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रविवार, 23 अगस्त 2015

शाहजहाँपुर - डीएम की क्‍लास में खुल गया खेल, बच्‍चे और मास्‍टर दोनों हुये फेल

शाहजहाँपुर 23 अगस्त 2015 (अमित बाजपेई). सूबे के सरकारी स्‍कूलों का बुरा हाल तो जगजाहिर है पर टीचरों का भी हाल बेहाल है ये पोल तब खुली जब डीएम ने शनिवार को सिधोली ब्लाक के समग्र गाँव जमुनिया के प्राथमिक व जूनियर स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता जाँची। डीएम के टेस्ट में बच्चे फेल हुये तो गुरु जी की भी कलई खुल गई । गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा करने वाले गुरु जी पडोसी देशों की राजधानी नहीं बता पाये तो जूनियर के छात्र अंग्रेजी में भारत का नाम नही बता पाये।

नाराज डीएम ने जब शिक्षकों का यह हाल देखा तो उनका पारा चढ़ गया और जमकर फटकार लगाई। जब वहां का मिड डे मील देखा तो आलू की सब्जी और चावल की क्वालिटी खराब देख वहां मौजूद प्रधान के प्रतिनिधि से पूछा कि क्या वे घर में भी एेसा ही खाना बनवाते हैं। खुद अच्छा खाते हैं तो बच्चों को एेसा खाना क्यों दिया जा रहा है । इसके बाद वह पूर्व माध्यमिक स्‍कूल के बच्चों से देश व प्रदेश की राजधानी के साथ ही पीएम व सीएम के नाम पूछे तो जवाब सही मिला पर जब अमेरिका, नेपाल, पाक अदि पडोसी देशों के नाम पूछे तो बच्चे छत ताकने लगे । बच्‍चे ही नहीं हेडमास्टर देवेंद्र यादव भी राजधानी के नाम पूछने पर छत को देखने लगे। 

दूसरे कमरे में शिक्षिका पुष्पतला सामाजिक विज्ञान पढ़ा रही थीं, डीएम ने छात्रों से पूछा अकबर कौन था, अकबर और औरंगजेब का क्या रिश्ता था, मुगल और मंगोल कौन थे, पर इनमें से किसी भी सवाल का जवाब नहीं मिला। फिर डीएम ने पूछा कि धरती की ऊपरी सतह को क्या कहते है पर बच्चे चुप्पी साधे रहे। शिक्षिका पुष्पलता भी इनमें से किसी सवाल का जवाब नहीं दे पाई इस पर डीएम ने कहा खुद कुछ नहीं आता तो बच्चों को क्या पढाओगी। विचारणीय है कि जब शिक्षकों का ये हाल है तो वे बच्‍चों को क्‍या सिखायेगें ये तो आप समझ ही गये होगें।

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