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बुधवार, 29 मार्च 2017

बस्तर से गायब कनाडाई कार्यकर्ता पर बवाल, सुषमा स्वराज ने मांगी रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ 29 मार्च 2017 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ के बस्तर में हालात कितने बेहतर हैं तथा पुलिस प्रशासन कितनी बेहतरीन प्रदर्शन कर रही है इसका बहुत बड़ा प्रमाण कनाडा से आए सामाजिक कार्यकर्ता जॉन का बस्तर से अचानक गायब होना है। हालांकि अभी तक कोई पुख्‍ता रिपोर्ट या जानकारी नहीं मिली है पर बस्तर पुलिस ने नक्सलियों के शामिल होने का अंदेशा बता कर स्वयं को और सरकार को सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया है।


बस्तर आईजी को बगैर जानकारी घटना में नक्सलियों के शामिल होने का आभास दर्शा रहे हैं जैसे कि बस्तर में सारे फर्जी एनकाउंटर नक्सलियों द्वारा ही किये जाते हैं और पुलिस मूकदर्शक बन कर रहती है। एक हिसाब से देखा जाए तो बस्तर और कोण्डागांव जैसे इलाके में तैनात पुलिस द्वारा आज तक आदिवासियों को सुरक्षा के नाम पर सिर्फ शोषण, अत्याचार और बलात्कार का ईनाम मिलता आ रहा है। वहीं साथ ही सुरक्षा बलों पर भी ऐसे कई आरोप लग चुके हैं और मामले न्यायालय में विचाराधीन है। मगर बड़ा सवाल तो ये भी है कि आदिवासियों को बस्तर में किससे अधिक खतरा है पुलिस व सुरक्षा बलों से या फिर नक्सलियों से?

सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर मांगी जानकारी -
छत्तीसगढ़ के बस्तर से कनाडाई सामाजिक कार्यकर्ता के अचानक गायब होने के मामले में सरकार गंभीर हो गई है। मामले में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर ओडीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बातचीत कर तुरंत जानकारी देने की बात कही है। सुषमा स्वराज ने अपहरण की आशंका को देखते हुए ओडीशा सरकार से इस कथित किडनैपिंग के पूरे मामले की रिपोर्ट भी मांगी है।
बताया जा रहा है कि कनाडाई सामाजिक कार्यकर्ता दो दिन पहले बस्तर घूमने पहुंचा था। जिसे अंतिम बार किष्टाराम थाने से करीब 12 किलोमीटर दूर सिंगामडगू गांव के पास देखा गया था। तो विदेश मंत्री ने छग शासन और मुख्यमंत्री से जानकारी क्यों नहीं मांगी? यह बहुत गंभीर स्थिति को दिखा रही, क्या विदेश मंत्री को छग शासन और प्रशासन की कार्यशैली तथा कार्यप्रणाली पर रत्ती भर भी विश्वास नहीं है। ट्वीट से तो यही समझ आया। 

आईजीपी ने कहा खोजबीन है जारी -
बस्तर के प्रभारी आईजीपी सुंदरराज पी. का कहना है कि उनको फोन करने वाले एक व्यक्ति ने कनाडाई का नाम जॉन बताया है। पुलिस इस बात का पता लगा रही है कि जॉन बस्तर कब पहुंचे थे और वे किनके संपर्क में थे। इसके अलावा जॉन के ट्रेवल एजेंट से भी संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस फोर्स को अलर्ट कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि जॉन कनाडा की एक संस्था इमिग्रेशन रेफ्यूजी सिटीजनशिप के मेंबर हैं। वे मुंबई से बस्तर पहुंचे हैं। जगदलपुर पहुंचने के बाद वे बाइक से सुकमा तक पहुंचे। इसके बाद सिंगामडगू गांव के आसपास से वे लापता हो गये हैं।

नक्सलियों पर अपहरण का आरोप -
पुलिस यह भी जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर कनाडाई सामाजिक कार्यकर्ता सुकमा क्यों गया था? बस्तर में उनका जानने वाला कौन था? कनाडाई युवक के अचानक गायब होने के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि उन्हें नक्सलियों ने अगवा कर लिया है। जबकि यह भी संभावना बढ़ती जा रही कि छग की असलियत बाहर न निकल पाए इसीलिए जान भी बाहर निकल न पाएं। 

दूतावास को नहीं है सटीक जानकारी -
जॉन खुद ही बस्तर के सुदूर इलाके में गये हैं और उन इलाकों में नेटवर्क नहीं होने के कारण उनके गायब होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कनाडा के दूतावास ने अभी तक इस बारे में किसी भी तरह की खबर से अनभिज्ञता जताई है। दूतावास के अधिकारियों का कहना है कि उनके देश का कोई नागरिक बस्तर गया भी था, इस बात की जानकारी फिलहाल उन्हें नहीं है। उन्होंने मुंबई दूतावास से इस संबंध में संपर्क कर जानकारी देने की बात कही है।

भूपेश ने भी ट्वीट कर उठाए सवाल -
मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने भी ट्वीट कर सामाजिक कार्यकर्ता के अपहरण को लेकर सरकार को घेरा है। उन्होंने लिखा है कि बस्तर में कनाडाई नागरिक का अपहरण रमन सरकार के सुरक्षा के उन दावों की पोल खोलता है। जो उन्होंने यूएसए में में जाकर किया था कि छत्तीसगढ़ में सब ठीक है। इसके साथ ही भूपेश ने कहा बस्तर में कनाडाई नागरिक का अपहरण गंभीर घटना है। यह दुनिया में छत्तीसगढ़ की छवि को नुक़सान पहुंचाएगा. उन्हें सुरक्षित छुड़ाना चाहिए।

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