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सोमवार, 19 नवंबर 2018

ताबड़तोड़ एनकाउंटर - क्या सुधरेंगे कानपुर के हालात ?

कानपुर 19 नवम्‍बर 2018 (सूरज वर्मा). यूपी की जेलों में अचानक भीड़ बढ़ गई है. जिस रफ्तार से ये भीड़ बढ़ रही है, उसे देखते हुए लगता है कि कहीं जल्दी ही जेलों के बाहर हाउस फुल का बोर्ड ना लग जाए. दरअसल, उत्तर प्रदेश में बदमाशों को जान के ऐसे लाले पड़ गए हैं कि उन्हें जान बचाने के लिए फिलहाल जेल से सुरक्षित कोई दूसरी जगह सूझ ही नहीं रही है. यही वजह है कि जो जेल के अंदर हैं वो जेल से बाहर आना नहीं चाहते और जो जेल के बाहर है, वो किसी भी कीमत पर जेल के अंदर जाना चाहते हैं. ऐसा है यूपी में आजकल एनकाउंटर का खौफ़.



इस बार बीजेपी न गुंडाराज-न भ्रष्टाचार के नारे के साथ उत्तर प्रदेश में 15 साल के बाद सत्ता में आई है. अपने वादे के मुताबिक अपराध पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने यूपी पुलिस को काफी छूट भी दे रखी है. जिसका नतीजा ये रहा कि पुलिस ने बदमाशों के सफाए के लिए खुलकर एक्शन लिया. एक के बाद एक एनकाउंटर की झड़ी लगा दी. इसी कड़ी में कानपुर शहर में भी चोर पुलिस की मुठभेड़ का दौर जारी है, पुलिस शहर में अपराध फैलाने वाले इन शातिरों की धरपकड़ में जुटी हुई है। लेकिन सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि क्या ताबड़तोड़ एनकाउंटर से कुछ सुधार होगा  ???

नये तरह का खौफ, एनकाउंटर वो भी हाफ ?
कानपुर में अपराधियों में खौफ भरने के लिए फुल नहीं हाफ एनकाउंटर करना अब कानपुर पुलिस की नई रणनीति बन गई है। सोमवार तड़के शहर में एक और मुठभेड़ हुई। इस बार थाना फजलगंज का नंबर था। पुलिस के मुताबिक दादानगर ढाल पर चेकिंग के दौरान काकादेव का शातिर अपराधी  भाग रहा था पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो उसने फायर झोंक दिया। काकादेव गीता नगर का रहने वाला आलोक सैनी, काकादेव थाने से इस पर दो मुक़दमे बताये जा रहे हैं। नाम  न छापने की शर्त पर एक पुलिस वाले ने बताया कि इसके खिलाफ 2 दर्जन से ज्यादा संगीन मामले दर्ज हैं। उसके खिलाफ हत्या और लूट और चोरी के प्रयास के आरोप भी हैं साथ ही गैंगेस्टर व गुंडा एक्ट भी लगा हुआ है। 

शहर में पहले भी कई एनकाउंटर हुए जिसमें अपराधी मारे गए। मामले में जांच हुई तो कई पुलिस अफसरों पर भी गाज गिरी। इस दौरान पुलिस पर कई आरोप भी लगे। इसके अलावा मानवाधिकार आयोग का डंडा अलग। जिसके बाद कुछ समय तक एनकाउंटर बंद भी हो गए। सरकार बदलने के साथ ही अपराधियों को काबू करने के लिए रणनीति में बदलाव हुआ, पुलिस अग्रेसिव हुई। इस दौरान अपराधियों की गिरफ्तारी के साथ ही मुठभेड़ की कई वारदातें हुई, जिसमें अपराधी घायल हुए। इससे अपराधियों में साफ संदेश गया और पुलिस का खौफ भी बन गया।

 कुछ प्रमुख हाफ एनकाउंटर -
15 अक्टूबर - चकेरी में पुलिस की गिरफ्त से एके- 47 छीन कर भाग रहे शातिर लुटेरे मोहसिन के पैर में मुठभेड़ के दाैरान गोली लगी.

12 नवंबर - कल्याणपुर में मकड़ीखेड़ा के पास शातिर अपराधी सुजीत कुरील उर्फ गोलू को पुलिस मुठभेड़ में दाएं पैर में लगी गोली.

14 नवंबर - कर्नलगंज में हिस्ट्रीशीटर अली अहमद को पुलिस मुठभेड़ के दौरान दाहिने पैर में गोली लगी.

14 नवंबर - सचेंडी में 10 हजार के ईनामी अपराधी विनय कश्यप को बिनौर के पास पुलिस मुठभेड़ के दौरान दाहिने पैर में लगी गोली.

15 नवंबर - चकेरी में 25हजार के ईनामी बदमाश गुल्लू आफताब ने हॉस्पिटल जे जाते समय चौकी इंचार्ज की पिस्टल छीन कर भागने के दौरान मुठभेड़ में दाहिने पैर में गोली लगी.

यूपी में एनकाउंटर की फैक्ट फाइल -
4 पुलिसकर्मी हुए शहीद, 48 अपराधियों की मौत, 3.19 लाख अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, 98526 अपराधियों ने सरेंडर किया, 319 पुलिसकर्मी घायल हुए, 409 अपराधी घायल हुए।


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