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शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

छत्तीसगढ़ - एसपी मीणा की मुस्तैदी से सरपंच अपहरण मामले की गुत्थी सुलझी

छत्तीसगढ़ 25 अगस्त 2016 (रवि अग्रवाल). कापू क्षेत्र में नक्सली धमक की आशंका निर्मूल साबित हुई है। ग्राम पंचायत कंचीरा के सरपंच के घर पर हमले के प्रकरण में पुलिस ने मामले का पटाक्षेप करते हुए सभी सशस्त्र युवकों को गिरफ्तार कर लिया है। हिरासत में लिए गए आरोपियों के पास घटना में प्रयुक्त 05 चालू हालत कट्टे, चले एवं जीवित कारतूस तथा उद्यापित संपत्ति बरामद की गई।

यह पुलिस प्रशासन के लिए एक बड़ी सफलता है, इस सफलता का श्रेय काफी हद तक रायगढ़ एसपी बी.एस. मीणा को जाता है कि उन्होंने सूचना पश्चात एक भी मिनट व्यर्थ करने की बजाए मामले की गंभीरता को देखते हुए दिशा निर्देश दिए और तत्काल प्रशासनिक पुरजोर लगाया जिससे परिणाम बेहतर प्राप्त हुए और सभी आरोपी जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे। गौरतलब हो कि दिनांक 18/08/2016 के सवेरे सवेरे जिला एवं संभागीय मुख्यालय पर यह अफवाह तेजी से फैली कि जिले के सुदूरवर्ती थाना कापू क्षेत्र के ग्राम कंचीरा के सरपंच पियरसाय पिता देवारसाय लकड़ा को दिनांक 17/08/2016 की देर रात्रि अज्ञात हथियारबंद युवकों के द्वारा उसके घर से बंधक बनाकर अपने साथ ले जाया गया है। कुल मिलाकर फिल्मी स्टाइल में सरपंच का अपहरण किया गया था। वहीं इस मामले पर जिला मुख्यालय में तरह तरह की जनचर्चा रही कि क्षेत्र में नक्सलियों की धमक तो नहीं हो गई है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 से 2009 तक ग्राम कंचीरा एवं आसपास के वन क्षेत्रों में यदा कदा एकाध दो नक्सलियों की उपस्थिति बताई गई मगर कोई ठोस प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ था, इसीलिए इस बात को मात्र अफवाह करार दिया गया था। लगभग सात वर्ष पश्चात एकाएक नक्सलियों की अफवाह से केस अधिक चर्चा का विषय बनता जा रहा था। एक बार पुन: से नक्सलियों की अफवाह जोर पकड़ने लगी, परंतु ज्यादा हो हल्ला होने के पहले ही इस बार भी नक्सलियों की बात फिर से अफवाह ही साबित हुई और सभी आरोपी पुलिस हिरासत में हैं।

रायगढ़ पुलिस अधीक्षक बी.एन. मीणा को जैसे ही इस घटना की जानकारी हुई, इसे गंभीरता से लेते हुए थाना प्रभारी कापू को अपने सूत्रों से सत्यापन कराने की समझाईश देते हुए उपलब्ध अधिकतम बल को लेकर संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर कथित रूप से बंधक बनाये गये कंचीरा ग्राम सरपंच की पतासाजी के निर्देश दिये गये। साथ ही रक्षित केन्द्र से अतिरिक्त बल के साथ उन क्षेत्रों में कार्यरत तथा क्षेत्रीय जानकारी रखने वाले कर्मचारियों के 03 अलग अलग दस्त भेजे गये। अभियान की निगरानी करने के लिये स्वयं पुलिस अधीक्षक कापू प्रस्थित होने वाले ही थे कि उसी समय थाना प्रभारी कापू निरीक्षक हेरमन केरकेट्टा से सूचना प्राप्त हुई कि कंचीरा ग्राम सरपंच पियरसाय लकड़ा सुरक्षित अपने निवास में मिल गया है। जिसके द्वारा घटना का जो स्वरूप बताया गया, जिससे आशंका होने लगी कि घटना के पीछे आपसी रंजिश या अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों की संलिप्तता हो सकती है और घटनाक्रम फिरौती मांगने की रही होगी।

पीड़ित कंचीरा ग्राम सरपंच पियरसाय की रिपोर्ट पर थाना कापू में अप.क्र.74/16 धारा 458, 386, 34 भादवि पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया। थाना कापू क्षेत्र में लूटपाट करने वाले सशस्त्र आरोपियों की कोई पतासाजी नहीं होने से मामला उलझता प्रतीत हुआ। लेकिन एसपी ने अपने अनुभवों व घटनाक्रम के मद्देनज़र कुछ नये दिशा निर्देश दिए, जिस पर जैसे ही पुलिस ने सरहदी थानों/जिलों के शस्त्र वारदात करने वाले बदमाशों को रिकार्ड/चर्चा के आधार पर खंगालना शुरू किया तो दिनांक 21/08/2016 की रात्रि विश्वस्त सूत्रों से पहली सूचना हाथ लगी, जिला कोरबा के करतला एवं श्यांग थानों के कुछ बदमाश दुस्साहसी प्रवृत्ति के हैं तथा परस्पर संगठित होकर इस तरह के वारदात को उनके द्वारा अंजाम दिया जा सकता है क्योंकि पूर्व में भी ऐसे मामलों में संलिप्तता रही थी।

वहीं दूसरे स्थान के सूत्रों से भी एक जानकारी प्राप्त हुई कि ग्राम कंचीरा निवासी धनसिंह अगरिया के घर में ग्राम भेडीडांड थाना स्यांग जिला कोरबा निवासी उसका भांजा नंदलाल अगरिया और उसका दोस्त राजेश दास महंत कई दिनों से आकर कुछ दिनों पहले रह चुके थे। इस दौरान इनकी गतिविधियां भी काफी संदिग्ध प्रतीत हो रही थी।दो और दो जोड़कर चार, की तर्ज़ पर पुलिस ने अलग अलग सूत्रों से प्राप्त दोनों सूचनाओं में एकरूपता प्रतीत हुई और जिसने मामले को एक नई दिशा दी। इस पर एसपी मीणा के त्वरित आदेश पर, आनन फानन में 04 अलग अलग टुकड़ियां इन संदेहियों की पतासाजी के लिए गांव व आसपास से जानकारी के लिए रवाना की गई और अंतत: 22/08/2016 को 02 संदेही क्रमश: 'नंदलाल पिता रामसिंह अघरिया 25 वर्ष सा0 घुईडांड थाना श्यांतग जिला कोरबा' एवं 'राजेश दास पिता नारायण दास 28 वर्ष सा0 परसरखेत थाना करतला जिला कोरबा' मिले। जिन्होंने पूछताछ पर अपराध स्वीकारते हुए घटना में अपने 03 अन्य सहयोगियों का शामिल होना बताया। उन्होंने अपहरण पश्चात फिरौती की योजना बनाई थी परंतु पुलिस की अत्यधिक सक्रियता से सभी की हालत बिगड़ने लगी, पुलिस जिस तेज़ी के साथ आगे बढ़ती जा रही थी उससे आरोपियों को आभास हो गया कि जल्द ही पुलिस उन तक पहुंच जाएगी।

इससे परेशान होकर आरोपियों ने सरपंच पियरसाय को छोड़ भाग खड़े हुए। भागकर अपने गांव पहुंचे और दो दिनों तक अपने क्षेत्र से बाहर रहे। आरोपियों को लगा कि शायद सरपंच की घर वापसी के बाद मामला ठंडा हो जाएगा। परंतु यह उनकी भूल साबित हुई क्योंकि पुलिस अधीक्षक मीणा इस मामले की तह तक जाने के लिए ऐड़ी चोटी का ज़ोर लगा रहे थे। यहीं पर आरोपी गच्चा खा गए और पुलिस की गिरफ्त में आए। दोनों आरोपियों के द्वारा अन्य तीन आरोपियों के बारे में बताए गए आधार पर क्रमश: 'विष्णुदेव सिंह राठिया पिता मोहन सिंह राठिया 24 वर्ष सा0 कोलगा थाना करतला कोरबा','फीरसिंह राठिया  रामधन राठिया 25 वर्ष सा0 कोलगा थाना करतला जिला कोरबा' एवं 'आसन सिंह राठिया पिता धनसाय राठिया 25 वर्ष सा0 कोलगा थाना करतला जिला कोरबा' के भी घटना में शामिल होने पर पुलिस की हिरासत में पहुंचे। आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 05 कट्टे, पूर्व में चले एवं जीवित कारतूस बरामद किया गया है। घटना में 05 व्यक्तियों के शामिल होकर डकैती डालने के तथ्य उजागर होने पर प्रकरण में धारा 395, 397 भादवि विस्तारित की गई है। आरोपियों से पूछताछ जारी है जिनसे अपहृत कुछ संपत्ति बरामद किया जाना शेष है।





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