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गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

पुलिस बनी गांधारी है और सट्टा कारोबार बेधडक जारी है

कानपुर 01 फरवरी 2018 (सूरज वर्मा). एक तरफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार अवैध कारोबार पर लगाम लगाने के लिए यूपी कोका जैसे कड़े कानून ला रही है, तो वहीं कानपुर शहर के अंदर कई स्‍थानों पर खाकी की सांठ-गांठ से सट्टे के नाम पर खुली लूट हो रही है। सूत्रों की माने तो सट्टे का अवैध कारोबार विजय नगर चौराहे पर सुलभ शौचालय के पीछे धड़ल्ले से जारी है। 


विजय नगर चौराहे पर मुन्‍ना बंगाली और संतोष पुलिस की सांठगांठ से सट्टा चलवा कर गरीब, मजदूर और रेहड़ी वालों को खुले में लूट रहे हैं और पुलिस के आला अधिकारी गांधारी बने हुए हैं। सूत्रों के अनुसार आंखों पर पट्टी बांध कर बैठी पुलिस इस खुली लूट में शामिल है। वजह साफ है कि सट्टे की महीनेदारी सिपाही से लेकर चौकी और शहर पुलिस के अधिकारियों तक बराबर पहुंचती रहती है। यही वजह है कि मजदूरों, गरीबों और रेहड़ी वालों को सट्टा संचालक अपना शिकार बना रहे हैं। 

इन दिनों जिले में सट्टा खिलवाने का एक नया हाईटेक तरीका चल रहा है, वो है ऑनलाइन सट्टा। इसके कारोबार में हर घंटे एक नया नंबर खोला जाता है। इसमें तीन तरह के गेम होते हैं, सिल्वर डायमंड और गोल्ड। डायमंड की टिकट ₹120 की दी जाती है. नंबर आने पर ₹1000 बदले में दिए जाते हैं. गोल्ड के अंदर 55 रुपए की टिकट दी जाती है। इसके बदले में नंबर आने पर ₹500 दिए जाते हैं। ऐसे ही सिल्वर की टिकट ₹12 की दी जाती है. नंबर आने पर सौ रुपए का भुगतान किया जाता है। ऐसा ही कारोबार यहां तमाम थाना क्षेत्रों में चल रहा है। 

ऑनलाइन सट्टे के कारोबारियों को कुछ तथाकथित पत्रकारों का भी संरक्षण मिला हुआ है। खबर चलाने पर जान से मारने की धमकी दी जाती है। हमारे कैमरामैन समीर खान को कवरेज करने के दौरान एक तथाकथि‍त पत्रकार ने धमकी दी कि तुम को जो खबर चलानी है चलाओ, यह सट्टा मेरी सरंक्षण में चल रहा है। तुरन्‍त यहां से चले जाओ, वरना यहीं पर पत्रकारिता का भूत उतर जाएगा। 

कुल मिला कर सट्टा संचालक खुले में लूट कर रहे हैं और पुलिस चुपचाप बैठी है। पुलिस के अधिकारी सीमा विवाद की आड़ में इस पूरे मामले पर कुछ भी बोलने को राजी नहीं है। जबकि मात्र 4 दिन पहले एडीजी कानपुर जोन ने चौकी प्रभारियों की बैठक करके कहा था कि यदि उनके इलाके के अंदर इस तरीके का कोई अवैध कारोबार चल रहा है तो जानकारी करके उस पर अंकुश लगाया जाये। बावजूद इसके यहां अवैध कारोबारियों के ऊपर कोई फर्क पड़ता नहीं प्रतीत होता है।


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