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शुक्रवार, 4 अगस्त 2017

दबंगों की गिरफ्तारी से कतराती है कानपुर पुलिस

कानपुर 04 अगस्त 2017. कानपुर पुलिस ने दबंगों के सौ खून माफ कर दिये हैं, तभी तो दबंगों के खिलाफ अवैध वसूली, जमीनों पर अवैध कब्जे, महिलाओं से छेड़ छाड़, निर्दोषों पर जानलेवा हमला करने जैसे गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बाद भी पुलिस इनकी गिरफ्तारी नहीं करती है। जब कि यही पुलिस एक आम आदमी को गाली देने व जान से मारने कि धमकी देने जैसी मामूली धाराओं में गिरफ्तार कर लेती है।

आइये आपको कुछ ऐसी ही घटनाओं से रूबरू करते हैं। कल्याणपुर के मसवानपुर में मकान का कोर्ट से स्टे होने के बाद भी एक दर्जन से अधिक दबंग मकान को कब्जा करने पहुँच गये थे। कब्जे का विरोध करने पर महिला को जम कर पीटा गया। उसके कपड़े फाड़ कर उसका शील भंग किया गया।इस मामले में पुलिस ने  आदित्य, मुलायम, गोपाल, कौशल समेत कई अन्य लोगों के खिलाफ घर में घुस कर मार पीट करना, छेड़ - छाड़, बलवा जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इस मामले में अभी तक किसी की गिरफ्तारी नही हुई।

दूसरा मामला कचहरी परिसर का है जहाँ वारंट रीकाल कराने आये युवक को कुछ लोगों ने कोर्ट से खींच कर जीने से घसीटते हुये नीचे ले जा कर अधमरा होने तक पीटा। पुलिस आई और घायल युवक को उर्सला अस्पताल में भर्ती कराया। इस मामले में एसएसपी सोनिया सिंह के आदेश पर आरोपी रामजी समेत अन्य पर जानलेवा हमले जैसी धारा में मुकदमा दर्ज किया गया। लेकिन एसएसपी मैडम आरोपियों की गिरफ्तारी कराना ही भूल गई। 

तीसरा मामला कचहरी परिसर का है जहाँ पर आदर्श नगर रावतपुर निवासी अधिवक्ता गिरीश चंद्र श्रीवास्तव एडवोकेट (उम्र 62 वर्ष) के कानपुर कचेहरी स्थित चेम्बर में दबंग दिलीप कुमार सविता एडवोकेट ने साथियों के साथ मिल कर कब्जा कर लिया था। मामला कानपुर बार एसोसिएशन गया तो बार के पदाधिकारियों ने चेम्बर को पार्टीशन करने का निर्णय पारित किया और दि.16/7/17 दिन रविवार को बार कार्यकारिणी ने मौके पर जा कर निर्णय का क्रियान्वयन करा दिया। निर्णय की प्रति विपक्षी दिलीप के विभक्त भाग में चस्पा कर दिया। जिसके बाद अगले दिन दि. 17/7/17 की शाम करीब 3 बजे श्री श्रीवास्तव के चेम्‍बर में घुस कर डंडे व लोहे की राड से लैस होकर उक्त दिलीप कुमार सविता आपने साथी अविनाश मिश्रा, अनूप गौतम, कौशल उपाध्याय, जितेन्द्र कुशवाहा व 10 - 15 अन्य अज्ञात लोगों के साथ मिल कर जान से मारने की नियत से हमला कर दिया। लोहे की राड से सिर पर प्रहार किया। उक्त लोगों ने श्रीवास्तव को इतना मारा की वह अचेत हो गये और उन्हें गम्भीर हालत में कानपुर के जिला अस्पताल उर्सला भर्ती किया गया, आज तक उनका इलाज जारी है।

घटना के बाद में उन लोगों ने बार एसोसिएशन के आदेश को गाली देते हुये पार्टीशन को तोड पूरे चेम्बर में फिर से कब्जा कर लिया। इस मामले में कोतवाली पुलिस ने 147, 149, 308, 452, 504, 506  IPC की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है, लेकिन गिरफ्तारी नहीं की जिससे आरोपियों का मनोबल बढ़ा। इस मामले में आई.जी.आर.एस पर शिकायत के बाद भी पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी न कर किसी अप्रिय घटना का इंतजार कर रही है। अब सवाल ये है कि मुकदमा दर्ज करने के बावजूद भी पुलिस इनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं करती है ? क्या पुलिस इनसे डरती है ? अगर डरती है तो क्यों, अगर नहीं तो गिरफ्तारी क्यों नही ? फिलहाल इसका जवाब तो पुलिस के पास है।

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