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सूर्य को अर्ध्य देकर की संतान की लम्बी आयु की कामना

कानपुर 13 नवम्बर 2018 (महेश प्रताप सिंह/अनुज तिवारी). महापर्व छठ पर गंगा और नहरों के घाट किनारे सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए आस्था और श्रृद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा। शाम होते ही घाटों पर रौनक बढ़ गयी और शहर के तमाम घाटों व नहर पर छठ पूजा के लिए भक्तों की भीड़ पहुंच गई। सभी ने सूर्य देव को अर्ध्य देकर मनोकामना मांगी।

सरसैया घाट, पनकी नहर, अर्मापुर नहर पर खासी भक्तों की भीड़ छठ पूजा पर अर्घ्य देने पहुंची। वहीं प्रशासन की तरफ से सुरक्षा व्‍यवस्‍था भी की गयी थी, जिससे कोई भी अव्यवस्था न फैले। अर्ध्य देकर की बच्‍चों-परिवार के दीर्घायु की कामना की। वही कानपुर के सरसैया घाट पर शाम होते ही आने-जाने वाले भक्तों का सैलाब नजर आने लगा। भक्त लोडर, कारों, टैंपो, रिक्शा, ई-रिक्शा से नहर के घाटों से व्रती परिवार के साथ डलिया लिए हुए आते नजर आए। व्रती महिलाओं के साथ परिवार की औरतें और बच्‍चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस दौरान सूर्य अस्त होने के आधा घंटे पहले ही ज्यादातर महिला और पुरुष नदी में उतरकर कर हाथ जोड़ कर खड़े हो गए और कोई अगरबत्ती हाथ में लिए था तो कोई हल्दी, चंदन हाथ में लगाकर अर्घ्य देने को माटी का कलश या लोटा लेकर सूर्य देव के ढलने का इंतजार करते हुए देखा गया। घाटों पर "घटवा पे सूरज देव के ले अइहा हो छठ मइया" के मंगल गीतों के साथ शाम को डूबते हुए सूरज को व्रती महिलाओं ने सूर्य अस्त होने के बाद अर्घ्य दिया और बच्चों के दीर्घायु की कामना की।


पूर्वांचल के इस छठ पूजा के पर्व को कानपुर में भी धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही घाटों पर भक्तों के साथ श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। छठ पूजा में महिलाओं ने शाम सूर्य अस्त होने के समय सूर्य देव को अर्घ्य देकर बच्चों व परिवार के लिए मंगल कामनाएं कीं। इस पर्व की मान्यता है कि महिलाएं नदी व नहर के जल में खड़े होकर सूर्य अस्त होते ही अर्घ्य देती हैं और सूर्य देवता से अपने बच्चों कि दीर्घायु के लिए प्रार्थना करती हैं। नीता, राधा और डॉली ने बताया कि जो डलिया लेकर आते हैं, उसमें फल,मिठाई, मेवा और नारियल रखकर सरसैय्या घाट पहुंचे और गंगा जी की पूजा सूर्य को अर्घ्य देकर आरती करते हैं और फेरे लेते हैं। तीन दिन का व्रत होता है और केवल इसमें मीठा खाया जाता है और बच्चों, परिवार व सुहाग की दीर्घायु की कामना की है।