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बुधवार, 30 अगस्त 2017

एसकेएस प्लांट की दबंगई और प्रशासन के सहयोग से बलात गरीब किसान की भूमि पर किया कब्जा

रायपुर 30 अगस्त 2017 (रवि अग्रवाल). किसान के खेत में लगे सागौन, नीलगिरी के लगभग 350 पेड़ पौधे, जो 2 से 3 फीट लम्बे हो चुके थे, को जबरन खेत में घुसकर जेसीबी से उखाड़ दिया गया। प्लांट ने गुंडागर्दी कर उक्त खसरा नंबर की भूमि को स्वंय का बताते हुए किसान को धमकाया। यह तो खुलेआम शासन प्रशासन को चुनौती देने जैसा है।  एसकेएस पावर प्लांट ने किस आधार पर अपना बेजा कब्जा किए हुए है और शिकायत के बावजूद भी प्रशासन उदासीन क्यों है ये समझ से परे है।

गौर करें तो यह स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है कि रायगढ़ एवं छग के अधिकांश क्षेत्रों में गरीब होना, किसान होना तो गुनाह जैसा है ही और ऊपर से आदिवासी होना, किसी भयावह अभिशाप से कम नहीं। भाजपा सरकार एक तरफ आदिवासियों का हितैषी होने का दंभ भरती है तो दूसरी तरफ आदिवासियों के साथ हो रहे अन्याय और जुल्म पर आंखें फेर लेती है। विगत तीन सालों में हजारों मामले मुख्यमंत्री के जनदर्शन में आए मगर उनमें से पचास मामलों का भी निराकरण नहीं हुआ है। इस प्रमाण या उदाहरण से प्रदेश के मूल निवासी आदिवासी और सतनामी समाज को ये बाखूबी समझ लेना चाहिए कि राज्य की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री उनके कितने हितैषी हैं और आगे उनके साथ क्या क्या होने वाला है। 


क्या है मामला - 
शिवचरण दास पिता चमारदास सा. गिंडोला की भूमि ग्राम झिटीपाली, खसरा नंबर-52/2 , रकबा 0.607 हेक्टेयर, जो कि तहसील खरसिया, जिला रायगढ़ में आता है। किसान विगत कई वर्ष से अपनी भूमि पर खेतीबाड़ी कर जीविकोपार्जन कर रहा। वहीं छग शासन के वन विभाग द्वारा प्रदत्त 350 सागौन नीलगिरी आदि पेड़ पौधे उक्त भूमि पर लगा रखे थे। 

बलात कब्जा एवं हरे पेड़ पौधों को उखाड़ा - 
परंतु एसकेएस पावर प्लांट के एक गुर्गे प्रेम जायसवाल ने धमकाते हुए पीड़ित किसान के सामने ही उक्त स्थल पर लगे लगभग सभी हरे भरे पेड़ पौधों को जेसीबी मशीन से उखाड़ फेंका तथा खेत हिस्से में जो पौधे बचे थे, उसे भी जेसीबी से रौंद दिया तथा साथ ही लाए पौधों को रोपण भी कर दिया। 

लिखित शिकायत के बाद भी सुनवाई नहीं - 
पीड़ित ने इस घटना की लिखित शिकायत भूपदेवपुर थाना सहित जिला प्रशासन, स्थानीय प्रशासन खरसिया, कलेक्टर रायगढ़ एवं वनमण्डल अधिकारी को भी की है। परंतु अभी तक कहीं से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। आज दिनांक तक स्थानीय एवं जिला प्रशासन द्वारा उक्त मामले को लेकर एसकेएस पावर प्लांट से पूछताछ तक नहीं की गई है। 

आर्थिक एवं मानसिक रूप से परेशान - 
मानसिक आर्थिक व शारीरिक पीड़ा से ग्रस्त किसान अपनी स्वंय की भूमि पर अपना अधिकार पाने के लिए सरकारी अधिकारियों एवं कार्यालयों का चक्कर काट रहा है, शासन प्रशासन पीड़ित किसान की व्यथा सुनने को तैयार नहीं है। अब आखिरकार पीड़ित गरीब किसान न्याय की आस में कहां और किसके पास जाए। 

धनाढ्य व रसूखदारों का राज व शासन - 
एसकेएस पावर प्लांट की इस करतूत ने फिर से एक बार साबित कर दिया कि खरसिया में सिर्फ धनाढ्य, रसूखदार उद्योगपतियों एवं भू माफियाओं का राज और शासन है। उक्त मामले में न दस्तावेज और न ही किसी प्रकार की बातचीत, सीधे सीधे प्लांट ने उक्त भूमि पर जेसीबी चलवा कर दबंगई पूर्वक वास्तविक भू-स्वामी को उसकी खुद की भूमि से बेदखल कर दिया। 

तलुवा चाटने में मग्न पुलिस व प्रशासन - 
खुलेआम और जबरिया किसी किसान की भूमि पर एसकेएस प्लांट द्वारा अवैध कब्जा करना यह स्पष्ट करता है कि स्थानीय प्रशासन रसूखदारों के तलुवे चाटने के सिवाय कुछ नहीं कर रहा। खरसिया क्या बल्कि पूरे रायगढ़ क्षेत्र में उद्योगपतियों व भू-माफियाओं द्वारा जबरन अवैध कब्जा करने के मामले बराबर ही सामने आतें हैं। शिकायत करने के बाद भी पीड़ित गरीब किसान दर दर की ठोकरें खाने को विवश होता है। यहां तक कि इस तरह के मामलों में पीड़ित परिवार की महिलाओं के साथ बलात्कार, पुरूष के साथ मारपीट तथा मुखिया की हत्याएं तक हुईं लेकिन प्रशासन बेजा कब्जेदारों के ही पक्षकार बने रहते हैं।


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