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शनिवार, 8 अगस्त 2015

चेन्नई - पीएम मोदी ने जया से मिल निकाली संसद चलने की राह

चेन्नई 07 अगस्त 2015 (IMNB). प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु गए तो थे मद्रास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाने लेकिन मुख्यमंत्री जे. जयललिता के साथ पहली बार भोज करके उन्होंने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजनीति के समीकरण भी सुधारने की कोशिश की। एक तरफ तो उन्होंने विपक्ष के हाथों बंधक  आर्थिक सुधारों से संबंधित विधेयक संसद से पारित कराने में समर्थन मांगा। दूसरी ओर, जयललिता ने उन्हें एक मांग पत्र सौंप कर कच्छथीवु द्वीप श्रीलंका से वापस भारत को दिलाने और जीएसटी बिल में सुधार की अपील की।

अन्नाद्रमुक के पास लोकसभा में 37 सांसद और राज्यसभा में 11 सांसद हैं। ऐसे उनका समर्थन केंद्र की राजग सरकार के लिए अहम बिलों को पास कराने में वरदान सरीखा होगा। लिहाजा, जयललिता ने भी पूरी गर्मजोशी से प्रधानमंत्री का स्वागत किया और उन्हें अपने पोइस गार्डन स्थित निवास पर भोज दिया। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच 50 मिनट तक बातचीत हुई। सूत्रों का कहना है कि जयललिता ने मोदी को खाने पर आमंत्रित किया था जिसे प्रधानमंत्री ने स्वीकार कर लिया। 

जया की कच्छथीवु द्वीप भारत को देने की अपील
जयललिता ने प्रधानमंत्री मोदी को एक मांग पत्र सौंप कर भारतीय मछुआरों के हितों की रक्षा की मांग करते हुए कच्छथीवु द्वीप को श्रीलंका से वापस भारत को सौंपने की मांग की। उन्होंने कहा कि 285 एकड़ में फैला कच्छथीवु द्वीप तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच संकरे रास्ते में स्थित है। यह पहले रामनाथपुरम जिले का ही हिस्सा था। रामनाथपुरम के राजा ने इसे बसाया था। भारतीय मछुआरे यहां रोजमर्रा मछली पकड़ते थे। लेकिन यह द्वीप सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1974 व 1976 में श्रीलंका को सौंप दिया गया था। 

जयललिता ने जीएसटी सुधार के सुझाव दिए
जया ने कर्नाटक और केरल के साथ कावेरी और मुल्लापेरियार विवाद सुलझाने की अपील के साथ केंद्र से जीएसटी में भी आवश्यक सुधार की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि वैट, केंद्रीय उत्पाद कर और सेवा कर को पूरी तरह से राज्यों के सुपुर्द कर देना चाहिए। इसके बाद अंतरराज्यीय करों को केंद्र को लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीएसटी से निर्माण पर निर्भर तमिलनाडु राज्य को राजस्व का भारी नुकसान होगा। 

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को सबसे पहले मद्रास विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस समारोह में शिरकत कर राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का उद्घाटन किया और भारत हथकरघा ब्रांड की स्थापना की। उन्होंने कहा कि बुनकरों को उनके हक का मेहनताना मिलना ही चाहिए। इसके लिए उचित कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने तमिल में ही कहा, 'मैं तमिलनाडु आकर आप सबसे (जनता) से मिलकर बेहद खुश हूं।' उन्होंने कहा, 'हथकरघा उत्पाद वैसे ही प्रेम से बनाए जाते हैं जैसे मां के हाथ का खाना। बुनकरों के घर की 80 फीसद जगह पावरलूम से घिर जाती है। सारा परिवार बाकी बची 20 फीसद जगह में रहता है। एक साड़ी को बुनने में तकरीबन पांच माह लगते हैं। जैसे आप बच्ची को बड़ा होते देखते हैं वैसे ही बुनकर का परिवार उस साड़ी को बनते देखता है।'

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