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बुधवार, 30 अगस्त 2017

सरकार की अमृत फार्मेसी का लाभ नहीं उठा पा रहे मरीज़


लखनऊ 30 अगस्‍त 2017. केजीएमयू में हाल ही में मरीज़ों के लिए जेनरिक दवाइयों की अमृत फार्मेसी खोली गयी थी। जिससे की मरीज़ों को सस्ती दवा उपलब्ध करवाई जा सके, किन्तु फार्मेसी से कोई भी मरीज़ पूरी तरह से लाभ नहीं उठा पा रहा है। फार्मेसी का प्रचार भी सही तरह से नहीं किया गया है। सर्जिकल का बहुत सा सामान जो बाहर से लेने पर मरीज़ को सस्ता पड़ रहा है किन्तु अमृत फार्मेसी से लेने पर महँगा पड़ रहा है।


ग़रीब मरीज़ों को ब्रांडेड दवाएं न खरीदनी पड़े इसके लिए केंद्र सरकार ने अमृत फार्मेसी योजना शुरू की थी। इसी योजना के चलते अभी हाल ही में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी नड्डा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से केजीएमयू में दो अमृत फार्मेसी का उद्घाटन किया था, जिसमें यह दावा किया गया था की इस फार्मेसी के माध्यम से कैंसर, हार्ड, आर्थो आदि के इंप्लांट समेत सभी दवाएं 50% से ले कर 90% प्रतिशत तक सस्ती मिलेगी। वैसे तो इस फार्मेसी पर 200 मरीज़ रोज़ आ रहे हैं किन्तु अभी मरीज़ पूरी तरह से इस योजना का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। कारण हैं फार्मेसी में दवाइयों का पूरी तरह से उपलब्ध न होना और डॉ. भी मरीज़ों को जेनरिक दवाइयाँ नहीं लिख रहे हैं। आम तौर से हर मरीज़ को अमृत फार्मेसी के बारे में जानकारी ही नहीं है। फार्मेसी का प्रचार भी सही तरह से नहीं किया गया है। सर्जिकल का बहुत सा सामान जो बाहर से लेने पर मरीज़ को सस्ता पड़ रहा है किन्तु अमृत फार्मेसी से लेने पर महँगा पड़ रहा है और किसी भी मरीज़ को 15 दिन से ज्‍यादा की दवा नहीं दी जा रही है।

जब हमारे संवाददाता ने फार्मेसी के प्रभारी श्री संजीव से इसके बारे में पूछा तो उन्होंने बताया की जो सामान बाहर सस्ता बिक रहा है वो लोकल है परन्तु हमारे यहाँ वही सामान ब्रांडेड है इसी बात का अन्तर आ रहा है लोकल सामान रख कर हम मरीज़ों की जान से खिलवाड़ नहीं कर सकते। मरीज़ों को केवल 15 दिन की ही दवा क्यों दी जा रही है ये पूछने पर उन्होंने बताया की चंडीगढ़ में हमारी फार्मेसी में बहुत सी दवाइयाँ बहुत ही कम दामो पर मिलती हैं। जिस कारण बाहर के दुकानदार आ कर कई-कई महीनों की दवा सस्ते दामों पर ले जाते थे  फिर वो उन्हें ऊँचे दामो में बेच देते थे। यहाँ ऐसा न होने पाये इसलिए हम लोग सिर्फ 15 दिन की ही दवा देते हैं हाँ यदि किसी मरीज़ का कैंसर का या कोई बड़ी बीमारी का लंबा कोर्स चल रहा है तो डॉ. के द्वारा लिखवा कर लाने पर हम मरीज़ को ज्‍यादा दिन की भी दवा दे देते हैं, आम तौर से मरीज़ को नहीं देते हैं। कुल मिला कर गरीब मरीज़ की समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है।

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