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शनिवार, 2 अप्रैल 2016

छत्तीसगढ़ - कैग रिपोर्ट से खुला सरकार का बड़ा घोटाला, छत्तीसगढ़ में 9,500 करोड़ का गड़बड़झाला

31 मार्च 2016 (छत्तीसगढ़ ब्यूरो). छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार एक बार फिर मुसीबतों में घि‍र सकती है. कैग की ताजा रिपोर्ट में राज्य में 9,500 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं की बात सामने आई है. इसमें उद्योपतियों को अनुचित रूप से लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगाया गया है. विधानसभा में गुरुवार को पेश किए गए छत्तीसगढ़ महालेखाकार की रिपोर्ट में विभिन्न विभागों और मदों में वित्तीय अनियमितता की बात सामने आई है.
प्राप्‍त जानकारी के अनुसार इसमें कहा गया है कि राज्य में उद्योपतियों को 325 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ पहुंचाया गया. जबकि शराब ठेकेदारों को भी 53.65 करोड़ के अनुचित लाभ की बात सामने आई है.

सीएजी रिपोर्ट पेश -
भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी)से प्राप्त प्रतिवेदन आज सदन के पटल पर रखा गया। संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी ने सदन के पटल पर प्रतिवेदन रखा। 31 मार्च 2015 को समाप्त वर्ष के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों पर प्रतिवेदन, राजस्व क्षेत्र पर, राज्य वित्त पर, सामान्य सामाजिक व आर्थिक (गैर सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम) क्षेत्रों पर तथा स्थानीय निकायों पर प्रतिवेदन,  छत्तीसगढ़ शासन (वर्ष 2016 का प्रतिवेदन संख्या-2) पटल पर रखा गया। गौरतलब है कि इससे पहले 2015 में भी कैग ने वित्त वर्ष 2010-11 ऑडिट रिपोर्ट (सिविल एंड कमर्शियल) में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा केंद्र से आवंटित ब्लॉक से कोयले के व्यावसायिक खनन के लिए सिर्फ एक बोली स्वीकार करने के लिए उसकी खिंचाई की थी. रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य में कोयला ब्लॉक आवंटन पर 1,054 करोड़ रुपये का संभावित नुकसान हुआ. हालांकि रमन सिंह की सरकार ने रिपोर्ट को 'काल्पनिक' बता दिया.

कैग की रिपोर्ट को सरकार ने बताया काल्पनिक -
छत्तीसगढ़ सरकार ने कहा है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की राज्य में कोयला ब्लॉक आवंटन पर 1,054 करोड़ रुपये के संभावित नुकसान की रिपोर्ट 'काल्पनिक' है. कैग ने वित्त वर्ष 2010-11 आडिट रिपोर्ट (सिविल एंड कमर्शियल) में अप्रैल में छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम (सीएमडीसी) द्वारा केंद्र से आवंटित ब्लॉक से कोयले के व्यावसायिक खनन के लिए सिर्फ एक बोली स्वीकार करने के लिए उसकी खिंचाई की है. भाजपा शासित राज्य की सरकार द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि कोयला ब्लाक भटगांव-दो और भटगांव दो विस्तार का आवंटन केंद्र सरकार द्वारा सीएमडीसी को व्यावसायिक खनन के लिए किया गया था. सीएमडीसी ने इन ब्लॉकों का विकास संयुक्त उद्यम में करने का फैसला किया. इस उद्यम में 51 प्रतिशत हिस्सेदारी सीएमडीसी ने अपने पास रखी है.

बयान में कहा गया है कि 49 फीसद हिस्सेदारी वाले संयुक्त उद्यम भागीदार के चयन के लिए सीएमडीसी ने प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया चुनी. भटगांव दो और भटगांव दो विस्तार के लिए क्रमश: पांच और दो बोलियां मिलीं. इनमें क्रमश: दो और एक बोली पात्रता मानदंड को पूरी करती थीं.बोली लगाने वाली कंपनियों को प्रत्येक टन कोयले के खनन पर सीएमडीसी को शुद्ध लाभ में 51 प्रतिशत हिस्सा या उनके द्वारा सरकारी कंपनी को की गयी सुनिश्चित भुगतान की पेशकश, में जो भी अधिक हो, उसे देना था.बयान में कहा गया है कि यह कोयला ब्लॉकों के विकास के लिए प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये संयुक्त उद्यम भागीदार के चयन का मामला था, न कि कोयला ब्लॉक आवंटन का.

बयान में कहा गया है कि सीएमडीसी और राज्य सरकार ने इस तथ्य की जानकारी छत्तीसगढ़ के महालेखाकार को दी थी. चूंकि एजी के पास किसी तरह की भूगर्भीय विशेषज्ञता नहीं है, इसलिए वह दोनों ब्लॉकों के तकनीकी अंतर को पकड़ नहीं सका और उसने नुकसान का काल्पनिक अनुमान लगा लिया.बयान में बताया गया है कि एसएमएस इन्फ्रास्ट्रक्चर लि. दोनों कोयला ब्लाकों के लिए सफल बोलीदाता रही. उसने सांविधिक शुल्कों का भुगतान करने के बाद इन परियोजनाओं में सीएमडीसी को क्रमश: रायल्टी के 460 प्रतिशत और रायल्टी के 108 प्रतिशत के बराबर भुगतान करने की पेशकश की.सीएमडीसी के निदेशक मंडल ने इन प्रस्तावों पर निर्णय किया और माना कि दूसरी परियोजना में पेश कम होने का कारण वहां की भूगर्भीय परिस्थितियां थीं क्यों कि उन परिस्थितियों में खनन लागत उंची होती है.

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