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सोमवार, 25 दिसंबर 2017

बढ़ते प्रदूषण पर एनजीटी का आदेश, किसान नहीं लगा सकेंगे अब खेतों में आग

कोरबा 25 दिसंबर 2017 (जावेद अख्तर). पलारी यानी कटाई के बाद खेतों में फसल का वह अवशेष, जो खेतों में ही रह जाता है। पलारी के संबंध में एनजीटी की ओर से कोरबा जिला प्रशासन को आदेशित किया है कि खेतों में फसलों के अवशेषों को जलाने वाले किसानों पर कार्यवाही की जाए। इसके पीछे वायु प्रदूषण में कमी लाना है। देश की राजधानी नई दिल्ली में बढ़े बेतहाशा वायु प्रदूषण के लिए इसे ही जिम्मेदार माना गया है। इस पूरे विषय पर कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को अब इस आदेश का पालन कड़ाई से करना होगा। अब खेतों में बचे अवशेष को जलाने पर जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

आदेश की पुष्टि कृषि उपसंचालक ने की - 
कोरबा जिले के कृषि उपसंचालक ने बताया कि जिले के किसानों को खेतों में आग लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश उन्हें राष्ट्रीय हरित अभिकरण यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की ओर से प्राप्त हुआ है। समस्याओं को देखते हुए एनजीटी ने किसान खेतों में आग लगाए जाने पर जुर्माने से लेकर जेल भेजने तक की कार्रवाही करने को आदेशित किया गया है।

किसानों को जागरूक किया जा रहा - 
उन्होंने बताया की इस मामले को लेकर ग्राम पंचायतों में प्रस्ताव भी पारित किया जा चुका है। साथ ही जनजागरूकता कार्यक्रम के तहत भी किसानों को समझाइश दी जा रही है। पम्फलेट और अन्य माध्यम से भी किसानों को पर्यावरण को प्रदूषित नहीं करने की हिदायत कृषि और प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से दिए जा रहे है।

अन्य सुझाव भी दिए गए - 
कृषि विभाग ने पलारी जलाने की मनाही के साथ सुझाव, खेतों में फसल के अवशेषों को खाद में बदलने की प्रक्रिया को अमल में लाने को कहा है ताकि उनका उत्पादन भी बढ़ सके। हालांकि इस कवायद का लाभ भी मिला है। किसानों में जागरूकता आई है और अब इक्के-दुक्के ही खेतो में आग लगाए जाने के मामले सामने आये है।

प्रदूषण नियंत्रण में असफल सरकार - 
एनजीटी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ का संभाग बिलासपुर के जिला कोरबा में औद्योगिक संयंत्रों एवं कोल खान, अवैध खनन, परिवहन के चलते प्रदूषण नियंत्रण से बाहर हो चुका है, तो वहीं शासकीय एवं गैरशासकीय निर्माण कार्य भी हो रहे, जिससे भी पर्यावरण प्रभावित हो रहा, परंतु राज्य शासन एवं प्रशासन प्रदूषण पर नियंत्रण करने में पूरी तरह से नाकामयाब हो गई है। ऐसे में जिले के जल, थल एवं वायु में प्रदूषण की मात्रा ढाई गुना बढ़ चुकी है। क्षेत्र में सबसे ज्यादा वायु प्रदूषण ने जनजीवन को प्रभावित किया एवं इसकी तीव्रता तेज़ी से विस्तारित रही, परिणामस्वरूप यहां के निवासियों में कई तरह की नई बीमारियां उत्पन्न हो रही, वहीं रोगियों की संख्या साल दर साल तीन गुना तक बढ़ रही है।

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