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शुक्रवार, 12 अगस्त 2016

चिकित्सकों की उदासीनता से बदहाली का शिकार बना चिरमिरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र

छत्तीसगढ़ 12 अगस्त 2016 (अरमान हथगेन). कोरिया ज़िले का चिरमिरी एक कोयलांचल क्षेत्र में आता है, इन दिनों चिरमिरी नगरी का एक मात्र स्वास्थ्य केन्द्र ही अस्वस्थ हो गया है और इसकी हालत जर्जर व बदहाल हो गई है। जो तीमारदार मरीज़ के साथ यहां आता है वह भी बीमार पड़ जाता है। बारिश के मौसम में अस्पताल में मरीज़ों की भी संख्या काफ़ी अधिक हो जाती है और ऐसे में अस्पताल परिसर की हालत जर्जर होना काफ़ी चिंताजनक है।

जानकारी के अनुसार यहां स्थित डॉक्टरों को मरीज़ों से कोई लेना देना नहीं है, डॉक्टर कब आते है कब चले जाते है, ये किसी को पता तक नहीं चलता है। जिससे यह स्वास्थ्य केंद्र पदस्थ चिकित्सकों की लापरवाही व भर्राशाही का शिकार हो रहा है और दिन प्रतिदिन यहां की चौपट व्यवस्था और अधिक चौपट व मरियल होती जा रही है।
  
सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र में नहीं मिलती दवा -
यहां आए मरीज़ों से जब जानकारी ली गई तो उन्होनें बताया कि हम लोग यहां इलाज के लिये आए हुए हैं पर यहां से हमारे इलाज के लिये कोई भी दवाई उपलब्ध नहीं होती है और हम मेडिकल से पूरी दवाई लाते है साथ ही इलाज के भी मामले में काफ़ी आभाव रहता है। डाक्टरों का भी अता पता नहीं होता है।
     
स्वास्थ्य व्यवस्था लचर -
इस सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र की हालत दिनों  दिन बिगड़ती ही जा रही है सुविधा के नाम पर एक बहुत बड़ा छलावा मरीज़ों के साथ किया जा रहा है। इलाज करवाने आई महिलाओं ने बताया कि यहां पदस्थ नर्स किसी भी प्रकार का कोई ध्यान नहीं देतीं हैं। बोतल खत्म होने पर उन्हें खुद नर्सों को पहले खोजना पड़ता है फिर उसकी जानकारी देते हैं तब जाकर उनकी समस्या का समाधान हो पाता है साथ ही कई दिनों से इलाज के बाद भी रोगी के स्वास्थ्य पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा है।
  
अस्पताल परिसर में गंदगी का ढेर -
जब जानकारी लेने के लिये अंदर जाने की कोशिश किए तो देखा कि अस्पताल परिसर में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा हुआ है। महीनों तक टॉयलेट की सफ़ाई नहीं होती है जिससे मरीज़ों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, साथ ही इस गंदगी से मच्छर व मक्खियों का भी डेरा लगा रहता है।
    
अस्पताल परिसर कुत्तों का आरामगाह -
अस्पताल परिसर में कुत्ता का जमावड़ा रहता है जिससे लोगों में काफ़ी डर बना रहता है। ये आवारा कुत्ते आराम से अस्पताल परिसर में इधर उधर कहीं भी सोते रहतें हैं।
     
सालों से टूटा है सेफ़्टी टैंक -
सालों से टूटा सेफ़्टीकट्रंक आज तक नहीं बन पाया है जिससे निकलने वाली बदबू आस-पास के एरिया को भी दूषित कर रही है और अनेक प्रकार का बीमारी होने का डर बना रहता है।
      
इनका कहना है -
सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र में लगभग 1-2 माह से यह ट्रंक टूटा हुआ है। नगर पालिक निगम को भी इसकी जानकारी दी गई है पर उनके द्वारा भी कोई पहल नहीं किया गया। - डॉक्टर प्रदीप कुमार रोहन (एमबीबीएस एम.डी.)

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