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शनिवार, 6 मई 2017

बस्तर के हालात पर जेल अफसर की पोस्ट पर मचा बवाल, अफसर को मिली नोटिस

छत्तीसगढ़ 06 मई 2017 (जावेद अख्तर). सुकमा के बुरकापाल में 24 अप्रैल को हुए माओवादी हमले में 25 जवानों के शहीद होने की घटना के बाद रायपुर सेंट्रल जेल में सहायक जेल अधीक्षक वर्षा डोंगरे की फेसबुक पोस्ट से बवाल मच गया है। पोस्ट में वर्षा ने बस्तर की स्थितियों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। इसके पहले वर्षा छत्तीसगढ़ में पीएससी परीक्षाफल में गड़बड़ी को लेकर भी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में सरकार को कठघरे में खड़ा कर चुकी हैं।


फेसबुक पर पोस्ट करने से सरकारी तंत्र की भर्राशाही का पूरा काला चिट्ठा सबके सामने आ जाने से खूब किरकिरी हो रही है और सरकार से तरह तरह के सवालों की बौछार हो रही जिससे तिलमिला कर सरकार ने वर्षा डोंगरे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। यह नोटिस सरकार की तिलमिलाहट का सबूत है क्योंकि असलियत खुल जाने से छग राज्य सरकार के विकास विस्तार की हकीकत सबके समक्ष आ चुकी है।

पोस्ट में लिखा - 
मुझे लगता है, एक बार हम सबको अपना गिरेबान झांकना चाहिए। सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी। घटना में दोनों तरफ से मरने वाले अपने देशवासी हैं, भारतीय हैं, इसलिए कोई भी मरे तकलीफ हम सबको होती है। पूंजीवादी व्यवस्था को आदिवासी क्षेत्रों में लागू करवाना, उनके जल-जंगल-जमीन को बेदखल करने के लिए गांव का गांव जला देना, आदिवासी महिलाओं के साथ दुष्कर्म, आदिवासी महिला नक्सली हैं या नहीं, यह जानने के लिए उनके स्तनों को निचोड़कर देखा जाता है। टाइगर प्रोजेक्ट के नाम पर आदिवासियों को उनके जल-जंगल-जमीन से बेदखल करने की रणनीति बनती है,। जबकि संविधान की पांचवी अनुसूची के अनुसार किसी सैनिक या सरकार को इसे हड़पने का हक नहीं है। आखिर ये सब कुछ क्यों हो रहा है? नक्सलवाद का खात्मा करने के लिए... लगता नहीं।

पोस्ट हुई वायरल मिला जनसमर्थन - 
फेसबुक पर वर्षा की पोस्ट पर आए ज्यादातर कमेंट्स में उनकी बातों का समर्थन किया गया। ज्यादातर लोगों ने लिखा कि बस्तर में ऐसा ही कुछ हो रहा है, जो आदिवासियों के हित में कदापि नहीं है। कुछ कमेंट्स में यह भी कहा गया कि सरकार बस्तर से नक्सलवाद की समस्या का हल तलाशना नहीं चाहती। क्योंकि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अपार खनिज संपदा बहुमूल्य पत्थर हैं जिनका अवैध खनन दस वर्षों से चरम पर है। नक्सल की समस्या खत्म होते ही विकास की गति बढ़ जाएगी और यह सभी क्षेत्र आमजन, मीडिया, मानवाधिकार आयोग और न्यायालयों की नज़र में आ जाएगा तब इतनी बड़ी मात्रा में अवैध खनन और लूट संभव नहीं होगा। इसलिए छग राज्य सरकार किसी भी सूरते हाल में नक्सलवाद का खात्मा नहीं चाहती है और न ही करेगी भले चाहे दसियों हजार भारतीय सैनिक शहीद हो जाएं। 

फिर क्यों डरती है सरकार ?
जगदलपुर जेल में करीब चार साल पदस्थ रहीं वर्षा ने लिखा, मैंने खुद बस्तर में 14 से 16 साल की आदिवासी बच्चियों को देखा था, जिन्हें थाने में महिला पुलिस को बाहर कर निर्वस्त्र किया गया और प्रताडऩा दी गई। उनके दोनों हाथों की कलाइयों और स्तनों पर करंट लगाए गए। मैं सिहर उठी थी कि इन छोटी-छोटी आदिवासी बच्चियों पर थर्ड डिग्री टॉर्चर किसलिए? मैंने डॉक्टर से उचित उपचार और आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा। सच तो यह है, प्राकृतिक संसाधन इन्हीं जंगलों में हैं, जिसे पूंजीपतियों को बेचने के लिए खाली करवाना है। आदिवासी जल-जंगल-जमीन खाली नहीं करेंगे, क्योंकि यह उनकी मातृभूमि है। वे माओवाद का अंत तो चाहते हैं, लेकिन जिस तरह से देश के रक्षक ही उनकी बहू-बेटियों की इज्जत उतार रहे हैं, उनके घर जला रहे हैं, उन्हें फर्जी केसों में चारदीवारी में सडऩे के लिए भेजा जा रहा है, आखिर वो न्याय के लिए कहां जाए? ये सब मैं नहीं कह रही, बल्कि सीबीआई रिपोर्ट कहती है। सुप्रीम कोर्ट कहती हैं। जो भी आदिवासियों की समस्या का समाधान की कोशिश करते हैं, चाहे वह मानवाधिकार कार्यकर्ता हों, चाहे पत्रकार, उन्हें फर्जी माओवादी केसों में जेल में ठूंस दिया जाता है।

आदिवासियों पर न थोपें विकास - 
वर्षा ने पोस्ट में सुझाव देते हुए लिखा, कानून किसी को यह हक नहीं देता कि किसी के साथ अत्याचार करें, इसलिए सभी को जागना होगा। राज्य में पांचवीं अनुसूची लागू होनी चाहिए। आदिवासियों का विकास आदिवासियों के हिसाब से होना चाहिए। उन पर जबरदस्ती विकास न थोपा जाए। जवान हो या किसान, सब भाई-भाई हैं। एक-दूसरे को मारकर न ही शांति स्थापित होगी और न ही विकास। वर्षा ने लिखा, हम भी सिस्टम के शिकार हुए, लेकिन अन्याय के खिलाफ जंग लड़े। षडयंत्र रचकर तोडऩे की कोशिश की गई। प्रलोभन और रिश्वत का ऑफर भी दिया गया। हमने सारे इरादे नाकाम कर दिए और सत्य की विजय हुई।

* मैंने कहां क्या पोस्ट किया है, क्यों किया है, इस बारे में मीडिया के सामने कुछ भी नहीं कहना चाहती। मुझे जहां अपना पक्ष रखना है, वहीं रखूंगी। - वर्षा डोंगरे, सहायक जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल रायपुर 


* उनकी इस पोस्ट पर जेल महानिदेशक गिरधारी नायक ने जांच के निर्देश दिए हैं। वर्षा डोंगरे की फेसबुक वॉल की सभी टिप्पणियों को पेनड्राइव में सुरक्षित रख लिया गया है। वर्षा ने किन परिस्थितियों में सरकार के खिलाफ टिप्पणियां की हैं, इसकी पड़ताल जेल के उप-अधीक्षक आर.आर राय करेंगे। - के.के गुप्ता, जेल डीआईजी

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