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बुधवार, 21 जून 2017

खरी खरी – मैडम जी सुन लो अर्जी हमारी, खाकी के ऊपर गुण्‍डे हैं भारी

कानपुर 21 जून 2017. भाई हम तो खरी खरी कहते हैं आपको बुरी लगे तो मत सुनो, कोई जबरदस्ती तो है नहीं। एक समय था जब पुलिस वालों की बम्‍पर रंगबाजी हुआ करती थी पर अब उल्‍टा जमाना आ गया है। पुलिस गुन्‍डों पर हाथ डालने से कतराती है, इज्‍जत बचाती नजर आती है। ताजा मामला एक गांजा विक्रेता का है जिसके खिलाफ कार्यवाही करने में पुलिस थरथर कांपती है।

ये महाशय अपने 3 साथियों के साथ मिल कर पुलिस चौकी के बगल में खुलेआम गांजा बेचते हैं पर मजाल है कि कोई मामा कुछ बोल दे। इस पूरे रैकेट का सरगना जिले का नामी बदमाश है जुआ, सट्टा, ड्रग्‍स, मारपीट, हत्‍या समेत शायद ही आईपीसी की कोई धारा बची होगी जो इसके ऊपर लगी न हो। गैंग के दूसरे महानुभव NDPS एक्‍ट में जेल यात्री रहे हैं और एक गेस्‍ट हाउस भी चलाते हैं। तीसरे सज्‍जन पुलिस के मुखबिर हैं और जिला बदर रहे हैं। चौथे महाशय एक नेता जी हैं जो इस बार सभासद बनने का सपना देख रहे हैं। इस चांडाल चौकडी का इलाके में आतंक व्‍याप्‍त है। मोहल्‍ले के लोग इनसे बुरी तरह त्रस्‍त हैं पर डर के मारे विरोध करने की हिम्‍मत नहीं जुटा पा रहे हैं। 

बताते चलें कि इनका सिंडीकेट बीते जमाने के मशहूर डाक्‍टर साहब के अस्‍पताल के बगल वाली पतली गली से चलता है। यहां पहले नहर बहती थी और एक अवैध बस्‍ती होती थी जिसको केडीए ने गिरा दिया था। नहर अब पाइप के अन्‍दर बहती है और बस्‍ती धीरे धीरे फिर से आबाद हो गयी है। इस चांडाल चौकडी के बारे में इलाके के दरोगा जी ने हमें बताया कि इनकी पहुंच बहुत ऊपर तक है, यदि हमने इन पर हाथ डाला, तो ये हमारे पिछवाडे में कर देगें भाला और हमारी लाइफ हो जायेगी झिंगालाला। आप ही बताइये जब दरोगा जी की इतनी डिपर ले रही है तो हमारी क्‍या मजाल जो इनकी तफरी लें। कहीं इनका धीरज जवाब दे गया तो हमारा क्‍या होगा कालिया। पर आपको तो पता ही है कि हम तो खरी खरी कहते हैं आपको बुरी लगे तो मत सुनो, कोई जबरदस्ती तो है नहीं।

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