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सोमवार, 11 सितंबर 2017

सरिया हुई शरीर के आर-पार, केजीएमयू के डाक्टर बने खेवनहार


लखनऊ 11 सितंबर 2017. केजीएमयू के डाक्टरों ने एक जटिल केस में सफल ऑपरेशन कर शरीर में घुसी 2 फिट लंबी राड निकाल कर दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को जीवनदान दिया है। सर्जरी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट  डॉक्टर संदीप तिवारी की टीम ने कमाल कर दिया। डा. तिवारी ने बताया कि समय रहते यदि प्रॉपर ट्रीटमेंट मिल जाए तो किसी की भी जान बचाना संभव है ।


ताजा उदाहरण किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में सर्जरी विभाग के हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉक्टर संदीप तिवारी की टीम का है जिन्होंने दुर्घटनाग्रस्त एक व्यक्ति के शरीर से लगभग 2 फीट लंबी राड निकालकर जीवन दान दिया है। विदित हो की गत 27 अगस्त को Alto कार में सवार तीन युवक दुर्घटनाग्रस्त हो गए थे। रॉन्ग साइड से आ रही डीसीएम Toyota में लोहे की रॉड भरी हुई थी। आमने-सामने की टक्कर में कार में सवार ड्राइवर और पीछे बैठे युवक के शरीर में लोहे की रॉड बुरी तरह घुस गई जबकि बाईं ओर आगे सीट पर बैठे एक युवक की जान बच गई। ड्राइवर की वहीं मौत हो गई थी ।

कार में पीछे बैठे युवक समीर  मिश्रा के शरीर में राड घुस गई थी लेकिन उसकी सांसे चल रही थीं। 40 मिनट बाद उसे केजीएमयू के ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां पर सर्जरी विभाग के हेड डॉक्टर संदीप तिवारी ने डॉक्टर अनीता सिंह, डॉक्टर अजय पांडे व डॉक्टर अनुराग ने बड़ी मशक्कत के बाद लगभग 3 घंटे के लंबे ऑपरेशन के बाद दुर्घटनाग्रस्त युवक की जान बचा ली। इस संबंध में आज ट्रामा सेंटर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया जहां पर दुर्घटना के शिकार समीर मिश्रा ने अपने साथ हुए हादसे के बारे में बताया । डॉक्टरों की टीम ने ऑपरेशन के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को मीडिया से शेयर किया। ऐसे मामलों में सबसे बड़ी समस्या बेहोशी को लेकर होती है, बावजूद इसके डॉक्टर टीम ने फेफड़ों में इंजरी, सांस लेने में दिक्कत, बेतहाशा खून बहना, इन सब को ध्यान में रखते हुए दुर्घटनाग्रस्त युवक का सीना चाक कर सभी रक्त नसों को  सुरक्षित व रिपेयर करते हुए लोहे की रॉड निकाल कर समीर मिश्रा को नई जिंदगी दे दी ।

सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसी दुर्घटनाएं क्यों होती हैं या फिर इन दुर्घटनाओं में क्या सभी की जिंदगी बचाई जा सकती है । भारतवर्ष में पिछले वर्ष लगभग डेढ़ लाख मौतें दुर्घटना के कारण हुई हैं, जो सभी बीमारियों के मुकाबले सब से ज्यादा है आज भी हम यातायात के नियमों की अनदेखी करते हैं खुलेआम लोहे से भरी सरिया आदि खतरनाक सामान से भरे वाहन सड़कों पर देखे जा सकते हैं जबकि इन्हें लाने ले जाने के लिए यातायात के स्पष्ट दिशा-निर्देश होते हैं यदि इन पर लगाम न लगाई गई तो दुर्घटनाएं तो होती रहेंगी ।और जरुरी नहीं कि सभी को समीर मिश्रा की तरह शीघ्र ट्रीटमेंट मिल जाए तथा समय पर सर्जरी के बावजूद उसे  जीवनदान मिल जाए ।

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