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रविवार, 23 अगस्त 2015

मोदी के सत्ता में आने के बाद से अपनी शर्तों पर वार्ता करना चाहता है भारत : अजीज

इस्लामाबाद, 23 अगस्त 2015 (IMNB). पाकिस्तान द्वारा कश्मीर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर वार्ता का जरुरी हिस्सा बताने तथा हुर्रियत नेताओं से मुलाकात की योजना को सही ठहराने से दोनों देशों के बीच प्रस्तावित इस बातचीत के खटाई में पडने के आसार और बढ़ गये हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज ने इस्लामाबाद में एक संवाददाता सम्मेलन में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता संभालने के बाद से भारत अपनी शर्तों पर पाकिस्तान से बातचीत करना चाहता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भारत हुर्रियत नेताओं से उनकी प्रस्तावित बातचीत को मुद्दा बनाकर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता को रद्द करने का रास्ता खोज रहा है। उन्होंने कहा कि भारत हम पर प्रस्तावित बातचीत के लिये शर्त लगाने और ऊफा में हुये समझौते का उल्लंघन करने का गलत आरोप लगा रहा है जबकि हम इस समझौते के अनुरूप कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत के लिये तैयार हैं। उन्होंने भारत पर ऊफा समझौते की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाते हुये कहा कि वह अभी भी बातचीत के लिये नई दिल्ली जाने को तैयार हैं लेकिन इसकी कोई पूर्व शर्त नहीं होनी चाहिये तथा कश्मीर सहित सभी मुद्दों पर बातचीत होनी चाहिये क्योंकि कश्मीर पर चर्चा के बिना बातचीत का कोई मतलब नहीं है। 

कश्मीर के मुद्दे के बिना भारत के साथ कोई गंभीर एवं सार्थक चर्चा हो ही नहीं सकती। भारत पहले ही कह चुका है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत सिर्फ आतंकवाद के मुद्दे पर होगी तथा उसे इस बातचीत से पहले अजीज की हुर्रियत नेताओं से बातचीत करने की शर्त स्वीकार नहीं है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि पाकिस्तान के साथ सिर्फ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल बात करेंगे और केवल आतंकवाद पर ही चर्चा होगी। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत का दारोमदार अब पाकिस्तान पर है। इस बातचीत का एजेंडा उफा में बनी सहमति के आधार पर ही तैयार किया गया है तथा पाकिस्तान को इससे हटना नहीं चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत पाकिस्तान से सीधी बातचीत के अपने पुराने रुख पर कायम है और इसमें हुर्रियत या किसी अन्य पक्ष की मौजूदगी स्वीकार नहीं है। भारत बातचीत से हर समस्या का हल निकालना चाहता है। पाकिस्तान को भी सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए। दोनों देशों की ओर से अभी तक इस बातचीत को रद्द करने की बात नहीं की गयी है लेकिन दोनों के कड़े रूख को देखते हुये बातचीत होने की संभावनायें क्षीण होती जा रही हैं।

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