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सोमवार, 10 दिसंबर 2018

बहराइच में 28 फरवरी 2019 तक चलेगा पशुगणना का कार्य

बहराइच 10 दिसम्बर 2018 (ब्यूरो). जनपद में संचालित हो रही 20 वीं पशुगणना को सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराये जाने के उद्देश्य से विगत दिवस विकास भवन सभागार में आयोजित बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य विकास अधिकारी राहुल पाण्डेय ने उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, वेटनरी फार्मासिस्ट एवं पैरावेट (गणनाकार) को निर्देश दिया कि कार्य को पूरी सूक्ष्मता के साथ करें ताकि विभाग द्वारा बेहतर से बेहतर कार्य योजना तैयार की जा सके। 


उन्होंने ने कहा कि त्रुटिरहित आधारभूत आंकड़ों के आधार पर विभाग द्वारा अच्छी योजना तैयार की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस बार की गणना में नस्लवार पशुओं की गणना की जानी है इसलिए आवश्यक है कि गणना कार्य से जुड़े सभी पूरी सावधानी के साथ अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें। बैठक के दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. बलवन्त सिंह ने जानकारी दी कि विभाग द्वारा प्रत्येक 05 वर्ष पर पशुगणना का कार्य कराया जाता है, जो कि पूर्व मे राजस्व विभाग के माध्यम से कराया जाता था। गणना में पशुओं की नस्लों के चिन्हाॅकन में आने वाली कठिनाईओ को देखते हुए प्रथम बार भारत सरकार द्वारा पशु गणना का कार्य पशुपालन विभाग के माध्यम से कराया जा रहा है। डा. सिंह ने बताया कि जनपद में 01 दिसम्बर 2018 से पशुगणना का कार्य प्रारम्भ है जो 28 फरवरी 2019 तक संचालित रहेगा। 

सीवीओ डा. सिंह ने बताया कि जनपद में पशु गणना के कार्य में 140 पैरावेट (गणनाकार्य) 50 सुपरवाईजर तथा 01 स्कूटनी आफीसर को नामित किया गया है, जिसमें उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, वेटनरी फार्मासिस्ट सम्मिलित हैं। उन्होंने बताया कि पशुगणना इस बार टैबलेट के द्वारा गांव मे जाकर की जायेगी और उसी स्थान से डाटा को आनलाइन सबमिट किया जायेगा। डा. सिंह ने बताया कि वर्तमान समय में 04 तहसीलों महसी, कैसरगंज, बहराइच एवं नानपारा में पशुगणना का कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है। अब तक 52 पैरावेटों द्वारा 3700 परिवारों की गणना का कार्य कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि 02 नई तहसीलों पयागपुर एवं मोतीपुर मंे अभी कार्य प्रारम्भ नही हुआ है, जिसका भारत सरकार से अनुमोदन प्राप्त होते ही गणना का कार्य प्रारम्भ कर दिया जायेगा। 

बैठक के दौरान मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा. सिंह द्वारा एक-एक पैरावेट से उसके द्वारा किये गये पशु गणना कार्यों की समीक्षा की गयी तथा पशुगणना कार्य में आ रही समस्याओं के बारे में जानकारी प्राप्त करते हुए आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये। सभी सुपरवाईज़र्स को निर्देशित किया गया कि पशुगणना कार्य का प्रभावी ढंग से पर्यवेक्षण करते रहें। बैठक में मौजूद उप मुख्य पशुचिकित्साधिकारी, पशुचिकित्साधिकारी, पशुधन प्रसार अधिकारी, वेटनरी फार्मासिस्ट एवं पैरावेट (गणनाकार) को पशुओं के सही ब्रीड के सम्बन्ध में तकनीकी जानकारी प्रदान की गयी।

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