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सोमवार, 25 जुलाई 2016

मीना खलखो केस पर 6 वर्ष बाद जागी छत्तीसगढ़ सरकार, पुलिसवालों के खिलाफ दर्ज होगा रेप व हत्या का मुकदमा

छत्तीसगढ़ 25 जुलाई 2016 (जावेद अख्तर). राज्‍य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने विधानसभा में सरगुजा की आदिवासी लड़की मीना खलखो केस में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ बलात्कार और हत्या का अपराध दर्ज  करने की घोषणा की है। मीना खलको केस के बहुचर्चित मामले को विपक्षी कांग्रेस ने बीते दिनों सदन में उठाया था और न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर अब तक की कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री रामसेवक पैकरा को घेर कर प्रश्नों की झड़ी लगा दी थी।

जानकारी के अनुसार कांग्रेसियों ने दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी और सभी के नाम उजागर करने के लिए दबाव बनाया था। जिस पर गृहमंत्री ने न्यायिक जांच में दोषी पुलिस कर्मियों के नाम को बताने से इंकार कर दिया। गृहमंत्री का तर्क है कि उक्त प्रकरण वर्तमान में विवेचनाधीन है। गृहमंत्री के उत्तर से असंतुष्ट होकर मुख्य विपक्षी कांग्रेसी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। यहां तक कि मरवाही विधायक अमित जोगी भी कांग्रेस विधायकों के साथ सदन से बाहर चले गए।

कांग्रेस विधायक भूपेश बघेल ने प्रश्नकाल में यह मामला उठाया। उन्होंने कहा कि मीना खलखो के मामले की न्यायिक जांच के बाद दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अपराध दर्ज होना चाहिए था, लेकिन मामला सीआईडी को सौंप दिया गया। गृहमंत्री ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट पर कार्रवाई चल रही है। जांच में समय लगेगा। मीना खलखो न्यायिक जांच आयोग के जांच प्रतिवेदन के आधार पर तत्कालीन थाना प्रभारी चांदो और अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का अपराध पंजीबद्ध किया गया है। थाना प्रभारी चांदो निकोदम खेस्स व अन्य पुलिस कर्मियों के खिलाफ सीआईडी थाना पुलिस मुख्यालय में भी अपराध पंजीबद्ध किया गया है।

सदस्य भूपेश बघेल ने कहा कि रक्षक ही घटना करे तो अपराध और भी गंभीर हो जाता है। जांच प्रतिवेदन में मीना के साथ अनाचार की पुष्टि हुई है, राज्य की भाजपा सरकार द्वारा आयोग गठित कर जांच कराई गई थी। जांच रिपोर्ट में भी बलात्कार की पुष्टि हुई है लेकिन बलात्कार का प्रकरण फिर भी दर्ज नहीं किया गया। क्यों? राज्य सरकार को स्वंय द्वारा गठित जांच आयोग पर विश्वास नहीं है या जैसी रिपोर्ट सरकार चाहती थी वैसी रिपोर्ट नहीं बनी? वर्ष 2015 में जांच आयोग ने रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी बावजूद इसके वर्ष 2016 तक में भी सभी आरोपी पुलिसकर्मियों पर बलात्कार का मामला दर्ज नहीं किया गया।

सरकार क्या संदेश देना चाहती है, इसको भी स्पष्ट कर देना चाहिए क्योंकि सरकार की क्रियाकलापों से स्पष्ट हो रहा है सरकार सभी आरोपी पुलिस कर्मियों को येन केन प्रकारेण बचाने का ही प्रयास कर रही है। गृहमंत्री ने कहा कि आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ बलात्कार का भी मामला दर्ज होगा। उन्होंने कहा कि घटना के समय सर्चिंग के लिए चांदो थाना प्रभारी और 25 जवान गए थे, लेकिन इस पूरे मामले में कौन-कौन शामिल था, इसकी जांच चल रही है। भूपेश बघेल ने कहा कि आरोपी पुलिस कर्मियों के नाम बताने में तकलीफ क्यों हो रही है? गृहमंत्री ने यह भी कहा कि न्यायिक जांच आयोग के प्रतिवेदन पर पहले भी काफी चर्चा हो चुकी है। कांग्रेस सदस्यों ने आरोपी पुलिस कर्मियों को बचाने का आरोप लगाया और एक साथ खड़े होकर शोरशराबा करने लगे।
गृहमंत्री ने कहा कि विवेचना के बाद कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।
     
मीना खलखो नक्सली नहीं, बलात्कार के बाद हुई हत्या : रिपोर्ट में पुष्टि :-
अंबिकापुर के चंदो थाना क्षेत्र में आदिवासी युवती मीना खलखो की मौत के मामले की जांच के लिए बनी अनिता झा आयोग की रिपोर्ट को शनिवार 25 जुलाई 2015 को विधानसभा में पेश किया गया था। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार मीना खलखो की मौत से पहले उसके साथ बलात्कार किया गया। फारेन्सिक रिपोर्ट में इसकी पुष्टि भी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, मीना न तो नक्सली थी, न ही उसे पुलिस मुठभेड़ में मारा गया है। आयोग ने तत्कालीन थाना प्रभारी निकोदीन खेस का बयान लिया, जिसमें उसने कहा कि मीना खलखो का नाम नक्सलियों की सूची में नहीं है। वहीं वर्ष 2006 से 2011 तक चंदो थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक महेश कुमार ने भी स्वीकार किया कि मीना खलखो नाम की कोई नक्सली उसके सामने नहीं आई।

जबकि पुलिस ने आयोग के सामने अपने बयान में बताया था कि नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में एके-47 से 6 राउंड फायर किया गया, जिसके चार खोखे मिले। वहीं एसएलआर से 5 राउंड फायर किया गया। यह फायरिंग निकोदीन खेस, जीवन लाल और धरमलाल ने की थी। मीना खलखो की मौत एसएलआर की गोली से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, तत्कालीन थाना प्रभारी निकोदीन खेस ने बताया कि पुलिस और नक्सलियों की मुठभेड़ के बाद सुबह एक लड़की एंबुश में फंसी थी, जिसने अपना नाम मीना बताया तथा अपने साथ नक्सली कमांडर वीर साय और राजेंद्र सैरवार, मुन्‍नीलाल सहित 30-35 नक्सलियों के शामिल होने की जानकारी दी। लेकिन शपथ पत्र में गंभीर विरोधाभासी कथन सामने आए हैं। आयोग ने कहा कि मीना खलखो की मौत के लिए जिस हथियार का इस्तेमाल किया गया, वह पुलिस की ओर से इस्तेमाल हथियार से अलग नहीं है। इस घटना में मीना खलखो के अलावा किसी अन्य व्यक्ति की न तो मृत्यु हुई, न ही कोई घायल हुआ। इसलिए मीना खलखो की मौत के लिए पुलिस जिम्मेदार है और मुठभेड़ की कहानी मानने योग्य नहीं है।
  
25 पुलिसकर्मियों पर मामला दर्ज -
बलरामपुर के चांदो थाना क्षेत्र में मीना खलखो की हत्या के मामले में 25 पुलिसकर्मियों पर हत्या का मामला दर्ज किया गया। 25 जुलाई 2015 को सीआईडी के एडीजी राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सीआईडी ने जांच शुरू की। इस मामले में सीआईडी ने तत्कालीन थाना प्रभारी एन खेस, प्रधान आरक्षक ललित भगत, महेश राम, विजेंद्र पैकरा, इंद्रजीत पैकरा, पंचराम ध्रुव, श्रवण कुमार, भदेश्वर राम, मोहर कुजूर, संजय टोप्पो, मनोज कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। सीआईडी के आला अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच नए सिरे से शुरू की गई। जांच के तथ्यों का अध्ययन करने के बाद जो भी दोषी पुलिसकर्मी पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल गिरफ्तार किया जाएगा। इस पूरी जांच की मॉनीटरिंग डीजीपी एएन उपाध्याय कर रहे हैं। पुलिस मुख्यालय में सीआईडी के अधिकारियों को जल्द से जल्द जांच पूरी करने का निर्देश भी दे दिया गया था। दोषी पुलिसकर्मियों में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल की 12वीं और 14वीं बटालियन के सिपाही भी है। जुलाई 2011 में घटना के बाद इन पुलिसकर्मियों को पहले लाइन अटैच किया गया था, बाद में उनको अलग-अलग थानों में पदस्थ कर दिया गया। इससे पुलिस प्रशासन पर सवालिया निशान लगा और सरकार द्वारा मामले पर चुप्पी साधे रहने से भी छवि धूमिल हुई है।
    
14 अक्टूबर 2015 को हुयी थी याचिका पंजीकृत -
चार वर्ष पूर्व हुए बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में मीना खलखो हत्याकांड में राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग नई दिल्ली ने नंगे पांव सत्याग्रह की याचिका 696/33/16/2015 एएफई प्रकरण क्रमांक के रूप में पंजीकृत कर ली है। उक्त याचिका एक राजनैतिक दल की याचिका के साथ संलग्न की गई है। वर्ष 2011 में प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने इस मसले को उठाया था। राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के 30 सितंबर 2015 के पत्र के मुताबिक प्रकरण अन्वेषणाधीन है। नंगे पांव की याचिका में तत्कालीन आईजी राजेश मिश्रा की गिरफ्तारी व मीना खलखो के परिजनों को दस लाख रूपए मुआवजे की मांग की गई है। नंगे पांव सत्‍याग्रह द्वारा इस मामले में 2011 से ही उठाया जा रहा है। न्यायिक जांच आयोग का प्रतिवेदन चार वर्ष बाद आने के कारण प्रकरण को मानव अधिकार आयोग ले जाने में विलंब हुआ। आयोग में प्रकरण को ले जाने के पूर्व जिलाधीश व जिला पुलिस अधीक्षक बलरामपुर, संभागायुक्त व पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा रेंज, मुख्य सचिव व पुलिस महानिदेशक छत्तीसगढ़ शासन तथा मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री कार्यालयों का ध्यान आकृष्ट किया गया था, परंतु जिलाधीश बलरामपुर के अलावा किसी ने जवाब देना तक उचित नहीं समझा। श्री सिसोदिया का आरोप है कि सभी मामले को दबाने में लगे हैं।

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