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शनिवार, 1 जुलाई 2017

किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं का असर, किसान के बच्चे डर के साए में जीने को मजबूर


छत्तीसगढ़ 30 जून 2017 (रवि ग्वाल). छग में जिस तेजी से किसानों की आत्महत्याओं का आंकड़ा बढ़ रहा है उससे स्थिति भयावह और खौफनाक बन गई है। ऊपर से छग मुख्यमंत्री किसानों की आत्महत्याओं को विपक्ष की चाल बताकर पूरे देश के किसानों का मजाक उड़ा रहे हैं। क्या कृषि प्रधान देश के कृषकों की स्थिति ऐसी ही होनी चाहिए ?


केंद्र में सत्ता मिलने का अर्थ क्या यही होता है कि राज्य सरकार अपनी जिम्मेदारियों से मुंह चुराए और बेतुका बयान दे। यह तो मृतक किसानों के साथ अन्याय है और उनकी मजबूरियों का मजाक उड़ाना है और अपनी नाकामियों को मानने से इंकार कर देना है। प्रदेश के किसान अपने मुखिया से ऐसे बयान की कल्पना नहीं करते। आजकल किसानों की आत्महत्या को लेकर किसान के बच्चों के मन में भी कितना डर है कि आप ये वीडियो देखकर ही अंदाज लगा सकते है। कई गंभीर सवालों को खड़ा करता ये वीडियो। ये विडियो जरूर देखें क्योंकि देखने पर समझ आएगा डिजीटल इंडिया, शाइनिंग इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया हम किस शर्तों पर चाहतें हैं? क्या कृषि प्रधान देश के कृषकों की स्थिति ऐसी ही होनी चाहिए? भारत इक्कीसवीं सदी में और किसान गर्त में। विचार जरूर करिएगा कि हम अपने देश के अन्नदाताओं के लिए कैसा भारत चाहते हैं। 



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