Latest News

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

चक्रधर समारोह रायगढ़ में तृतीय संगीत संध्या पर हुआ विशेष कार्यक्रमों का मंचन

छत्तीसगढ़ 8 सितम्बर 2016 (रवि अग्रवाल). रायगढ़ के ऐतिहासिक व भव्य चक्रधर समारोह का विधिवत शुभारंभ मुख्यमंत्री ने किया तथा कुछ विशेष बातें कहते हुए नई योजनाओं की घोषणा भी की। त्रिवेणी संगम का यह समारोह रायगढ़ नगरी की शान व विशिष्ट पहचान बन चुका है। देश-प्रदेश से लेकर विदेश तक ख्याति अर्जित कर चुका है यह गणेश चक्रधर समारोह।

गीत संगीत व नृत्य के त्रिवेणी संगम से पूरा रायगढ़ रम गया है। रामलीला मैदान पर आयोजित यह समारोह अपने आप मेें एक लंबे युग का इतिहास खुद मेें समेटे हुए है। शास्त्रीय संगीत, कत्थक नृत्य व सूफियाने गीतों का जीवनकाल काफी उतार चढ़ाव भरा था, अत्यंत कठिन परिस्थियों से जूझा, अंग्रेज़ों द्वारा दमन करने का प्रयास झेला, अपनों की उपेक्षाओं का भी शिकार हुआ आदि समस्त कठिनाईयों का सामना करता खड़ा रहा राजा चक्रधर सिंह की प्रतिभा, अदम्य साहस, अदभुत कला कौशल व पारखी दृष्टिकोण के सहारे। चक्रधारी व त्रिवेणी संगम को अजर अमर गए राजपरिवार के छोटे पुत्र नान्हे राजा, जो आगे चलकर महाराजा चक्रधर सिंह बने। 

दुर्भाग्यवश महज़ 43 वर्ष की आयु मेें महाराजा का निधन हो गया। परंतु इतने से अल्प समय मेें उन्होंने इतिहास रच दिया, पहले उच्च शिक्षा प्राप्त किया, फिर युद्ध कौशल मेें महारत हासिल कर लिया, इन सबके पश्चात कत्थक परिवार की स्थापना कर दिया, जिससे उन्हें संगीत सम्राट की उपाधि प्रदान की गई। एक नरेश जिसने गीत संगीत व नृत्य को एक स्थायी आयाम दिया, प्रसिद्धि दिलाई, देश से लेकर विदेशी धरती तक परचम फहराया। वे एक प्रतिभाशाली तबला वादक थे, वे साहित्यकार बन कई किताबों की रचना हिंदी व उर्दू मेें किया, वे एक जबरदस्त शायर भी थे। समभाव व सदभाव की एक ऐसी मिसाल कायम कर गए राजा चक्रधर सिंह जिसे कोई सरहद, धर्म, जाति, क्षेत्र या भाषा मेें बांटा नहीं जा सकता है। इतने बड़े महान फनकार कलाकार व राजा के पूरे जीवन को समेटे हुए है चक्रधर समारोह।
           
येशुदास के गीत संगीत मेें खो गए श्रोतागण -
वहीं प्रथम गीत-संगीत संध्या का प्रारंभ पूरा माहौल पार्श्वगायक येशुदास ने गणेश वंदना के मंगल गीत 'राग हंस' ध्वनि से किया उनकी मधुर व बेहतरीन गायकी ने उपस्थित प्रत्येक श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया और झूमने पर विवश कर दिया। श्रोताओं में अभूतपूर्व उल्लास ऐसा कि श्रोताओं की तालियों की गड़गड़ाहट से व भक्ति की धारा ने ऐसा शमा बांधा जो देर तक बना रहा। पद्मभूषण पार्श्वगायक येशुदास ने शास्त्रीय गायन के क्रम में गुरू महिमा में स्तुति, कबीरदास रचित पद 'भजो रे भैय्या, राम गोविंद हरि', तेलगू कीर्तन, कर्नाटक संगीत-शैली पर आधारित 'राग पल्लवी' आदि में कई मधुर गीतों पर सुर बिखेरे। तत्पश्चात मंच पर व समारोह मेें उपस्थित दर्शकों की फरमाइश पर येशुदास ने हिन्दी फिल्मों के अनेक मधुर गीत भी सुनाए। इनमें जब दीप जले आना, चांद जैसे मुखड़े पे बिदिंया सितारा, का करू सजनी, गोरी तेरी गांव बड़ा प्यारा, जैसे गीतों को सुनकर सभी मदमस्त हो गए। प्रथमसंगीत संध्या की प्रस्तुति पर मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह भी उपस्थित रहे, साथ ही केन्द्रीय इस्पात राज्यमंत्री विष्णुदेव साय, नगरीय प्रशासन मंत्री, संस्कृति मंत्री, गृहमंत्री, संसदीय सचिव व विधायकगण के अलावा बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित थे।
   
द्वितीय संगीत संध्या पर अंकिता राउत ने समारोह में समा बांधा -
राज्य के ओडिसी नृत्यांगना अंकिता राउत ने गणेश वंदना से अपनी नृत्य का शुभारंभ किया। देर रात तक दर्शकों ने सुर-ताल एवं घुघरूं का लुत्फ उठाया और उनकी तालियों से पूरा समारोह स्थल गुंजता रहा। अंकिता ने पल्लवी राग बसंत एवं राग एकताल से ओडिसी नृत्य की प्रस्तुति देकर दर्शकों का मनमोह लिया। जैसे-जैसे रात घनी होते गई सुर-ताल-छंद से कलाकारों ने अपनी कला की सौंदर्य नृत्य प्रस्तुत देकर समा को बांधे रखा। इसी तरह श्रृंगारमणी गुरूसिंह लकी मोहती एवं पुर्णाश्री राउत ने देव स्तुति के विभिन्न रूपों में काली, रौद्र, राक्षस वध, वत्सल की नृत्य की प्रस्तुति ने दर्शकों को निहाल कर दिया तथा मुखारी पल्लवी से अपने नृत्य का समापन किया।
     
अमान खान के सुरीले गीतों की बौछार से दर्शक लगे थिरकने -
समारोह में जयपुर घराने के सुरीले गायक मोहम्मद अमान खान ने जब गीत 'कैसा जादू डाला रे... दीवाना किये जा... मधुबन में राधिका नाचे रे... उस गलियन में आना न जाना... के शास्त्रीय गायन ने समारोह मेें उपस्थित प्रत्येक को झूमने और थिरकने पर विवश कर दिया। समारोह की द्वितीय संगीत संध्या पर अंतिम प्रस्तुति भिलाई की टीम ने नृत्य नाटिका, साऊथ इंडियन व भरत नाट्यम के समायोजित फ्यूजन में कृष्ण राधा के प्रेम-वर्णन, रामलीला का चित्रण किया गया।
  
तृतीय संध्या मेें बरसा ताल वद्य कचहरी, कथक एवं छत्तीसगढ़ी लोक रंग -
चक्रधर समारोह की तृतीय संध्या को अनुराधा पाल एवं ग्रुप मुम्बई द्वारा 'स्त्री शक्ति' ताल वाद्य कचहरी, दिल्ली की विधा एवं अभिमन्यु लाल द्वारा कथक तथा पद्मश्री ममता चंद्राकर द्वारा छत्तीसगढ़ी लोक रंग की शानदार प्रस्तुति दी गई।
    
कबड्डी प्रतियोगिता का उदघाटन -
कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन शाम 4 बजे मोती महल परिसर में किया गया इस अवसर पर राज्य युवा आयोग के सदस्य समीर ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कबड्डी प्रतियोगिता 7 से 9 सितंबर तक चलेगा। कबड्डी प्रतियोगिता का समापन 9 सितंबर को शाम 5 बजे होगा। इस अवसर पर रायगढ़ विधायक एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला पंचायत व कलेक्टर रायगढ़ उपस्थित थीं।
  
राज परिवार संग एसपी मीणा ने कार्यक्रमों का लिया आनंद -
चक्रधर समारोह मेें जब राजा चक्रधर सिंह के वंशज पहुंचे तो लोगों ने खड़े होकर तालियों से उनका स्वागत अभिनंदन किया। राजपरिवार से उर्वशी देवी सिंह, कुंवर देवेन्द्र प्रताप सिंह की उपस्थिति से आयोजन की गरिमा व शोभा बढ़ गई, साथ ही रायगढ़ पुलिस अधीक्षक बी.एन. मीणा भी कार्यक्रम का आनंद लेने के उपस्थित रहे, साथ ही जिला पंचायत सीईओ, अपर कलेक्टर एवं वरिष्‍ठगणों ने भी कार्यक्रमों का भरपूर मज़ा लिया।

Special News

Health News

Important News

International


Created By :- KT Vision