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शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

रेल का खेल (6) - अधिकारी को करके मैनेज, टैक्‍स चुराकर करते डैमेज

कानपुर 11 जनवरी 2019 (मोहम्मद नदीम). भारत जैसे लोकतांत्रिक देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए कहीं ना कहीं जनता द्वारा चुकाए गए टैक्स की अहम भूमिका रहती है, परन्तु कुछ लोग ऐसे भी हैं जो पूरे जोर से कोशिश में लगे रहते हैं कि उन्हें एक भी पैसा टैक्‍स सरकार को ना देना पड़े। इस काम में उनकी सहायता करने का बीड़ा उठाते हैं विभागीय अधिकारी, नियमावली के सारे नियमों को ताक पर रख टैक्स चोरों के लिए सारे मार्ग खोल देते हैं ताक़ि टैक्स चोर आसानी से करोड़ों के टैक्स की चोरी करके लाखों कमा सकें। इसके एवज में विभाग को भी मोटी रकम डकारने को मिलती है, उनके इस कृत्य से देश का कितना नुकसान होता है इससे उनको कोई सरोकार नहीं है।

ताजा मामला कानपुर सेंट्रल रेलवे स्‍टेशन के पार्सल विभाग का है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार की लाख कोशिशों के बावजूद कानपुर सेंट्रल रेलवे स्‍टेशन के पार्सल विभाग में टैक्स चोरी के मामले कम होने के बजाए बढ़ते ही जा रहे हैं। जिससे सरकार को रोजाना लाखों का चूना सिर्फ कानपुर रेलवे विभाग से ही लगता है। सूत्रों की माने तो टैक्स चोरी का मुद्दा कोई नया नहीं है, टैक्स चोरों की कई पीढ़ी इस कार्य में लिप्त रही हैं। टैक्स चोरी के कार्य में रातों रात लाखों के वारे न्यारे हो जाना इसका प्रमुख कारण है। कभी स्टेशन किनारे फलों का ठेला लगाने वाला आज टैक्‍स चोरी की बदौलत करोड़ों की संपत्ति का मालिक बना बैठा है, उसके अाधीन कार्य करने वाले भी लाखों में खेल रहे हैं।


कई बार दलाली के इस धंधे में वर्चस्व को लेकर गोलियां भी चली हैं, इतना होने के बाद भी आज तक किसी भी दलाल का बाल भी बांका नहीं हुआ है। सूत्रों की माने तो क्षेत्रीय पुलिस से लेकर रेलवे पुलिस तक इनके आगे नतमस्तक रहती है। वरना मजाल है कि पुलिस के रहते थाना तो दूर चौकी के पास से भी बिना शुल्‍क दिये कुछ निकल जाए। विचारणीय है कि रेलवे जैसे संवेदनशील विभाग से एक झोला भी बिना चेकिंग किए निकल जाना सम्भव नहीं हो सकता है तो फिर टैक्स चोरी का माल कैसे निकल जाता है।


सूत्र बताते हैं कि जीएसटी विभाग के अधिकारी भी मात्र औपचारिकता निभाने के लिए ही पार्सल गेट पर ड्यूटी देते हैं वरना रोज़ाना बिना बिल के माल का सैकड़ों लोडरों द्वारा आवगमन होता है, कोई भी जीएसटी अधिकारी बिल चेक करने की जहमत नहीं उठाता है। सूत्र ये भी बताते हैं अधिकारी उसी माल पर कार्यवाही करते हैं जिस माल पर उनकी पत्ती नहीं लगी होती है। हाल ही में इसी वसूली के चक्कर में अधिकारियों व व्यापारियों में मारपीट भी हुई थी, जिसकी रिपोर्ट हरवंश मोहाल थाने में की गई थी पर बाद में मामले को रफा दफा कर दिया गया।


जानकारों की माने तो RPF व GRP का कार्य है कि स्‍टेशन व यात्रियों की सुरक्षा करें, अपराध होने से रोकें, कोई भी माल चोर रास्ते या बिना पार्सल विभाग की मुहर लगे रेलवे में आता है तो उसे जब्त करके माल लाने वाले के खिलाफ तुरन्त कार्यवाही करें। परन्तु कार्यवाही करने के बजाय रेलवे पुलिस उन्हें बचाने के लिए नियमवाली के सारे नियम तोड़ मरोड़ देती है और स्‍टेशन व यात्रियों की सुरक्षा से भी खिलवाड़ करती है। अभी हाल ही में चार्ज लिए आरपीएफ इंस्पेक्टर प्रद्युम्न कुमार ओझा टैक्स चोरी के मामले को पार्सल विभाग पर थोपते हुये अपनी जिम्‍मेदारी से कन्‍नी काटते हुये कहते हैं कि कोई चोरी की लिखित शिकायत करता है तो कार्यवाही की जाएगी। विभागीय अधिकारियों के इस रवैये से तो साफ झलकता है कि टैक्स चोरों का रंग जमकर इन पर चढ़ा हुआ है।

बहरहाल मामला कुछ भी हो अगर जल्द ही उच्चाधिकारियों ने मामले को संज्ञान में लेकर भ्रष्ट अधिकारियों के साथ दबंग टैक्स चोरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही ना की तो सरकार को करोडों के टैक्‍स से महरूम करने का ये सिलसिला निरन्तर जारी रहेगा और इसका भुगतान देश की डांवाडोल होती अर्थव्यवस्था को चुकाना होगा।




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