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गुरुवार, 9 जून 2016

भारत को फर्स्ट टाइम 'सॉलिड यार' मिला अमेरिका, पाकिस्तान-चीन में छाई बेचैनी

नई दिल्ली, 09 जून 2016 (IMNB)। वादों और रिटर्न गिफ्ट्स की बौछार को देखकर ऐसा लग रहा है कि भारत को पहली बार बतौर 'सॉलिड यार' अमेरिका मिल गया है. अमेरिका से भारत की दिन-ब-दिन गाढ़ी होती दोस्ती को हमारे पड़ोसी देश पचा नहीं पा रहे हैं. एमटीसीआर (मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम) में एंट्री और एनएसजी में 'अंकल सैम' के समर्थन से पाकिस्तान और चीन में बेचैनी बढ़ गई है.

आइए जानें किस तरह भारत को कोसने और अपनी धाक जमाने में जुट गए हैं ये -
 
1. पाकिस्तान ने 48 देशों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में शामिल होने के लिए समर्थन पाने के लिहाज से अपने कूटनीतिक प्रयास तेज करते हुए सदस्य देशों से कहा कि इसकी सदस्यता का विस्तार करने के बारे में फैसला करते समय वे भेदभाव रहित रहें.

2. पाक के विदेश कार्यालय ने कहा कि अतिरिक्त विदेश सचिव (संयुक्त राष्ट्र और आर्थिक समन्वय) तसनीम असलम ने वियना में इस महीने एनएसजी के पूर्ण सत्र से पहले एनएसजी के सदस्य देशों के राजनयिक मिशनों के लिए एक ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया. बयान में कहा गया कि यह ब्रीफिंग एनएसजी में पाकिस्तान की सदस्यता के लिए समर्थन पाने के लिहाज से चल रहे कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है.

3. एनएसजी देशों को सचेत किया गया है कि किसी भी देश को विशेष छूट न दी जाए जो दक्षिण एशिया में रणनीतिक स्थिरता पर प्रतिकूल असर डालेगा. पाक मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सरताज अजीज ने रूस, न्‍यूजीलैंड और साउथ कोरिया के विदेश मंत्रियों से अपनी एनएसजी सदस्‍यता को लेकर बात भी की है.

4. पाकिस्तान को चीन का समर्थन है, जिसने उसे आश्वासन दिया है कि वह तब तक भारत की सदस्यता का समर्थन नहीं करेगा जब तक पाकिस्तान को भी यही दर्जा नहीं दिया जाए. मालूम हो कि पिछले महीने पाक ने एनएसजी की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल किया था.

5. अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच बार-बार होने वाली मुलाकातों के पीछे रणनीतिक विचार को वजह बताते हुए चीन के सरकारी मीडिया ने भारत को आगाह किया कि वह चीन पर लगाम लगाकर या एक के खिलाफ दूसरे पक्ष को चुनकर आगे नहीं बढ़ सकता.

6. शिन्हुआ समाचार एजेंसी ने भारत-अमेरिका संबंधों पर एक टिप्पणी में कहा, ओबामा के लिए, अमेरिका-भारत संबंधों को सुधारने से उनकी कूटनीतिक विरासत को मजबूत करने में मदद मिलेगी क्योंकि उनके पद छोड़ने में सात महीने बचे हैं, वहीं मोदी के लिए उनकी यात्रा का उद्देश्य वॉशिंगटन के साथ संबंधों के विकास के लिए नई रफ्तार पाना है.

7. कुछ साल पहले तक मोदी के अमेरिका की धरती पर प्रवेश करने पर रोक थी. अब मोदी जब ओबामा के साथ बातचीत के लिए वेस्ट विंग के प्रवेश द्वार पर पहुंचे तो सैन्य सम्मान के साथ उनकी अगवानी की गई. इसमें कहा गया, पर्दे के पीछे की बात वॉशिंगटन और नई दिल्ली दोनों की रणनीतिक सोच है.

8. शिन्हुआ ने शंघाई इंस्टीट्यूट्स फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के साथ कार्यरत भारतीय विशेषज्ञ झाओ गेनचेंग के हवाले से कहा कि अमेरिका और भारत के मूल्य एक दूसरे के लिए पूरी तरह उपयुक्त नहीं बैठते.

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