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शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

छत्तीसगढ़ - जिस टेपकांड पर मचा सियासी बवाल, उसे ही जांच में गायब कर मुख्य सचिव ने किया कमाल

रायपुर/छत्तीसगढ़ 06 फरवरी 2016 (ब्यूरो छग). अंतागढ़ उपचुनाव के जिस टेपकांड पर सियासी बवाल मचा है, वो मुख्य सचिव विवेक ढांड की जांच में ही गायब हो गया। चुनाव आयोग ने यह मामला उजागर होने के बाद 30 दिसम्बर को मुख्य सचिव को संपूर्ण मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जांच रिपोर्ट में इस टेपकांड को ही दरकिनार रखा गया और अनछुआ रहा।

इस रिपोर्ट में कांग्रेस प्रत्याशी मंतूराम के नामांकन वापसी में किसी तरह का लेन-देन या मैदान छोड़ने के लिए मजबूर करने से इंकार किया गया। यह रिपोर्ट आयोग को भेज दी गई। जिस पर 8 फरवरी तक आला कमान से निर्णय आने की संभावना पार्टी के वरिष्ट नेताओं ने जताई है। इस टेपकांड में चुनाव आयोग ने खुद ही संज्ञान लिया था। इसका आधार एक अंग्रेजी अखबार के खुलासे को बनाया गया। आयोग से जांच के निर्देश मिलने के बाद मुख्य सचिव ने कांकेर के कलक्टर और पुलिस अधीक्षक से निर्धारित प्रपत्रों में जानकारी मांगी। सूत्रों के अनुसार, इन प्रपत्रों में दोनों अधिकारियों से यह पूछा गया कि - 

क्या चुनाव के दौरान किसी तरह की गड़बड़ी हुई?
कुल कितने प्रत्याशी थे?
उनमें से जिन प्रत्याशियों ने भी नाम वापस लिया क्या उन पर कोई दबाव था?
प्रत्याशियों के खर्च की जानकारी भी मांगी गई थी?

बताया जाता है कि मुख्य सचिव की ओर से जो जानकारी मांगी गई थी, वह पूर्व में की गई एक जांच के लिए मांगी गई जानकारियों से काफी मेल खाती थी, ऐसी जानकारियां नहीं मांगी गई जिससे कांग्रेस के दिग्गज नेता अजीत जोगी और मुख्यमंत्री के दामाद डॉ पुनीत गुप्ता के लिए दिक्कतें पैदा हो। कांकेर के एसपी जितेंद्र मीणा ने स्वीकार किया कि उनसे जो जानकारी मांगी गई थी, उसमें ऑडियो टेप की जांच के संबंध में कोई दिशा-निर्देश नहीं थे। इधर अंतागढ़ चुनाव मैदान से हटने वाले प्रत्याशी मंतूराम पवार का कहना है, उन्हें जांच-पड़ताल अथवा बयान देने के लिए मुख्य सचिव की ओर से किसी तरह का न तो पत्र भेजा गया और न ही मेल किया। वहीं टेप में जिनकी आवाजें हैं उनसे भी संपर्क नहीं किया गया। वहीं दूसरी ओर अंतागढ़ उपचुनाव टेपकांड में मुख्य सचिव विवेक ढांड द्वारा चुनाव आयोग को दी गई जांच रिपोर्ट पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कई सवाल उठाए। बघेल ने कहा, उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रहे मंतूराम पवार और 9 निर्दलीय उम्मीदवारों के चुनाव मैदान से हट जाने और फिक्सिंग का कथित ऑडियो टेप सामने आने के बाद इसकी शिकायत उन्होंने और नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने आयोग से की थी। इसकी जांच के लिए आयोग ने मुख्य सचिव को जांच अधिकारी नियुक्त कर अपने अभिमत के साथ रिपोर्ट देने के लिए कहा था। बघेल ने हैरानी जताई कि शिकायत उन्होंने की और किसी भी जांच अधिकारी ने उनसे ही पूछताछ नहीं की।
 
बघेल के मुख्य सचिव से 10 सवाल - 

- ऑडियो टेप का खुलासा करने वाले फिरोज से ही क्यों जानकारी मांगी?
- यह किस आधार पर तय हुआ कि टेप में फिरोज की ही आवाज है और सबसे पहले उससे ही पूछताछ जरूरी है?
- यदि मुख्य सचिव की रिपोर्ट गोपनीय थी तो फिर मेल लीक कैसे हुई?
- चुनाव आयोग के निर्देश के बाद जांच अधिकारी कौन था?
- किन-किन बिंदुओं पर जांच की गई?
- टेप में जिनका जिक्र है और जिनकी आवाजें हैं, क्या उनसे पूछताछ की गई?
- क्या मामले में मंत्री राजेश मूणत से पूछताछ की गई?
- टेपकांड में महत्वपूर्ण किरदार रहे मंतूराम पवार से क्यों कुछ नहीं पूछा गया। उन्हें कब मेल किया गया?
- टेपकांड में धमकी और प्रलोभन की बातें सामने आने पर उन्हें आपराधिक मामलों की जांच का अधिकार है?
 
कुल जमा निष्कर्ष यही निकाला जा सकता है कि सचिव विवेक ढांड ने ऐसा कोई भी प्रश्न या बात नहीं उठाई है जिससे कांग्रेस व भाजपा या किसी भी एक को नुकसान उठाना पड़े।

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