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मंगलवार, 14 नवंबर 2017

विश्व के मुख्य न्यायाधीशों के 18 वें अर्न्‍तराष्‍ट्रीय सम्मेलन का घोषणा पत्र जारी


लखनऊ 14 नवम्‍बर 2017 (ए.एस खान). सिटी मान्टेसरी स्कूल के तत्वावधान में आयोजित विश्व के मुख्य न्यायधीशों के 18 वें वैश्‍विक सम्मेलन में पधारे 6 देशों के प्रधानमंत्रीयों, पूर्व एवं वर्तमान राष्ट्रपतियों/राष्ट्राध्यक्षों, सहित 56 देशों से पधारे मुख्य न्यायधीशों एवं कानूनविदों ने "लखनऊ घोषणा पत्र" के माध्यम से विश्व के सभी देशों का आह्वाहन किया है कि भावी पीढी के हित में नई विश्व व्यवस्था बनाने हेतु एकजुट हों।



सी.एम.एस, कानपुर रोड आडिटोरियम में चार दिन तक चले इस महासम्मेलन के अन्तर्गत विश्व की प्रख्यात हस्तियों, न्यायविदों, एव कानूनविदों ने गहन चिंतन, मनन एवं मंथन के उपरान्त आज सर्वसम्मति से "लखनऊ घोषणा पत्र" जारी किया। इस घोषणा पत्र के माध्यम से न्यायविदों/कानूनविदों ने "प्रभावशाली विश्व व्यवस्था" की जोरदार वकालत की। जिसमें "विश्व सरकार" "विश्व संसद" "विश्व मुद्रा" एवं "विश्व न्यायालय" शामिल हो।

लखनऊ घोषणा पत्र जारी करने के अवसर पर "होटल क्लार्क अवध" में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश दुनिया से पधारे इन कानूनविदों ने विस्तार से अपने विचार रखते हुए कहा कि भावी पीढी के सुरक्षित भविष्य हेतु एक "नवीन विश्व व्यवस्था" के गठन तक हमारा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। इस घोषणा में विश्व के 56 देशों से पधारे न्यायविदों व कानूनविदों ने चार दिनों तक चले विचार-मंथन के निष्कर्ष को प्रस्तुत करते हुए विश्व एकता एवं शांति लाने के लिए शीघ्र ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे विश्वव्यापी समस्याओं जैसे आतंकवाद, व्यापक संहार करने वाले हथियारों का संपूर्ण जखीरा नष्ट करना, ग्लोबल वार्मिंग तथा मौसम परिवर्तन आदी पर काबू पाना शामिल है। ताकि‍ विश्व के ढाई अरब बच्चे एवं भावी पीढियां शांति एवं सुरक्षा के साथ रह सकें।

लखनऊ घोषणा पत्र में व्यक्तियों के आत्म सम्मान को बढावा दिये जाने, मौलिक मानवीय अधिकारों एवं स्वतंत्रता को व्यापक बनाने, सभी धर्मों का आदर करने, एवं विधालयो में शांति एवं एकता की शिक्षा देने के लिए भी कहा गया। प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से बातचीत करते हुए विभिन्न देशों के न्यायविदो नें एक स्वर में कहा कि सिटी मान्टेसरी स्कूल लखनऊ द्वारा आयोजित यह मुख्य न्यायाधीश सम्मेलन एक इतिहासिक सम्मेलन है, जिससे आगे की पीढियां अवश्य लाभान्वित होंगी।

पत्रकारों से बातचीत करते हुए न्यायविदों ने संकल्प लिया कि वे अपने देश जाकर अपनी सरकार के सहयोग से इस मुहिम को आगे बढायेंगे जिससे विश्व के सभी नागरिकों को एक विश्व सरकार, एक विश्व संसद, तथा एक विश्व मुद्रा, की सौगात मिल सके तथा प्रभावशाली विश्व व्यवस्था लागू हो सके।


लखनऊ घोषणा पत्र 2017 -

1. जबकी वर्तमान वैश्विक परिदृश्य निराशा जनक है एव कोई एक जानबूझकर या असावधानी पूर्वक लिया गया कदम दुनिया को अराजकता एव परमाणु युद्ध में झोंक सकता है जिससे व्यापक पैमाने पर विध्वंस एवं विनाश होगा।

2. जब कि‍ विश्व में असीम अन्याय तथा गरीबी, असमानता, भूख, अशिक्षा,  बीमारी, तथा अन्य कई अनसुलझी समस्याएं हैं और न्याय के बिना शांति नही हो सकती, प्रभावशाली वैश्विक कानून के बिना न्याय नहीं हो सकता और प्रजातांत्रिक विश्व सरकार के बिना कोई कानून प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सकता।

3. जब कि‍ आतंकवाद कम नहीं हो रहा है तथा कुछ देशों में भीषण युद्ध हो रहा है जिससे काफी क्षती पहुंच रही है तथा लोगों को शरीरिक एव मानसिक कष्ट हो रहा है, विशेषकर बच्चों तथा महिलाओं को, तथा काफी संख्या में लोग बेघर हो रहे हैं तथा युद्ध क्षेत्र से भागकर दूसरे देशों में शरण ले रहे हैं। यह तब हो रहा है जबकी संयुक्त राष्ट्र संघ ने शांति, सुरक्षा, न्याय, मानवाधिकार, सामाजिक उत्थान, और विकास के लिए अपनी शाखाओं तथा विभिन्न संस्थाओं के माध्यम से कई समस्याओं को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं। परंतु यह संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में वर्णित प्राथमिक जिम्मेदारीयो को पूरा करने में नई चुनौतियों एवं जिम्मेदारीयों को पूरा करने में सफल नही हो पाया है।

4. जब कि‍ मानवता का आस्तित्व ही खतरे में पड रहा है, यह अपरिहार्य हो गया है कि संयुक्त राष्ट्र को पूर्णत प्रजातांत्रिक प्रतिनिधित्व तथा प्रभावशाली संसथा बनाने के लिए ठोस कदम उठाया जाये।

क्योंकि हम 57 देशों के मुख्य न्यायाधीश जो की सिटी मान्टेसरी स्कूल लखनऊ,  भारत के 10-से-13-नवम्बर 2017- तक भारतीय संविधान की धारा 51/ पर आधारित विश्व के मुख्य न्यायधीशों के 18 वें सम्मेलन में भाग ले रहे हैं, पूर्व के सम्मेलनों में पारित घोषणा पत्र का पूर्णत अनुमोदन करते हैं। तथा प्रतिज्ञा करते हैं कि -

1. विश्व के सभी देशों के प्रमुखों तथा सरकारों से दृढ अपील करेंगे कि -

(अ) सभी राज्यों सरकारों की एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जाये जिसमे ऐसे कदम उठाए की एक वैश्विक सरकार का प्रभावशाली ढांचा तैयार हो सके जिसके अंतर्गत विश्व कानून बनाने के लिए विश्व संसद का गठन हो जिसके द्वारा विश्व सरकार तथा विश्व न्यायालय की स्थापना की जा सके।

(ब) 2015 में पैरिस में हुई "कांफ्रेस आफ पार्टीज" के समझौते की  समझौते एव सफलता के लिए उठाए जाने वाले कदमों पर अती शीघ्र ध्यान दिया जाये जिससे कि ग्लोबल वार्मिंग  व जलवायु परिवर्तन की गती को कम किया जा सके।

(स) संयुक्त राष्ट्र चार्टर के आर्टिकल 108 तथा 109 पर पुनर्विचार का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र में उठाया जाये।

(द) उन संस्थाओं व देशों के विरुद्ध प्रभावशाली कदम उठाए जाये जो आतंकवाद को बढावा देते हैं या आतंकवादियों की सहायता करते हैं। या उन्‍हें सरंक्षण प्रदान करते हैं। उन देशों अथवा संस्थाओं को अलग थलग करके उनका बहिष्कार करे जो आतंकवादियों को वित्तीय अथवा भौतिक सहायता प्रदान करते हैं।

2. संयुक्त राष्ट्र संघ से अपील की जाये कि -

(अ) महासंहार के हथियारों (डब्ल्यू एम डी) को समाप्त करने के लिए ईमानदारी से प्रयास किए जाऐं।

(ब) किसी भी तरह के आतंकवाद, अतिवाद, तथा युद्धों को रोकने हेतु प्रयास किए जाऐं।

(स) संयुक्त राष्ट्र संघ के चार्टर पर पुनर्विचार हो जिसमें सुरक्षा परिषद में सुधार शामिल हों।

3. विश्व न्यायिक न्यायालय के सदस्यों से अपील की जाये की -

(अ) बचपन से ही सभी स्कूलों के छात्रों को शांति शिक्षा एवं सांस्कृतिक सूझबूझ के लिए विभिन्न सरकारों को निर्देशित किया जाये।

(ब) सभी व्यक्तियों के आत्मसम्मान को बढावा दिया जाये जो की उनके मूल मानवीय अधिकारों और स्वतंत्रता का आधार है।

(स) इस घोषणा पत्र के अन्तर्गत अवसर के अनुसार राष्ट्रीय सरकारों को ठोस कदम उठाने के लिए प्रेरित किया जाये।

4. यह घोषणा पत्र राष्ट्राध्यक्षों सरकारों के प्रमुख व सभी देशों के मुख्य न्यायधीशों को तथा संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव को भेजे जाने की प्रतिज्ञा ली जाये।

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