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शनिवार, 3 फ़रवरी 2018

विकास से अछूता है शाहजहांपुर का गांव ज्ञानपुर मंगोला

शाहजहांपुर 03 फ़रवरी 2018 (अम्बुज शुक्ला/प्रिंस सक्सेना). क्षेत्र के गांव ज्ञानपुर मंगोला के मजरा आवन की मढैया आजादी के इतने वर्षों बाद भी गुलामी से मुक्ति नहीं मिल पा रही है। आजादी के इतने वर्ष गुजर चुके हैं लेकिन गांव में आज भी न ही विद्यालय है न ही सड़क है न ही बिजली है न ही स्वास्थ्य उपकेंद्र है, और न ही पंचायत घर है। 
 

यहाँ के लोगों को आज भी सरकार के द्वारा कोई सरकारी सुविधा नहीं मिलती है। सरकारी सिस्टम में चाहे प्रधान , बीडीओ, जिला पंचायत विभाग, बिजली विभाग, शिक्षा विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग किसी भी विभाग को इस गांव से कोई सरोकार नहीं। गांव में कोई बीमार पढ़ जाये तो यहाँ एंबुलेंस 102 और 108 की कोई सुविधा नहीं मिल पाती है। गांव में झगड़ा हो जाने पर पुलिस सहायता भी बहुत देरी से मिलती है। 

कहने को गांव में आने के लिये तीन सड़कें हैं लेकिन तीनों की स्थिति बद से बत्तर है। इन्हीं असुविधाओं के कारण गांव से लगभग 20 परिवार यहां से पलायन कर चुके हैं लेकिन ग्राम प्रधान अमरपाल सिंह आज भी इस और कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। इस कारण गांव का विकास नही हो पा रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि तहसील दिवस पर कई बार सड़क और विद्यालय के लिए प्रार्थना पत्र दिया लेकिन प्रशासन की नींद नही टूटती है।

गांव में आज भी विद्यालय न होने के कारण अधिकांश बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। कुछ अभिभावक अपने बच्चों को बरेली-फर्रुखाबाद हाईवे पर पड़ने वाले ग्राम कोयला में बने प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने के लिये भेजते हैं लेकिन वह गांव से डेढ़ किलोमीटर दूर है। सड़क न होने के कारण अधिकांश बच्चों का नाम तो स्कूल में चल रहा है लेकिन उपस्थित न के बराबर। प्राथमिक विद्यालय कोयला में पढ़ने वाले छात्र कुलदीप ने बताया कि गांव से स्कूल डेढ़ किलोमीटर दूर है सड़क न होने के कारण स्कूल पैदल जाना पढ़ता है। जिस कारण ज्यादा छुट्टी हो जाती है और बरसात के दिनों में दो महिने स्कूल नहीं जा पाते हैं। और बिजली नहीं होने से रात में पढ़ाई भी नहीं कर पाते हैं।

किसान रामेश्वर सिंह ने बताया कि सड़क और बिजली न होने के कारण खेती में बहुत घाटा होता है। फसल को समय से बाजार नही पहुचा पाते हैं। और बिजली न होने के डीजल से फसल की सिंचाई करनी पड़ती है जिस कारण खेती घाटे का सौदा होती जा रही है। ग्रहणी रामवती ने बताया कि चौमास के दिनों अगर कोई व्यक्ति बीमार हो जाये तो उसे  ईलाज नहीं मिल सकता है। गांव के कई लोगों की मौत इस कारण हुई है। और यहां आज भी महिलायें मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाती हैं। उन्होंने बताया कि गांव के नाम के अनुरूप गांव में आज भी मढैंया और छप्पर ही हैं। इस समस्या के चलते यह साफ जाहिर होता है कि गांव के सदस्य,प्रधान,जिला पंचायत सदस्य,विधायक,सांसद सिर्फ़ वोटो तक ही मतलब रखते है। इसके बाद यह लोग गांव की तरफ़ देखते भी  नहीं।

- ग्राम प्रधान अमरपाल सिंह ने बताया कि रोड़ से आवन की मढैंया तक जाने के लिये मिट्टी डालने का काम शुरू कराया था लेकिन कुछ लोगों ने आपत्ति जताई जिस कारण बीच में ही काम रोकना पड़ा. 

- एसडीएम जलालाबाद ने बताया कि गांव का सर्वे करा कर रिपोर्ट शासन को भेजी जायेगी और जल्द ही सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा.

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