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बुधवार, 9 मई 2018

IPL के हर मैच में लग रहा लाखों का दांव, उजड़ रहे हैं घर, पुलिस बैठी है बेख़बर

शाहजहांपुर 09 मई 2018 (खुलासा ब्यूरो). आइपीएल मैच शुरू होते ही अल्हागंज के सटोरिये सक्रिय हो गए हैं और रोजाना लाखों रुपयों की हेरा-फेरी जारी है। क्रिकेट प्रेमियों के अलावा कुछ लोग ऐसे भी हैं जो मैच के टॉस से लेकर हर बॉल को गंभीरता से देख रहे है। कारण, हर गेंद पर दांव लगा है, कइयों की बसी-बसायी दुनिया उजड़ रही है, कई कारोबारी कंगाल हो रहे और कुछ एक झटके में मालामाल हो रहे हैं।


जानकारी के अनुसार इस खेल में मजदूर, पल्लेदार, व्यापारियों से लेकर नवयुवक तक शामिल हैं। पडोसी जिले फरुखाबाद में बैठे सट्टा बाजार के मास्टर लोकल एजेंट्स के माध्यम से अपना कारोबार नगर व क्षेत्र में फैलाए हुए हैं। ये लोग नए ग्राहक सोच समझकर बना रहे हैं और पुराने ग्राहक पहले से इनके संपर्क में हैं।

इन्हें पकडऩा मुश्किल नहीं नामुमकिन -
सूत्रों की मानें तो नगर सहित ग्रामीण क्षेत्र की एरिया में आइपीएल के हर मैच पर सट्टा लगाया जा रहा है। सटोरियों को पकडऩा किसी चुनौती से कम नहीं है। कारण है कि ये सटोरिये कोई भी बात सीधे नहीं करते हैं। इनकी बात कोड वर्ड होती हैं। कोड वर्ड को दो नाम के आधे आधे अक्षरों को जोड़कर जेनरेट किया जाता है। सट्टा लगाने के बाद आमने सामने बात नहीं होगी। बात फोन पर ही होगी और जब तक सही कोड नहीं बोला जाएगा, तब तक फोन पर बात नहीं कर सकते हैं। इसमें खास बात यह भी है कि पूरा नेटवर्क आधुनिक संचार प्रणाली लेपटॉप, मोबाइल, वाइस रिकॉर्डर तथा व्हाइटसएप आदि पर ही चल रहा है।

पहली गेंद से जीत तक चढ़ते उतरते हैं भाव -
यहां सट्टा लगाने वाले शख्स को लाइन कहा जाता है, जो एजेंट यानी पंटर के जरिए से बुकी (डिब्बे) तक बात करता है। एजेंट को एडवांस देकर अकाउंट खुलवाना पड़ता है, जिसकी एक लिमिट होती है। सट्टे के भाव को डिब्बे की आवाज बोला जाता है। सट्टेबाज 20 ओवर को लंबी पारी, दस ओवर को सेशन और छह ओवर तक सट्टा लगाने को छोटी पारी खेलना कहते हैं। मैच की पहली गेंद से लेकर टीम के जीत तक भाव चढ़ते उतरते हैं।

पुलिस व सफेदपोशों के संरक्षण में चल रहा है सट्टे का कारोबार -
प्राप्त जानकारी के अनुसार दोनों सट्टों के कारोबार के संरक्षक कुछ सफेदपोश हैं तो कुछ पुलिस के खैरख्वाह जो इस धंधे से अपना तथा पुलिस का भला कर रहे हैं। सूत्र बताते है कि शाम ढलते ही गल्ला मंडी तथा चाय की दुकानों में सट्टा के एजेंट घूमना शुरू कर देते हैं और पल्लेदार मजदूर अपनी दिन भर की कमाई सट्टे में लगा देते हैं। इसके अलावा कुछ बड़े व्यापारी भी लंबा दाव  लगाते हैं। नगदी ना होने पर  सट्टा प्रेमी  अपने मोबाइल,  सोने की चेन व अंगूठी गिरवी रखकर अपनी शौक को पूरा करते हैं। सूत्र बताते हैं जब इस मामले की पोल सोशल मीडिया पर खुली तब पुलिस विभाग ने इसको संज्ञान में लिया और क्षेत्रीय पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। पर होना क्या था,  हमेशा  की तरह पुलिस आज भी खानापूरी करके बैठी है।

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