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शुक्रवार, 17 नवंबर 2017

नक्सलियों ने पर्चे फेंक कर चेताया, वनमंत्री व पत्रकारों को दी जान से मारने की धमकी

छत्तीसगढ़ 17 नवंबर 2017 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ में बीजापुर नक्सल प्रभावित क्षेत्र है। बीजापुर जिले के उसूर तहसील कार्यालय में नक्सलियों के फेंके पर्चे मिले हैं। इन पर्चों में राज्य के वनमंत्री महेश गागड़ा सहित पत्रकारों, तहसीलदार और पटवारी को जान से मारने की धमकी दी गई है।


इन पर्चों में उसूर तहसीलदार और पामेड़ पटवारी पर पुलिस से सांठगांठ का आरोप लगाया गया है, तो वहीं नक्सलियों व मुठभेड़ से संबंधित मामलों की गलत रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को भी जान से मारने की बात कही गई है। हालांकि ये भी संभावना जताई जा रही है कि इन क्षेत्रों में कार्यरत पत्रकारों को रिपोर्टिंग नहीं करने देने वाले भी इस तरह की हरकत कर सकते हैं ताकि पत्रकार भयभीत होकर पीछे हट जाएं तथा इन क्षेत्रों से संबंधित समाचार आगे नहीं पहुंच सके। 

पुलिस मामले की जांच में जुटी - 
इस मामले में आवापल्ली थाने के एसआई किशोर का कहना है कि ये पर्चे नक्सली कमांडर हिड़मा के नाम से जारी किए गए हैं। आवापल्ली पुलिस जांच में जुट गई है। प्रथम दृष्टया मामले में शरारती तत्वों का हाथ लग रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है।

वनमंत्री को जान से मारने की धमकी - 
छत्तीसगढ़ के बीजापुर क्षेत्र में उसुर तहसील कार्यालय में नक्सलियों ने पर्चे फेंककर वनमंत्री गागड़ा को जान से मारने की धमकी दिए जाने की खबर सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हो गया है। वहीं इन पर्चों में उसूर तहसीलदार और पामेड़ पटवारी पर पुलिस से सांठगांठ की भी बात लिखी गई है।

नक्सलियों के निशाने पर अब पत्रकार भी - 
नक्सली मुठभेड़ की गलत रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को इस पर्चे के माध्यम से जान से मारने की धमकी दी गई है। बताया जा रहा है कि यह पर्चा 13 नवंबर की सुबह तहसील कार्यालय में फेंका गया है। पर्चा हार्डकोर नक्सली कमांडर हिड़मा के नाम से जारी किया गया है। पर्चों तथा बैनर में पत्रकारों को हिदायद दी गई है कि मुठभेड़ की रिपोर्टिंग को गलत तरीके से समाचार चैनल या अखबारों में प्रकाशित करने पर उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। पर्चों में बीजापुर के पत्रकार स्व. साईं रेड्डी की हत्या का जिक्र करते हुए अन्य पत्रकारों के साथ भी वैसा ही सलूक करने की धमकी दी गई है। 

पूर्व में हो चुकी है पत्रकारों की हत्या - 
ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में नक्सलियों ने एक अखबार के पत्रकार साई रेड्डी की साल 2013 में बीच बाजार में निर्मम हत्या कर दी। इसके अलावा नक्सालियों द्वारा साल 2013 में ही तोंगपाल के पत्रकार नेमीचंद जैन की भी हत्या की गई थी। इसके बाद एक बार फिर नक्सलियों ने पत्रकार की हत्या की चेतावनी दी हेै जिसके चलते पुलिस इस मामले को हलके में ना लेते हुए गंभीरता से जांच में जुट गई है। चूंकि पत्रकार स्वतंत्र होता है एवं सभी की बातों को सामने रखता है एवं जनहित में काम करता है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पत्रकारिता करना पहले से ही काफी कठिन व जोखिम भरा काम है। ऐसे में कई बड़े सवाल उठ रहे कि नक्सलियों ने पत्रकारों को टार्गेट पर क्यों लिया? आखिर ऐसा कौन सा कारण है या हो सकता है? 

* पर्चे फेंके जाने के मामले को संज्ञान में लिया गया है। मंत्री जी को विशेष तौर पर सुरक्षा दी जाएगी, पत्रकार और प्रशासन के लोगों की सब की सुरक्षा में सतर्कता बरतेंगे। क्षेत्र संवेदनशील है, सभी थाना प्रभारियों को सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। -  एम. आर अहिरे, पुलिस अधीक्षक बीजापुर 



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