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गुरुवार, 8 फ़रवरी 2018

मदिरा प्रेमियों को रमन सरकार का तोहफा, इस वर्ष भी नहीं होगी शराबबंदी

रायपुर 08 फरवरी 2018 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ में नई आबकारी नीति बनाकर शराबबंदी करने का प्‍लान  खटाई में पड़ गया है। फिलहाल प्रदेश में इस साल भी शराबबंदी नहीं होगी, इसका मतलब ये हुआ कि नए वित्तीय वर्ष में भी कॉर्पोरेशन ही शराब बेचेगा। यानि ठेके पर भी नहीं दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और आबकारी मंत्री अमर अग्रवाल के बयान से तो यही स्पष्ट हो रहा है।

समिति हो गई है सीमित -
नई आबकारी नीति के लिए छग सरकार ने 11 सदस्यीय अध्ययन दल का गठन किया था। जिनको जनवरी 2018 तक में 06 राज्यों का दौरा पूरा कर फरवरी में सरकार को आबकारी नीति पर सुझाव रिपोर्ट देना है। मगर समिति खुद सीमित यानि शिथिल पड़ चुकी है, 08 फरवरी बीत चुकी है और समिति सभी राज्यों का दौरा पूरा नहीं कर पाई है। वहीं लोकसभा और विधानसभा सत्र के कारण यह भी तय है कि इस महीने अध्ययन दल दौरे पर नहीं जा पाएगा, क्योंकि 11 सदस्यीय अध्ययन दल में सांसद और विधायक भी शामिल हैं।

इस साल भी सरकार ही बेचेगी शराब - 
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2016-17 में शराब दुकानों का ठेका खत्म करके छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन बनाया। कॉर्पोरेशन के माध्यम से शराब दुकानें चल रही हैं, हालांकि कर्मचारी प्लेसमेंट एजेंसी के हैं।

अध्ययन समिति का गठन व दिशा निर्देश - 
मगर राज्य सरकार की इस कार्पोरेशन एवं प्लेसमेंट नीति का काफी अधिक विरोध हुआ तो सरकार ने नई आबकारी नीति के लिए अध्ययन दल बनाया। यह तय हुआ था कि दल ऐसे अलग-अलग राज्यों का दौरा करेगा, जहां कॉर्पोरेशन के माध्यम से सरकार शराब दुकान चलाती है, जहां शराबबंदी है और आदिवासी बहुल राज्य। आठ महीने में दल ने ज्यादातर ऐसे राज्यों का ही दौरा किया है, जहां कॉर्पोरेशन के माध्यम से शराब दुकान संचालित हो रही है इसमें त्रिवेंद्रम (केरल), चेन्नई व कन्याकुमारी (चेन्नई), केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली व पांडिचेरी शामिल है। शराबबंदी वाला केवल एक राज्य गुजरात है वहीं शराबबंदी वाले एक और राज्य बिहार व आदिवासी बहुल झारखंड का दौरा नहीं हो पाया है।

* अभी विधानसभा सत्र चल रहा है। फिलहाल दल का बाहर जाना संभव नहीं है। अध्ययन दल में सांसद व विधानसभा प्रतिनिधि शामिल हैं। दौरे में समिति के सभी सदस्यों का रहना अनिवार्य है अन्यथा रिपोर्ट या सुझाव मान्य नहीं होता है। अब सत्र खत्म होने के बाद समिति के सदस्यों से चर्चा की जाएगी। - डी.डी. सिंह, आयुक्त, आबकारी विभाग 

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