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बुधवार, 27 सितंबर 2017

जनता जाम से जूझ रही है, पुलिस को वसूली सूझ रही है



कानपुर 27 सितम्‍बर 2017 (सूरज वर्मा). शहर पुलिस अपराधों को काबू कर पाए या न कर पाए लेकिन कोर्ट के आदेश, उच्चाधिकारियों के फरमान और जनप्रतिनिधियों की मांग को दरकिनार करते हुए वाहन चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों का उत्पीडऩ जरूर कर रही है। ताजा मामला बडे चौराहे का है जहां बाइक सवार युवक की बाइक में सिपाही ने लात मार दी जिससे बाइक तो गिरी ही सिपाही महोदय भी चौराहे पर ही धराशाही हो गये। मौके पर मौजूद हमारे छायाकार ने तत्‍काल कैमरा चमकाया और इस पल को कैमरे में कैद कर लिया।


अजीब बात है कि पुलिस वालों को भारी प्रदूषण फैला रहे टैंपो, ओवर लोड नगर बस, लोडर व ट्रक या सडकों पर लगा जाम नहीं दिखता है, बस आम वाहन चालक ही समाज के दुश्‍मन दिखते हैं। शहर भर में जगह जगह वाहनों के कागजों की जाँच के ठिये बने हैं और वाहन चेकिंग के नाम पर उगाही जारी है।
 
इस काम में पुलिस के सिपाही व होमगार्ड अपनी जेबें गरम कर रहे हैं। कानपुर में मरे कम्पनी पुल के नीचे, सी.ओ.डी. क्रासिंग, लालबंगला, लखनऊ हाइवे, फजलगंज, रावतपुर, चुन्नीगंज, विजयनगर, जूही, बड़ा चौराहा आदि जगहों पर अक्सर चेकिंग के नाम पर वाहन चालकों से अभद्रता की जाती है। सड़कों पर पहले जैसे लगता था आज भी वैसे ही जाम लगता है, आज भी जनता जाम से जूझ रही है। इसकी असली वजह है ट्रैफिक पुलिस का ट्रैफिक कंट्रोल करने पर ध्यान ना होकर सिर्फ गाड़ियों के पेपर चेक करने पर ही ध्यान लगाना है। इसका जीता जागता सुबूत किसी भी चौराहे पर आसानी से देखने को मिल जाएगा जहां सुबह से लेकर शाम तक पुलिस वाले केवल गाड़ियों को रोक रोक कर उनके पेपर ही चेक करने में लगे रहते हैं।

विशेष तौर पर उनके निशाने पर वह गाड़ियां रहती हैं जो दूसरे जिलों की होती हैं क्‍योंकि इसमें कमाई की सम्‍भावना ज्‍यादा होती है। शहर के कई चौराहों के ऊपर आए दिन जाम लगता है, जिसकी असली वजह चौराहे के ऊपर लगने वाली पान की गुमटियां व चाट के ठेले है। आधी रोड तो यही लोग घेर लेते है और उनके आगे  टैम्‍पो वाले अपनी सवारियां भरने के चक्कर में बीच रोड पर अपनी टैम्‍पो खड़ी कर देते हैं, जिससे की चौराहे पर जाम लगता है। चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी इस ओर ध्यान ना देकर सिर्फ और सिर्फ सुबह से लेकर शाम तक गाड़ियों के पेपर चेक करने में ही लगे रहते हैं। जनता जाम की समस्या से जूझ रही है पुलिसकर्मी गाडियों के पेपर चेक करने और जेबें भरने में मस्त हैं।
 
विशेष उल्‍लेखनीय है कि पूरे सूबे में पुलिस की गाडियों का बीमा नहीं है और ये अनियमित्‍ता डीजीपी से लेकर सिपाही तक किसी को दिखाई नहीं देती। बस गरीब जनता को लूटने के लिये जगह जगह लुटाई केन्‍द्र खोले हुये हैं।

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