कानून का पालन करने हेतु थोड़ा बहुत बल भी प्रयोग किया गया। देश के कई गांवों में शौचालयों ने एक नई क्रांति लिखी। आज के पहले इतनी संख्या में शौचालय नहीं बने, स्वच्छता का असर भी दिखाई देने लगा। 

देश के एक बड़े शहर कानपुर में स्वच्छता को लेकर कोई बड़ा कारनामा नहीं हुआ। यानी सफाई के नाम पर तो कुछ नहीं हुआ उल्टा कानपुर शहर को विश्व का सबसे गंदा शहर होने का खिताब मिल गया। इतना सब होने के बाद भी कानपुर के जिम्मेदारों की कार्यशैली में कोई परिवर्तन नहीं आया। यूं तो शहर में कई क्षेत्र अपनी बदहाली पर रो रहे हैं। इसी कड़ी में घंटाघर में जहां कभी रेलवे माल गोदाम की दीवार से सटा पेशाब घर बना था। आज वहां गंदगी का अम्बार लगा हैं। यही लोग खड़े होकर लघुशंका निर्वहन करते हैं। ताज्जुब की बात हैं कि घंटाघर पर जिस खुली जगह में लोग खड़े होकर पेशाब करते हैं वहीं पर स्वच्छता का संदेश देता नगर निगम का एक बोर्ड जमीन पर पड़ा है। इसी बोर्ड पर कानपुर शहर के एक सम्मानित नेता का नाम भी अंकित हैं।



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