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शनिवार, 29 अप्रैल 2017

नक्सलियों ने पर्चा जारी कर बताया नेताओं को फौजियों का दुश्मन

छत्तीसगढ़ 28 अप्रैल 2017 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ के सुकमा में 25 जवानों की जान लेने वाले नक्सलियों ने आज अचानक से जवानों के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए पर्चे फेंक अपनी भावनाओं को दर्शाया। नक्सल प्रभावित नारायणपुर जिले की अंतागढ़ तहसील में तोड़की में बने बीएसएफ के बेस कैम्प के बाहर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी की तरफ से जारी किए पर्चे फेंककर अपील की है कि 'फौजी भाइयों - रायपुर और दिल्ली में बैठे बड़े नेता और अफसर अपने दुश्मन हैं, अतः आपके और हमारे दुश्मन एक ही हैं'


उन्होंने सुरक्षाबलों के जवानों को भाई से संबोधित करते हुए लिखा है 'शोषण के खिलाफ हमारा साथ दें, आप बस इतना करें, किसी बड़े अफसर के आने की खबर हम तक ग्रामीणों के जरिये भेज दे। बाकी का न्याय जनता अदालत में हो जाएगा। हम पर विश्वास रखें आपका नाम कहीं बाहर नहीं जाएगा। हमारी आपसे कोई दुश्मनी नहीं है, याद रखें ये लड़ाई सिर्फ अमीर और गरीब की है'। पर्चे में नक्सलियों ने जवानों से अपील की है कि वह गरीब, मजबूर और महिलाओं को निशाना बनाना छोड़ें।
नक्सलियों ने पर्चे के आखिर में सुरक्षाबलों के जवानों से कहा है आप हमारा साथ दें, हम आपके हक की लड़ाई लड़ेंगे।  इन पर्चो को देखकर ऐसा लगता है कि 31 जवानों की शहादत से क्रोधित सुरक्षाबलों द्वारा आगे की जाने वाली कार्रवाई से बचने को लेकर नक्सलियों ने भावनात्मक रूप से घेरने और कमज़ोर करने के लिये इस तरीके को अपनाया है। 

नक्सलियों ने ऑडियो जारी कर लगाए कई आरोप - 
सुकमा में हुए हमले के बाद नक्सलियों ने ऑडियो जारी कर सुरक्षाबलों और सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए, साथ ही इसी साल 11 मार्च को हुए हमले का भी जिक्र किया गया है। सीपीआई माओवादी के दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रवक्ता विकल्प की तरफ से गुरुवार को ये ऑडियो जारी किया गया है। जिसमें उसने बुरकापाल हमले को, पिछले साल सुकमा में 9 नक्सली, ओडिशा में कथित रूप से 9 ग्रामीणों समेत 21 नक्सलियों की हत्या के जवाब में की गई कार्रवाई बताया है। माओवादियों ने मीडिया में आई उन खबरों का भी खंडन किया है, जिसमें मारे गए जवानों के शवों के साथ छेड़छाड़ की गई थी। इसके अलावा नक्सलियों ने जवानों से शोषण के खिलाफ उनका साथ देने की अपील भी की है। 

राजीव राय भटनागर सीआरपीएफ के नए महानिदेशक नियुक्त -
केंद्र सरकार ने बुधवार को वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी राजीव राय भटनागर को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का नया महानिदेशक नियुक्त किया है। यह नियुक्ति छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में 25 जवानों के मारे जाने के दो दिन बाद की गई है। भटनागर उत्तर प्रदेश काडर के 1983 बैच के अधिकारी हैं। इस पद पर तैनाती उनके पूर्ववर्ती के. दुर्गा प्रसाद के 28 फरवरी को सेवानिवृत्त होने जाने के करीब दो महीने बाद की गई है। अतिरिक्त महानिदेशक सुदीप लखटकिया एक मार्च से सीआरपीएफ के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार संभाले हुए थे। लखटकिया 1984 बैच के तेलंगाना काडर के आईपीएस अधिकारी हैं। भटनागर वर्तमान में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के महानिदेशक के तौर पर सेवाएं दे रहे थे। यह एडीजी रैंक की पोस्ट थी, जिसे अस्थायी तौर पर विशेष महानिदेशक रैंक में प्रोन्नत किया गया था। इससे पहले उन्होंने सीआईएसएफ में अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर सेवाएं दी हैं। सूत्रों ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति ने भटनागर की वरिष्ठता को ध्यान में रखकर उनका चयन किया है।

मृत नक्सलियों के आंकड़ें अलग-अलग - 
पुलिस और सीआरपीएफ अधिकारियों द्वारा मुठभेड़ में नक्सलियों के मारे जाने के आंकड़े अलग-अलग बताये जा रहे हैं। सीआरपीएफ डीआईजी दंतेवाड़ा दिनेश उपाध्याय ने दावा किया है कि इस घटना में 10 नक्सली मारे गये हैं और 5 नक्सली घायल हुए हैं, वहीं एएसपी जीतेन्द्र शुक्ला ने 3 से 5 नक्सलियों के मारे जाने का अंदेशा व्यक्त किया है। 

केंद्र सरकार सुरक्षा बलों के लिए खरीदेगी बारुदी सुरंगों से सुरक्षित वाहन -
केंद्र सरकार छग में नक्सल रोधी अभियानों में शामिल सुरक्षा बलों के इस्तेमाल के लिए गोलियों व बारुदी सुरंगों से सुरक्षित करीब 250 वाहन खरीद रही है। केंद्र ने कहा कि नक्सली हिंसा में हम अपने सैनिकों की जिंदगी यू ही नहीं गवां सकते हैं।

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में व्यय की गई राशि - 
केंद्र ने बताया कि सुरक्षा संबंधित व्यय योजना के लिए जारी की गयी धनराशि वर्ष 2011-12, वर्ष 2012-13, वर्ष 2013-14 में 575 करोड़ रुपये थे। जो कि वर्ष 2014-15, वर्ष 2015-16, वर्ष 2016-17 में बढ़कर 675 करोड़ रुपये हो गए है। केंद्र ने कहा कि छग में नक्सली हिंसा से सर्वाधिक प्रभावित बस्तर क्षेत्र में 45,000 अर्धसैन्यकर्मी और राज्य पुलिस के 20,000 कर्मी तैनात हैं। गृह मंत्रालय ने मीडिया की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए एक बयान में कहा कि यह कहना तत्थात्मक रूप से सही नहीं है कि वित्तीय संसाधनों में कमी के कारण नक्सलवाद से जंग में पुलिस एवं सीआरपीएफ के कर्मियों की अनमोल जिंदगियां जा रही हैं।

नक्सली कमाण्डर सोनू, सीतू व अर्जुन पर चिंतागुफा में मामला दर्ज - 
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक जीतेन्द्र शुक्ला ने बताया कि 24 अप्रैल को बुरकापाल में सीआरपीएफ 74वीं बटालियन की रोड ओपनिंग पार्टी को एंबुश में फंसाकर ताबड़तोड़ फायरिंग की जिसमें 25 जवान शहीद हो गये थे। पुलिस ने इस नक्सली हमले में नक्सल कमाण्डर सोनू, सीतू, अर्जुन के खिलाफ नामजद व अन्य के खिलाफ मामला चिंतागुफा थाना में पंजीबद्ध किया है। नक्सली आरोपियों की धरपकड़ हेतु इलाके में सर्चिंग आपरेशन तेज कर दिया गया है। 

घटना के बाद से कई गांवों के पुरूष गायब - 
सीआरपीएफ अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ में नक्सलियों के दबाव में ही ग्रामीणों ने सहयोग किया था। इधर घटना के बाद से बुरकापाल, टोंडामरका समेत आधा दर्जन से ज्यादा गांवों से पुरूष सदस्य गायब हो गये हैं। ऐसा माना जा रहा है कि नक्सली हमले के दौरान उक्त गांव के पुरूष सदस्यों ने नक्सलियों का साथ दिया था, गांव में केवल बुजुर्ग, महिलायें व बच्चें ही हैं। इसी दहशत के चलते ग्रामीणों ने गांव खाली कर दिया है। 




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