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रेल का खेल (3) - चोरी के मोबाइल की आड़ में अवैध वसूली करते हैं GRP सिपाही

कानपुर 24 नवम्‍बर 2018. जीआरपी कानपुर के कुछ सिपाहियों की अवैध कमाई करने का नया स्‍टाइल जान कर आप अचम्‍भे में पड़ जायेंगे। कानपुर सेन्‍ट्रल स्थित जीआरपी थाने में तैनात कुछ सिपाही अपनी वर्दी का नाजायज इस्‍तेमाल करके मोबाइल चोर पकड़ने की आड़ में भोले भाले युवकों को फंसा कर अवैध वसूली करने का लम्‍बा गेम खेल रहे हैं। 


सूत्रों के अनुसार जीआरपी सिपाहियों ने कुछ मोबाइल चोरों से सेटिंग कर रखी है और ये चोर पहले महंगे मोबाइल चुराते हैं फिर उनको औने पौने दामों पर स्‍थानीय युवकों को बेच देते हैं। सस्‍ते मोबाइल मिलने की लालच में स्‍थानीय युवक इनके मायाजाल में फंस जाते हैं। इसके बाद काम शुरू होता है जीआरपी सिपाहियों का। ये सिपाही चोरी के मोबाइलों को सर्विलान्‍स पर लगा कर खरीददारों की लोकेशन व नम्‍बर जान लेते हैं। फिर उनको फोन करके धमकाते हैं कि तुमको मोबाइल चोरी में जेल भेज देंगे। 

जेल जाने के डर से खरीददार युवक इन सिपाहियों को मुंह मांगे पैसे और चोरी का मोबाइल वापस देकर किसी प्रकार अपनी जान छुडाते हैं। इसके पश्‍चात चोरी का मोबाइल पुन: चोरों को दे कर बिकवाया जाता है और फिर नया बकरा तैयार हो जाता है। सूत्रों की माने तो ये ठगी का क्रम अभी भी लगातार जारी है, बीते एक हफ्ते में 14 युवक इनकी इसी योजना का शिकार हो कर लाखों रूपये गंवा चुके हैं। 

ठगी के इस मायाजाल का शिकार बने एक युवक ने हमारे संवाददाता को बताया कि उसने बीते हफ्ते एक सेकेण्‍ड हैण्‍ड मोबाइल खरीदा था। शनि‍वार की रात वर्दीधारी 2 जीआरपी के सिपाहियों ने उसके घर पर छापा मार कर उसको पकड़ लिया और मोबाइल चोरी का होने की बात कह कर धमकाने लगे। डरे हुये उक्‍त युवक के घर वालों ने किसी प्रकार 25 हजार रूपये दे कर उसकी जान छुड़ाई। युवक का आरोप है कि कुछ स्‍थानीय मोबाइल शॉप वाले भी इस गैंग का हिस्‍सा हैं और सब मिल कर भोले भाले युवकों को फंसा कर अवैध वसूली करते हैं।

इस सन्‍दर्भ में जीआरपी के ही एक सिपाही ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दो जीआरपी के सिपाही मिल कर ये खेल कर रहे हैं और उनको एक अधिकारी व चन्‍द पत्रकारों का वरदहस्‍त भी प्राप्‍त है। इसके चलते ये बेखौफ हो कर अपना ठगी का जाल फैलाये हुये हैं। सोचनीय है कि जब रक्षक ही इस प्रकार भक्षक बन जायेगा तो जनता अपनी फरियाद किसे सुनायेगी ?? 



(मोहम्‍मद नदीम एवं सूरज वर्मा की रिपोर्ट)