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शनिवार, 3 जून 2017

नक्सलियों ने नहीं सुरक्षाबलों ने फूंके थे छग में 160 आदिवासियों के घर - सीबीआई

बिलासपुर 03 जून 2017 (जावेद अख्तर). सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई द्वारा प्रेषित जांच रिपोर्ट में सुरक्षाबलों पर एक बड़ा आरोप लगाया गया है। सीबीआई का कहना है कि 2011 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के ताड़मेटला गांव में जो आग लगी थी वह नक्सलियों ने नहीं बल्कि सुरक्षाबलों ने लगाई थी और इसके पक्के सबूत सीबीआई के पास हैं।

एक अंग्रेज़ी अखबार के अनुसार, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को अपनी जांच की स्टेटस रिपोर्ट सौंपते हुए कहा कि पुलिस ऑपरेशन में ताड़मेटला गांव में निवासरत आदिवासियों के 160 घर जलाकर खाक कर दिए गए थे। इस मामले में 07 विशेष पुलिस अधिकारियों के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर की गई है। सीबीआई ने कहा कि इस त्रासदी में 323 विशेष पुलिस अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, सीआरपीएफ तथा कोबरा के 95 कर्मियों के शामिल होने के उसके पास सबूत हैं। सबूत इस बात की गवाही दे रहे कि ताड़मेटला के गरीब आदिवासी परिवारों के घरों को सुरक्षा बलों द्वारा जला दिए गए, उन्हें प्रताड़ित किया गया और बेरहमी के साथ मारा पीटा गया, वो भी सिर्फ इस खुन्नस में कि नक्सली आदिवासी समुदाय से संबंधित है।
सीबीआई ने इस घटना के 2 सप्ताह बाद स्वामी अग्निवेश के काफिले पर हमले के सिलसिले में सलवा जुडूम के 26 नेताओं के ख़िलाफ भी चार्जशीट दायर की है। इन नेताओं का बस्तर में भाजपा और कांग्रेस से दोनों ही राजनीतिक पार्टियों से संबंध हैं। इनमें से कुछ का विकास संघर्ष समिति, अग्नि और सामाजिक एकता मंच जैसे पुलिस समर्थक गुटों से भी संबंध है। याद दिला दें कि सामाजिक एकता मंच अब भंग किया जा चुका है। सामाजिक कार्यकर्ता नंदिनी सुंदर द्वारा मामला दायर करने पर सुप्रीम कोर्ट ने सलवा जुडूम और विशेष पुलिस अधिकारियों को ग़ैरकानूनी घोषित कर दिया है।
आपको बता दें 11 और 16 मार्च 2011 के दौरान पुलिस ऑपरेशन में गांव में 250 घरों को जलाकर फूंक दिया गया था और इस दौरान 03 व्यक्ति मारे गए और 03 महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया था। जुलाई 2011 में कोर्ट ने इन घटनाओं की सीबीआई जांच का आदेश दिया था और इस हफ़्ते रायपुर में सीबीआई की विशेष अदालत में तीन अंतिम रिपोर्ट दी गई। फिर सुप्रीम कोर्ट की बेंच में इन रिपोर्ट्स को पेश किया गया। शुक्रवार को सॉलिसिटर जनरल रंजीत सिंह कुमार और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को 03 मामलों में आरोप-पत्र दायर करने और 02 मामलों में क्लोज़र रिपोर्ट के बारे में जानकारी दी गई है। 

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