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सोमवार, 21 सितंबर 2015

कानपुर - अधिकारी समझायें हजार बार, हम तो वसूली करेंगे यार

कानपुर 21 सितम्‍बर 2015(सूरज वर्मा). पुलिस के आलाधिकारी चाहे लाख प्रयास करें कि पुलिस जनता के साथ मित्रता पूर्वक व्यवहार करे लेकिन उनके ही कुछ कर्मचारी उनके प्रयासों पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। हकीकत तो यही है कि जनता की रक्षा करने वाले ही जनता के भक्षक बनते जा रहे हैं। वर्दी वाले गुंडे बनकर चौराहों पर अवैध वसूली, हफ्ता वसूली जैसे कामों को करने में लगे हुये हैं।

कल लखनऊ में एक ऐसा मामला दिखा जिसमें दरोगा जी वर्दी के नशे में इतना चूर हो गये कि जीपीओ के बाहर एक बुजुर्ग के साथ बदसलूकी की व लात मार कर उसके टाइपराइटर को तोड दिया, दरोगा जी इतने में ही शांत नही हुये वहीं पास में बनी हुयी चाय की दुकान में दूध के बर्तनों को उलटा कर दूध सडक पर बहा दिया। ऐसे कई मामले हैं जहां पुलिस वर्दी का बेजा इस्तेमाल करके, रौब दिखाकर आम जनता को आंखे दिखाते हैं और वसूली करते हैं। वसूली का आलम ये है कि कानपुर यातायात पुलिस में एक टी0आई0 अपने साथ दो होमगार्ड को लेकर चौराहे पर चेकिंग के नाम पर खुलेआम वसूली करते हैं (फोटो देखें)। उनकी नजर में ये वसूली नहीं है बल्कि सुविधा शुल्क है। जैसे गुंडे गुंडा टैक्स वसूलते हैं, वैसे ही कुछ वर्दी वाले गुंडे सुविधा शुल्क वसूलते हैं। वर्दी पहनते ही कुछ पुलिसवालों की मानो संवेदनशीलता खत्म हो जाती है। इनके क्रूर रूप से मानवता शर्मसार हो यही कहती है कि ऐसे रक्षक से तो भगवान ही बचाये। चेकिंग के नाम कोल्‍ड ड्रिंक्स के लोडरों से कोल्‍ड ड्रिंक्स से भरे गत्ते रखवा लेते हैं। जिसे ये सुविधा शुल्क कहते हैं।आम जनता की रक्षा के लिये ली गई कसमें, प्रतिज्ञा ये सब भूल गये हैं। ये वर्दी वाले लाइसेंस धारी गुंडे हैं जो लाइसेंस (वर्दी) दिखाकर वसूली करते हैं।


(उपरोक्‍त लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्‍यक्‍त किये हैं, इनसे सम्‍पादक का सहमत होना आवश्‍यक नहीं है)  

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