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बुधवार, 2 मार्च 2016

Kanpur - सुभाष पब्लिक स्कूल में हुआ सामूहिक कुकर्म का प्रयास

कानपुर 2 मार्च 2016 ( अभिषेक त्रिपाठी). कुछ दिन पहले ही शहर के नवाबगंज स्थित नामचीन पब्लिक स्कूल सेठ मोतीलाल खेडि़या के हाॅस्टल में 11वीं और 12वीं कलास के तीन स्टूडेंट्स ने 7वीं क्लास के एक छात्र को पकड़कर जबरन बारी-बारी से कुकृत्य किया। ये घटना कई अखबारों की सुर्खियों में छाई रही। लेकिन करोड़ों की लागत के भारी-भरकम भवनों और मोटी फीस वसूलने वाले दूसरे पब्लिक स्कूलों के प्रबंधकों ने घटना से कोई सबक नहीं लिया।  नतीजतन तीसरे- चौथे दिन ही कानपुर के दक्षिण में स्थित सीबीएसई बोर्ड के एक और नामचीन स्कूल ‘सुभाष पब्लिक सीनियर सेकेंड्री स्कूल’ में भी बिल्कुल ऐसी ही घटना घट गई।

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार 26 फरवरी के दिन, कक्षा 9 के तीन बिगड़ैल छात्रों ने अपनी ही क्लास और सेक्शन के एक सहपाठी को चलते स्कूल के बीच आखरी पीरियड में टाॅयलेट में दबोच लिया, और उससे जबरन कुकृत्य करने का प्रयास करने लगे। विरोध करने पर तीनों छात्रों ने ना सिर्फ उसको पीटा और धमकाया, बल्कि उससे कई तरह की अप्राकृतिक हरकतें करवाने की कोशिश की। पीडि़त छात्र किसी तरह इन तीनों वहशियों के चंगुल से छुटकर भागा-भागा क्लास तक पहुंचा और बुरी तरह रोते हुये अपने क्लास टीचर को वाक्या बताया। पीडि़त की बात को सुनकर हतप्रभ क्लास टीचर ने तीनों छात्रों को पकड़कर एक-दो थप्पड़ लगाये, डांटा-फटकारा और चुपचाप क्लास में बैठने को कह दिया। मामला वहीं पर खत्म कर दिया गया। 

लेकिन घटना से मानसिक रूप से बुरी तरह डरा-सहमा और शाॅक्ड छात्र जब घर पहुंचा तो रोज की तरह खुशी से मां से बतियाने, खाने-पीने और टीवी खोलकर बैठ जाने के बजाये सीधा जाकर बिस्तर पर कमरा बंद करके लेट गया और बुरी तरह रोने लगा। मां के लाख पूछने पर भी ना तो उसने कुछ बताया और ना ही खाना-पीना ही खाया। घरवालों ने बेटे की बुरी दशा देखाकर पीडि़त बच्चे के व्यापारी पिता को फोन करके तुरंत घर आ जाने को कहा। पीडि़त बच्चे के माता-पिता और चाचा ने शहर दायरा न्यूज को बताया कि अमूमन शैतानी करते रहने वाले बेटे को इस हाल में देखकर उनके होश फाख्ता हो गये। सभी ने ये सोचा कि लगता है वो स्कूल में कुछ ऐसी बड़ी शैतानी कर आया है कि अब उसके रेस्टीकेशन की नौबत आ गई और प्रिंसिपल ने घर वालों को अगले ही दिन बुलाकर लाने को कह दिया होगा। इससे बेटा शाॅक्ड और मेंटल ट्राॅमा की हालत में पहुंच गया है। ये सब सोचकर घरवालों ने पीडि़त बच्चे को खूब दुलारा-पुचकारा और हर तरह की गल्ती माफ करने का वायदा करके पूरी बात बताने को कहा।  तब पीडि़त बच्चे ने अपने पिता को अकेले में स्कूल में उसपर गुजरा पूरा वाकया तफ्सील से बताया। सुनते ही 9वीं में पढ़ने वाले इस 15 वषीर्य छात्र के पिता की हवाइयां उड़ गईं। पीडि़त के परिवार को जब घटना का पता चला तो सबमें आक्रोश व्याप्त हो गया। तुरंत ही स्कूल के लैंड लाइन नंबर पर फोन और कुछ एक टीचरों के मोबाइल पर फोन किया तो कोई रिस्पांस नहीं मिला। अल्टीमेटम पर स्कूल के प्रिंसिपल ने भी अभिभावकों से बात करना उचित नहीं समझा। तब आक्रोशित परिजन तुरंत प्रबंधक के घर पहुंचे। वहां पर प्रिंसिपल को बुलवाया गया। फिर स्कूल के अंदर बैठक जमी।  यहां से पूरे घटनाक्रम में मोड़ आया। पीडि़त बच्चे का परिवार जब स्कूल से निकले तो वो उनके रुख में ‘नर्मी’ थी। पूछने पर अभिभावकों ने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल ने अभिभावकों को बुलाकर उनके सामने आरोपी छात्रों को ना सिर्फ पनिश किया है, बल्‍िक आरोपी छात्रों के परिजनों से अंडर टेकिंग के तौर पर लैटर भी लिखवा लिये हैं। 

वहीं बच्चों को स्कूल से निष्काषित करने का वायदा भी किया है। लिहाजा वे लोग स्कूल प्रबंधन के रुख से संतुष्ट हैं। पीडि़त छात्र का परिवार मध्यमवर्गीय है। वो कपड़ों के पुराने व्यापारी हैं। फिर भी उनकी ये सारी बातें सुनने के बाद ये समझना कठिन हो रहा था कि आखिर क्यों वो अचानक इतने नरम हो गये हैं। बाद में उन्होंने खुलासा किया कि आरोपी तीनों छात्र बिगड़ैल किस्म के हैं। कुरेदने पर उन्होंने बताया कि बेटे के साथ ज्यादती करने वालों में से एक बच्चे का रिश्तेदार युवक घर तक आकर उनको कोई कार्रवाई करने पर परिणाम भुगतने की धमकी दे गया। धमकी देने वाला खुद को भाजपा का नेता बता रहा था। जिस छात्र की तरफ से कथित भाजपा नेता उनको धमकी देने पहुंचा तो, वो छात्र अव्यस्क होने के बवजूद खुद को भाजपा नेता बताकर सबपर रौब गांठता। इतना ही नहीं, उक्त छात्र बाकी दोनों आरोपी छात्रों के साथ बाइकर गैंग में घूमता है। पीडि़त के पिता के अनुसार आरोपियों में से एक डीबीएस काॅलेज के छात्र नेता का भांजा है। दूसरा भाजपा नेता का करीबी रिश्तेदार है, तो वहीं तीसरा शहर के एक मशहूर ‘कथावाचक’ का बेटा है। इसलिये वो लोग मामले को बढाना नहीं चाहते हैं। 
(घटना की जांच के लिखे गए पत्र को दिखाते कानपुर अभिभावक एसोसिएशन के पदाधिकारी)
अभिभावकों के अनुसार बेटा दो दिन बाद भी घटना के बाद के मेंटल ट्राॅमा से पूरी तरह उबर नहीं पाया है। ये बताने के बावजूद अज्ञात कारण से पीडि़त के पिता कार्रवाई नहीं चाहते थे।  उफ! स्कूल प्रबंधन का इतना गैर जिम्मेदाराना रवैया... घटना पर बात करने के लिये जब पत्रकार सुभाष स्मारक सीनियर सेकेंड्री स्कूल पहुंचे तो प्रिंसिपल ने इंटरकाॅम पर ही बात करके ही मिलने या किसी भी मसले पर बात करने से मना करवा दिया।  प्रिंसिपल द्वारा मिलने से मना करने के बाद पत्रकारों ने स्कूल के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर भट्ट को उनके मोबाइल संपर्क करने की कोशिश की। बार-बार काॅल करने पर बड़ी मुश्किल से उनका फोन उठा। पूछने पर वो बोले कि दुष्कर्म के प्रयास का मसला उनके संज्ञान में है, लेकिन पूरी जानकारी तो केवल प्रिंसिपल को ही है, प्रिंसिपल ही स्कूल का सारा काम देखते हैं। बाद में कभी प्रिंसिपल से ही बात कर लें। फिर एम.डी महोदय बोले कि मामला तो ऐसा कुछ बड़ा नहीं था, सुलझ तो गया है.

ऐसे स्कूल में सैकड़ों छात्राओं की सुरक्षा की क्या गारंटी -

मैनेजिंग डायरेक्टर सुधीर भट्ट के एटीट्यूड से स्कूल के बाथरूम में किसी छात्र को बंधक बनाकर दुष्कर्म का प्रयास उनके लिये कोई मायने रखता, जबकि विशाल भवन वाले इस स्कूल में सैकड़ों की संख्या में छात्रायें भी पढ़ती हैं। ऐसे प्रबंधन के काॅलेज में छात्राओं की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा..? क्योंकि एमडी को मामला भी बड़ा नहीं लग रहा है, ये संवेदनहीनता अत्यंत खेदजनक और अफसोस की बात है।  

सभी स्कूल प्रबंधक ये समझें कि मामला सुलझा नहीं, बल्कि स्कूल परिसरों और अंदर शौचालयों में होनेवाली ऐसी शर्मनाक घटनायें किशोरों की भयानक रूप से विकृत होती और उलझती मानसिकता को दर्शा रही हैं, वहीं ऐसी घटनाओं के शिकार होने वाले बच्चों और उनके अभिभावकों के मनमष्तिष्क पर कितना गहरा घाव हमेशा के लिये छोड़ जायेंगी ये सोचने वाली बात है। जिनपर अपने स्कूलों के परिसर में बच्चों को एक सुरक्षित और नैतिक माहौल देकर बच्चों को संवेदनशील बनाना चाहिये वो ही ऐसे ‘गैर जिम्मेदाराना’ बयान देंगे, और पीडि़तों के अभिभावकों को प्रेशराइज करके मुंह बंद रखने को मजबूर करेंगे। 

अभिभावक एसोसिएशन ने डीडीआर से की जांच की मांग -
सुभाष स्मारक स्कूल परिसर में बच्चे से सामूहिक दुष्कर्म के प्रयास का मामला संज्ञान में आने पर कानपुर अभिभावक एसोसिएशन ने भी स्टैंड लिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय शुक्ला ने मंगलवार को कौशलपुरी स्थित कार्यालय में पदाधिकारियों संग बैठक करके स्कूल में घटना की निष्पक्ष जांच करने के लिये डिप्टी डायरेक्टर एजूकेशन, माध्यमिक शिक्षा और संयुक्त शिक्षा निदेशक को तुरंत एक पत्र लिखा है। पत्र में एक कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच के लिए कहा है। वहीं एसोसिएशन ने स्कूल के परिसरों में बच्चों की सुरक्षा को असरटेन करने की मांग की है। श्री शुक्ला के अनुसार वो लोग ये देखेंगे कि परिसरों में होने वाली ऐसी जघन्य घटनाओं के बावजूद संवदेनहीनता दिखाने वाले प्रबंधतंत्र जागें, नहीं तो सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे। वहीं कहा कि स्कूल प्रबंधन इतनी मोटी फीस एंठते हैं, बच्चों को परिसर में पढ़ाई के आठ घंटे के दौरान सुरक्षित तो रखें, वर्ना अभिभावकों का विश्वास खो देंगे। 

कानूनी कार्रवाई होनी जरूरी: एडवोकेट केके शर्मा
केंद्र सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल एडवोकेट कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि स्कूलों की लापरवाही से ही परिसर में ऐसा घिनौना कृत्य करने की हिम्मत हुई। उन्होंने शहर दायरा न्यूज़ से कहा कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम और चाइल्ड प्रोटेक्शन एक्ट के अंतर्गत प्रबंधकों व प्रिंसिपलों पर कार्रवाई होनी चाहिये। राइट टू एजूकेशन, यानि शिक्षा के अधिकार के अधिनियम मे तो कई ऐसी धाराये हैं जिनमें मास्टर के छड़ लेकर क्लास में बैठने तक को स्टूडेंट्स को भयाक्रांत करने का प्रयास घोषित कर अपराध की श्रेणी में डाला गया है। वहीं छात्र-छात्रा को पीटने पर टीचर पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है। फिर बच्चों के साथ स्कूल परिसर में यौन कुकृत्य तो एक्ट के अनुसार जघन्य अपराध है। अभिभावक या पीडि़त बच्चे कानपुर में किशोर न्यायालय में स्कूल परिसर में हुये ऐसे सेक्सुअल माॅलेस्टेशन के खिलाफ वाद दाखिल कर सकते हैं। वहीं कई सरकारी हैल्प लाइनों के नंबर इंटरनेट से जुटाकर शिकायत सीधे दर्ज करा सकते हैं।
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(नोट :- हमारे के पास पीड़ित छात्र के अभिभावकों और स्कूल के एमडी से बातचीत के फ़ोन एवं वॉइस कॉल रिकार्ड्स के अलावा आरोपी छात्रों के परिजनों द्वारा दिए गए माफीनामा पत्रों की कॉपीज मौजूद हैं। जिन्हें पीड़ित और आरोपी छात्रों के परिवारों की प्रतिष्ठा को देखते हुए सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। पर किसी विशेष परिस्‍थिति में ये पब्लिक किये जा सकते हैं)
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