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मंगलवार, 25 अप्रैल 2017

कोल्ड ब्लडेड मर्डर है सुकुमा का नक्सली हमला - राजनाथ सिंह

छत्तीसगढ़ 25 अप्रैल 2017 (छग ब्यूरो). सुकमा के चिंतागुफा थाना क्षेत्र के बुरकापाल में हुए नक्सली हमले में 25 शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह आज रायपुर पहुंचे। यहां माना कैंप में गृहमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि दी, तथा छग मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने भी पुष्प अर्पित कर श्रध्दांजलि अर्पित की। इसके बाद राजनाथ सिंह सीधे रामकृष्ण अस्पताल में भर्ती घायल जवानों से भी मिलने गये और उनका हालचाल जाना।


 
राजनाथ सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार इसको चुनौती की तरह ले रही है। उन्होंने नक्सलियों के सुकमा हमले को कोल्ड ब्लडेड मर्डर बताया और कहा कि जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी, नक्सलियों को इसका माकूल जवाब दिया जाएगा। केन्द्रीय गृहमंत्री ने कहा कि नक्सली सरकार की विकास कार्यों को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, इसलिए एेसी कायराना घटना को अंजाम देते हैं। लेकिन नक्सली अपने मंसूबे में कामयाब नहीं होंगे। जवानों पर हमला निंदनीय है। उन्होंने नक्सलियों को आदिवासियों का सबसे बड़ा दुश्मन बताते हुए कहा कि सुकमा का हमला कायराना करतूत है।
उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाने देंगे। राजनाथ सिंह ने नक्सल समस्या को लेकर 8 मई को गृह मंत्रालय ने बैठक बुलाई है। जिसमें नक्सल समस्या को खत्म करने के लिए केन्द्र और राज्य सरकार एकजुट होकर रणनीति तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि नक्सली नहीं चाहते हैं कि आदिवासी विकास की मुख्यधारा से जुड़े। इसलिए विकास कार्य को रोके जाने की कोशिश है। केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस वक्त किसी पर भी दोष मढना गलत होगा। राजनाथ सिंह के साथ अलावा गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह, राज्यवाल बीएल दास टंडन सहित छत्तीसगढ़ के अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि दी।

बताते चलें कि छत्तीसगढ़ का सुकमा क्षेत्र (जो कि नक्सल प्रभावित इलाका है) में लाल सलाम के आतंक से आज 25 जवान शहीद हो गए थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सुबह सर्चिंग के लिए निकली सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के 99 जवानों की टुकड़ी पर बुर्कापाल में घात लगाकर किये गये नक्सली हमले में 25 जवान शहीद हो गए हैं तथा आठ जवान लापता हैं। डेढ़ महीने के अंतराल में इस दूसरी वारदात में महिला नक्सलियों ने जवानों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाई, घायल जवानों ने इसकी पुष्टि की है।

हेलीकाप्टर से रायपुर के रामकृष्ण और बालाजी अस्पलात में इलाज के लिए दाखिल कराए गए घायल जवानों ने बताया कि बुर्कापाल के पास जैसे ही जवान पहुंचे माओवादियों ने पहले बड़ा विस्फोट किया और इसके बाद ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। जब तक जवान संभल पाते कई जवान शहीद हो गए। जवानों के अनुसार करीब 300 से ज्यादा नक्सली घातक हथियार रखे हुए थे। बताया जा रहा है कि इस वारदात में पुनः महिला नक्सलियों की भूमिका थी तथा उनकी संख्या भी अधिक होना बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार सुकमा जिले के बुर्कापाल में हुई जिसमें हमले से पहले ग्रामीणों द्वारा रेकी कराए जाने की संभावना भी जताई गई है। घायल जवानों ने बताया कि रोड कंसट्रक्शन का काम चल रहा था। जिसे सीआरपीएफ के जवान सुरक्षा दे रहे थे। इस बीच ही ग्रामीणों से माओवादियों ने रेकी कराई। जिसके बाद इतनी बड़ी घटना को अंजाम दिया।

डेढ़ माह में दूसरा बड़ा हमला - 
नक्सलियों की मिलेट्री बटालियन का आधार इलाका माने जाने वाले चिंतागुफा क्षेत्र में लगातार अपने पैर मजबूत करने का प्रयास माओवादियों द्वारा किया जा रहा है, यही कारण है कि यहां पिछले महीने कोत्ताचेरू में यू शेप एम्बुश लगाकर नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाया था, जिसमें 12 जवान शहीद हो गये थे। वहीं इसके बाद फिर दूसरी बार यहां रोड ओपनिंग पार्टी को ही निशाना बनाया गया है, जिसमें आज बुरकापाल इलाके में 26 जवानों ने अपनी शहादत दी है, वहीं छह जवान घायल हो गये हैं, इनमें से एक घायल जवान को जगदलपुर मेकॉज लाया गया है, जहां उसका उपचार जारी है।

नक्सली कमांडर हिड़मा की अगुवाई - 
इस पूरी वारदात को नक्सलियों की मिलेट्री बटालियन का कमाण्डर हिड़मा लीड कर रहा था। हिड़मा के अधीन तीन कम्पनियों का नेतृत्व अर्जुन, सोनू और सीतू कर रहे थे, पूर्व में कोत्ताचेरू में हुई घटना का नेतृत्व इसी में से एक कम्पनी के कमाण्डर सोनू ने किया था, जिसमें 12 जवान वीरगति को प्राप्त हुए थे। हिड़मा लगातार अपने मिलेट्री बटालियन को मजबूत करता चला जा रहा है, वहीं जवानों से लूटे गये हथियारों के साथ-साथ कंट्री मेड विस्फोटक बनाने में भी वह महारत हासिल कर रहा है।

जवानों पर भारी पड़ी हिड़मा की रणनीति - 
बुरकापाल में हुई इस वारदात से एक बात स्पष्ट रूप से सामने आयी है कि नक्सलियों की मिलेट्री बटालियन हेड हिड़मा की रणनीति सीआरपीएफ जवानों पर भारी पड़ गयी। देश में नक्सलियों की एकमात्र मिलेट्री बटालियन का सुकमा जिले का चिंतागुफा इलाका आधार क्षेत्र माना जाता है, इस लिहाज से यहां से तकरीबन दो सौ वर्ग किलोमीटर इलाके में होने वाली अधिकांश वारदातों में इसी मिलेट्री बटालियन का हाथ होता है। पिछले कुछ सालों में लंबी चुप्पी के बाद एकाएक नक्सलियों ने फिर से अपनी मौजूदगी दर्शाते हुए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया है।

आखिर गर्मियों में ही क्यों होते हैं नक्सली हमले - 
ऐसे में नक्सलियों की मिलेट्री बटालियन फिर से एक बार अपनी नई रणनीति का प्रदर्शन करते हुए इलाके में दहशत का माहौल बनाने में काफी हद तक कामयाब होती दिख रही है, इधर इस घटना में जवानों से बड़ी चूक होने की बात सामने आ रही है, लेकिन सीआरपीएफ के अधिकारी इससे इंकार कर रहे हैं। कुल मिलाकर इस घटना ने सीआरपीएफ सहित पुलिस विभाग की लचर कार्यशैली, इंटेलीजेंस और नक्सल उन्मूलन को लेकर तय की जाने वाली रणनीति पर सवाल खड़े कर दिये हैं। 

ताड़मेटला के बाद चौथी बड़ी वारदात - 
ताड़मेटला काण्ड के बाद यह चौथी बड़ी वारदात है, जिसे नक्सलियों ने अंजाम दिया है। वर्ष 2010 में 6 अप्रैल को ताड़मेटला में नक्सलियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला कर दिया था, जिसमें 76 जवान शहीद हुए, इसके बाद इसी साल नारायणपुर जिले के धौड़ाई में 29 जून को हुए हमले में 26 जवान शहीद हो गये, 25 मई 2013 को झीरम घाटी काण्ड के बाद आज बुरकापाल में नक्सलियों ने खूनी ताण्डव किया।



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