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मंगलवार, 3 फ़रवरी 2015

आतंक के मसले पर पाक के खिलाफ भारत को चीन-रूस का समर्थन

पेइचिंग. अमेरिकी से प्रगाढ़ होते भारत के रिश्ते और ओबामा के भारत दौरे का असर चीन और रूस पर दिखने लगा है। इसी सिलसिले में सोमवार को पेइचिंग में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के उस प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है जो शर्तिया तौर पर आतंकवाद के मसले पर पाकिस्तान के खिलाफ जाएगा।
भारत 26/11 के मुंबई हमले समेत देश में हुए दूसरे हमलों में शामिल आतंकवादियों को अपने यहां पनाह देने और उन्हें जरूरी साजो-सामान मुहैया करवाने के लिए पाकिस्तान को अलग-थलग करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव लाना चाहता है ताकि आतंकियों को पनाह और वित्तीय मदद देने वालों को दंडित किया जा सके। इस लिहाज से भारत के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा जब इस मसले पर उसके समर्थकों की सूची में चीन और रूस का नाम भी जुड़ गया। यह बहुत दुर्लभ मौका है जब पाकिस्तान के मित्र माने जाने वाले चीन ने आतंक के मुद्दे पर इस्लामाबाद के खिलाफ कदम उठाया है। पेइचिंग का यह कदम ना केवल नई दिल्ली के प्रति उसके नजरिए में बदलाव के महत्व को दर्शाता है बल्कि शिनजिआंग प्रांत में आतंकवाद के उसके अपने मसले पर उसकी गंभीरता को भी रेखांकित करता है। चीन हमेशा से कहता रहा है कि शिनजिआंग में आतंकवाद के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है। सोमवार को रूस-इंडिया-चीन (आरआईसी) सम्मेलन में भाग लेने के बाद तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने साझा घोषणा पत्र जारी किया जिसमें आतंकी गतिविधियों में शामिल साजिशकर्ताओं, संगठनों और इसे वित्तीय मदद देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया गया है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि तीनों विदेश मंत्रियों ने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौतों को अंतिम रूप दिए जाने की जरूरत पर भी बल दिया। भारत 19 साल पहले ही यह प्रस्ताव लाया था लेकिन तब से इस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। सोमवार को जारी घोषणा पत्र में कहा गया है कि, 'मंत्रियों ने इस बात पर प्रतिबद्धता जताई कि आतंकी गतिविधियों पर किसी भी तरह का वैचारिक, धार्मिक, राजनीतिक, जातीय, रंग या किसी दूसरी तरह की दलील नहीं दी जा सकती।'

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