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शनिवार, 7 अक्तूबर 2017

रेप पीड़ित बेटी को लेकर अस्पतालों के चक्कर लगा रहा विकलांग बाप


लखनऊ 07 अक्‍टूबर 2017. उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। लापरवाही और बेशर्मी की इस रेस में लखनऊ का केजीएमयू भी पीछे नहीं है मामला है केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती एक रेप पीड़ित छात्रा का जिसको दिनांक 4-10-17 को कोतवाली मलिहाबाद के क्षेत्र अलीनगर में कुछ दबंगों द्वारा रेप करने के पश्चात गोली मार दी गई थी।


अपनी बेटी को लेकर उसका विकलांग पिता अस्पतालों के चक्कर लगा रहा है 2 दिन से ट्रामा सेंटर में भर्ती होने के बावजूद अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा अभी तक पीड़ित छात्रा का मेडिकल परीक्षण नहीं करवाया जा सका है। लड़की के पिता ने बताया कि हम लोग गरीब किसान हैं। एक तरफ तो मेरी बेटी के साथ रेप जैसी घिनौनी घटना होती है और फिर उसे गोली भी मार दी जाती है। हम लोग इसी सदमे से अभी उभर नहीं पाए हैं और ऊपर से जब से लखनऊ में आए हैं तब से देख रहे हैं कि हमारी बेटी को इलाज मिलना मुश्किल हो रहा है. 

पहले मेरी बेटी को लखनऊ के बलरामपुर हॉस्पिटल भेजा गया बलरामपुर हॉस्पिटल से फिर केजीएमयू भेजा गया फिर केजीएमयू के ट्रामा सेंटर से मेरी बेटी को बिना यह कारण बताएं कि यहां पर इसका मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं हो सकता है. मेडिकल परीक्षण के लिए रानी लक्ष्मीबाई अस्पताल भेज दिया गया रानी लक्ष्मी बाई अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा मेडिकल परीक्षण करना तो दूर मेरी बेटी को हाथ तक ना लगाया वहां के डॉक्टर बोले केजीएमयू के डॉक्टरों द्वारा खुद ही मेडिकल परीक्षण ना करके पीड़ित को यहां क्यों भेजा गया है हम लोग इसका परीक्षण नहीं करेंगे. आप इसको वापस केजीएमयू लेकर जाओ इस बीच पीड़ित छात्रा की हालत बिगड़ती ही रही उसे कई बार उल्टी हुई वह एक बार बेहोश भी हो गई उस पर से जब एंबुलेंस से मैं अपनी बेटी को लेकर ट्रामा सेंटर पहुंचा तो मुझे अपनी बेटी को बेड तक ले कर जाने के लिए स्ट्रेचर तक ना मिली मैं स्ट्रेचर के लिए अस्पताल के तमाम कर्मचारियों से मिन्नतें करता रहा किसी ने भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं करवाई 1 घंटे तक मेरी बेटी एंबुलेंस में ही पड़ी रही 1 घंटे के बाद बहुत मुश्किल से मेरा बेटा स्ट्रेचर की व्यवस्था कर के लाया तब कहीं जाकर मैं अपनी बेटी को ट्रामा सेंटर के उसके बेड तक लेकर गया और आगे उस पीड़ित छात्रा के पिता ने बताया कि मेरी बेटी के शरीर में अभी भी 22 छर्रे लगे हुए हैं उसे भी अभी तक नहीं निकाला गया है. 

मेरी बेटी अभी तक वही गंदे कपड़े पहने हुए हैं जो की मिट्टी में काफी सने हुए हैं डॉक्टर मुझे बेटी के कपड़े भी नहीं बदलने दे रहे हैं बोलते हैं जब तक मेडिकल परीक्षाओं नहीं हो जाता तुम कपड़े नहीं बदल सकते जब संवाददाता ने इस संबंध में ट्रामा सेंटर प्रभारी डॉक्टर हैदर अब्बास से जानना चाहा तो वह अपने ऑफिस में नहीं मिले तथा कई बार फोन करने पर भी उनका फोन नहीं उठा काफी समय बाद जब उनका फोन उठा उनसे पूरी घटना बताकर संवाददाता ने जानकारी लेना चाहा तो डॉक्टर हैदर अब्बास ने यह कहते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया कि इस विषय में आप सर्जरी विभाग के जिम्मेदारों से बात करें जब संवाददाता ने सर्जरी विभाग के प्रभारी डॉक्टर संदीप तिवारी से मिलना चाहा तो वह भी अपने चेम्बर में नहीं मिले  संवाददाता ने डॉक्टर संदीप तिवारी को कई बार फोन कॉल किया जिसे की फोन द्वारा ही इस घटना के विषय में जानकारी ली जा सके किंतु कई बार फोन करने पर भी डॉक्टर संदीप तिवारी का फोन नहीं उठा। खबर लिखे जाने तक पीड़ित छात्रा को फिर से ट्रामा सेंटर से डफरिन हॉस्पिटल मेडिकल  परीक्षण के लिए भेज गया है। सब से बड़ा सवाल ये है की आखिर के जी एम यू में ही मेडिकल परीक्षण क्यों नहीं करवाया गया क्यों पीड़िता को पूरे  शहर के हॉस्पिटल के चक्कर लगवाये जा रहे हैं ?

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