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शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2017

विभाग के भ्रष्टाचार से मज़दूर दबे रहे, विभागीय मंत्री स्वागत सत्‍कार में रमे रहे

छत्तीसगढ़ 24 फरवरी 2017 (जावेद अख्तर). छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के सिविल लाइन क्षेत्र में न्यू सर्किट हाउस परिसर में निर्माणाधीन इमारत की चौथी मंजिल का छज्जा व लेंटर भरभरा कर नीचे बैठ जाने से 20 से अधिक मज़दूर दब गए। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस व प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे, घायलों को निकाल कर तुरंत एंबुलेंस से सरकारी अस्पताल मेकाहारा पहुंचाया गया तथा राहत बचाव कार्य के लिए दमकल गाड़ियां दल के साथ पहुंच गयीं।


जानकारी के अनुसार तब तक यह स्पष्ट नहीं था कि यहां कितने मजदूर काम पर लगे हुए थे और इनमें कितने मजदूर चौथी मंजिल पर थे। पुलिस ने पूरी इमारत को अपने कब्जे में ले लिया है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने कहा, ज्यादातर मजदूरों को मलबे से निकाला जा चुका है, मगर मलबे में कुछ मजदूरों के दबे होने की आशंका है। लोहे को काटने के लिए गैस कटर मंगाए गए हैं, इसमें थोड़ी दिक्कत आ रही थी परंतु सात बजे तक में सभी मज़दूरों को सुरक्षित निकाल कर अस्पताल भेज दिया गया। अंबेडकर सरकारी अस्पताल (मेकाहारा) के ट्रामा सेंटर में सभी घायल मज़दूरों का इलाज किया जा रहा है। अधिकांश मज़दूरों को सिर पर अधिक चोटें आईं हैं। वहीं सरकारी आंकड़ों में मज़दूरों की संख्या 16 बताई गई है। जबकि मेकाहारा में गंभीर रुप से घायल 26 मज़दूरों का इलाज किया जा रहा है।

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया आंखों देखा हाल -
न्यू सर्किट हाउस की निर्माणाधीन बिल्डिंग की चौथी मंजिल पर छत व छज्जे की ढलाई के लिए सेंट्रिंग प्लेट डालने का काम चल रहा था। पड़ोस के एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, सिविल लाइंस में सर्किट हाउस से थोड़ी दूरी पर उनका निवास है, वह किसी काम से काफी हाउस गए हुए थे। काफी पीकर बाहर निकल ही रहे थे कि अचानक ही बहुत तेज़ आवाज़ आई और बचाओ बचाओ की आवाजें आने लगी, कुछ मिनट तक समझ नहीं आया कि यह आवाजें कहां से आ रही है। इसी बीच आसपास के कई लोगों को अंदर निर्माणाधीन बिल्डिंग की तरफ भागते देखा तो वो भी दौड़ गये। अंदर का दृश्य देखकर सांसे अटक गई। घटना के बाद चारों ओर अफरा-तफरी व चीख-पुकार मची हुई थी। पूरा लेंटर व छज्जा जमीदोंज था और बहुत सारे लोग पहुंचकर हाथों से ही मलबे को हटाने का प्रयास कर रहे थे। किसी ने सामने ही सिविल लाइंस थाने को सूचना दी तो वहां से सभी पुलिसकर्मी भाग कर पहुंचे और मलबा हटाने के लिए भिड़ गए। 15-20 मिनट के भीतर दमकल गाड़ी और एम्बयूलेंस के कर्मचारी स्ट्रेचर लेकर आते दिखाई दिए तब तक 6-7 मज़दूरों को निकाल लिया गया था मगर वह पूरी तरह से होश में नहीं थे और कराहने की आवाज़ें सुनाई दे रही थी। इतने में कांग्रेसी नेता विकास उपाध्याय सहित 6-7 लोग आ गए और सब्बल वगैरह से मलबा को हटाने में लग गए। लगभग तीन घंटे के दौरान तक रेस्क्यू ऑपरेशन जैसा माहौल बना हुआ था। पहली बार इतने अधिक लोगों को मानवता का फर्ज़ निभाते देख रहा था, कुछेक मज़दूरों संग पुलिस लगी हुई थी, नेता व मीडिया के लोग लगे हुए थे, सभी लोग पूरा प्रयास कर रहे थे क्योंकि सबका एक ही ध्येय था मज़दूरों को जल्द से जल्द बाहर निकालना और एम्बयूलेंस तक पहुंचाना। स्ट्रेचर कम था तो लोगों ने हाथों को आपस में जोड़कर स्ट्रेचर बनाया और घायल को लेकर एम्बयूलेंस तक ले गए। 

मजिस्ट्रेट जांच का आदेश - 
न्यू सर्किट हाउस के निर्माणाधीन भवन के ढहने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच होगी। इसके अलावा लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी भी इस हादसे की तकनीकी पहलुओं की जांच करेगी। इस घटना में 20 से अधिक मजदूर दब गए थे। सभी मजदूरों का उपचार अंबेडकर अस्पताल में किया जा रहा है। 

सचिव पहुंचे घटनास्थल का जायज़ा लेने - 
पीडब्ल्यूडी सचिव सुबोध सिंह ने घटनास्थल का जायजा लेने के बाद जांच के लिए कलेक्टर ओ.पी चौधरी को निर्देश दिए। कलक्टर यह जांच टीम गठित करेंगे। कमेटी आज से ही जांच प्रारंभ कर देगी। उन्होंने बताया, यह कमेटी तीन दिन में रिपोर्ट देगी। सिंह ने कहा कि इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने घायलों को 25-25 हजार रुपए और उनके उपचार का खर्च वहन करने की घोषणा की है।

ठेकेदार पूर्व इंजीनियर पीडब्ल्यूडी का -
न्यू सर्किट हाउस इमारत के निर्माण का ठेका सोहन ताम्रकार की फर्म के पास था। सोहन ताम्रकार पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर रह चुके हैं। सूत्रों द्वारा ज्ञात हुआ है कि उन्होंने यह ठेका अपने प्रभाव के चलते लिया था। ठेकेदार सोहन ताम्रकार पीडब्ल्यूडी मंत्री राजेश मूणत के करीबी बताए जाते हैं। 

मंत्री बंगले के सामने है सर्किट हाउस इमारत -
लोक निर्माण विभाग के मंत्री राजेश मूणत के सरकारी बंगले से लगभग डेढ़ सौ कदम की दूरी पर सर्किट हाउस इमारत है। न्यू सर्किट हाउस ठीक इसके सामने बनाया जा रहा है। सिविल लाइंस क्षेत्र में 6-7 मंत्री के सरकारी बंगले स्थित है। जिसमें पीडब्ल्यूडी मंत्री का बंगला भी शामिल है। वहीं लगभग पांच सौ मीटर की दूरी पर मुख्यमंत्री निवास एवं विपरीत दिशा में राजभवन स्थित है। 

3 घंटे में नहीं पहुंचे 1 भी मंत्री, पीडब्ल्यूडी मंत्री आत्मीय स्वागत कराने में व्यस्त रहे -
सबसे अधिक हैरानी की बात है कि तीन घंटे के दौरान सत्तापक्ष की ओर से एक भी मंत्री घटना स्थल पर नहीं आए, जबकि सात मंत्रियों के बंगले घटनास्थल के पांच सौ मीटर के दायरे में मौजूद है और पीडब्ल्यूडी मंत्री का बंगला तो सबसे निकट है। वहीं कलेक्टर, विभागीय सचिव, पुलिस प्रशासन व अन्य अधिकारी घटनास्थल पर आ गए थे। पीडब्ल्यूडी विभाग की लापरवाही तो सदैव चर्चा का विषय रही है, वहीं अत्यधिक भ्रष्टाचार करने के नाम से विख्यात विभाग के मंत्री राजेश मूणत घटना के दिन रायगढ़ दौरे पर किसी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निकल गए थे। रात्रि 11 बजे पीडब्ल्यूडी मंत्री रायगढ़ पहुंचे थे, यानि कि मंत्री 3 बजे के आसपास रायपुर से निकले होंगे, घटना के कुछ समय बाद इसकी सूचना मिल जानी चाहिए थी।  संभवत सूचना देर से मिली होगी। परंतु घटना की सूचना मिलने के बाद रायगढ़ में आत्मीय स्वागत करवाया जाना कहां तक उचित है? 

विवादों में रहना पसंद है -
लोक निर्माण व परिवहन मंत्री राजेश मूणत अपने प्रथम कार्यकाल से ही विवादों में रहे हैं, संभवतः उन्हें विवादों में रहना पसंद होगा। कई बार अनाप शनाप बयानबाज़ी करना, खुलेआम सड़क पर जनता के बीच अश्लील गालियां देना, पत्रकारों से दुर्व्यवहार करना, शिकायतकर्ताओं को बंगले से भगा देना, मीटिंग में अधिकारियों से अशिष्ट तरीके से बात करना, भ्रष्टाचार की शिकायत सुनने से मना कर देना, विभागीय शिकायत सुनने के लिए समय नहीं देना आदि आदि आरोपों की लंबी फेहरिस्त है। 

7 करोड़ का ठेका, 7 सप्ताह मियाद -
पीडब्ल्यूडी के अफसरों ने बताया कि न्यू सर्किट हाउस के एक हिस्से के रूप में 5000 वर्गफीट में इस बिल्डिंग का निर्माण 7 करोड़ की लागत से कराया जा रहा है, जिसका ठेका सोहन ताम्रकार को मिला था। बिडिंग के एक हिस्से की ढलाई हो चुकी थी, दूसरे हिस्से की 2400 वर्गफीट छत की ढलाई कराई जा रही थी। 4 करोड़ का काम होना था। सर्किट हाउस के ठीक बगल में लोक निर्माण विभाग की जिस निर्माणाधीन बिल्डिंग के दूसरे मंजिल की छत ढलाई के दौरान भरभरा कर गिरी, उसका ठेका पीडब्ल्यूडी में दो-ढाई सालों तक सब इंजीनियर के पद पर नौकरी कर चुके ठेकेदार सोहन ताम्रकार को मिला हुआ है। ठेकेदार ताम्रकार की विभाग में खासी पैठ होने के कारण घोर लापरवाही बरती गई थी। ठेकेदार को विभाग के एसडीओ और सब इंजीनियर का पूरा सपोर्ट मिला हुआ था। मोटी रकम बचाने के लालच में स्लोप में लगाई गई बल्लियों की पैकिंग ही नहीं कराई गई थी, इस कारण बड़ा हादसा हुआ और बीस से अधिक मजदूरों की जान पर बन आई।

 
घटनास्थल पर ठेकेदार और साइड इंजीनियरों की घोर लापरवाही की तस्वीर खुलकर सामने आई। सेटरिंग लगाने के लिए जिस तरह लोहे की बल्लियां लगाई गई थी, वह हिस्सा काफी ढलाननुमा स्लोप में बना हुआ था और ऊपर से नीचे की ओर उतराई गई थी, यदि ठेकेदार सेटरिंग की बल्लियों के बीच-बीच में पैकिंग कराया होता तो गंभीर हादसा नहीं होता। मौके पर मौजूद पीडब्ल्यूडी और नगर निगम के वरिष्ठ इंजीरियरों ने चर्चा के दौरान सेटरिंग में बड़ी लापरवाही बरते जाने के कारण हादसा होने की बात बताई। हादसे के बाद विभाग के चीफ इंजीनियर सहित अनेक अधिकारी मौके पर पहुंचे। न्यू सर्किट हाउस फेस-2 की निर्माणधीन बिल्डिंग की दूसरी मंजिल के छत की ढलाई गुरुवार को दोपहर तीन बजे शुरू हुई। मिक्सर मटेरियल लोहे की जालियों पर डाला जा रहा था और बिल्डिंग के एक हिस्से की छत की ढलाई काम तेजी से चला। उस दौरान जैसे ही छत ढलाई करने के लिए तीन से चार ब्राइवेटर मशीनें चालू की गईं वैसे ही छज्जा और फिर छत भरभरा कर गिर गई।

 
विभागीय सूत्रों के अनुसार न्यू सर्किट हाउस फेस-2 की निर्माणाधीन बिल्डिंग को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य था। इस बात पर पूरी ताकत लगाई जा रही थी कि दूसरी मंजिल की छत ढलाई हो जाने पर मार्च से पहले 4 करोड़ रुपए का भुगतान ठेकेदार को कर दिया जाए, ताकि बजट लेप्स होने जैसी प्रक्रिया का सामना न करना पड़ा। इस नवनिर्मित बिल्डिंग में लगभग 150 सीटर ऑडिटोरियम और न्यू सर्किट हाउस में अभी संचालित डायनिंग किचन (काफी हाउस) को शिफ्ट करने की योजना है। न्यू सर्किट हाउस केवल वीआईपी लोगों के लिए और यह नई बिल्डिंग आम लोगों के उपयोग के हिसाब से बनाई जा रही थी।

भाजपा नगर अध्यक्ष ने उठाया विभागीय कार्यशैली पर सवाल - 
शहर भाजपा अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने न्यू सर्किट हाउस इमारत ढहने की घटना पर अफसोस जताते हुए कहा, इस घटना के साथ ही कमल विहार के गेट ढहने और बिलासपुर में हाईकोर्ट की इमारत ढहने के मामले की भी जांच होनी चाहिए। जो भी इनके जिम्मेदार हो, उन पर कार्रवाई की जाए। 


* सर्किट हाउस ढ़हने की घटना के लिए इंजीनियर और ठेकेदार प्रमुख जिम्मेदार है क्योंकि घटिया निर्माण के कारण ढहने की स्थिति बनी है। दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार को तत्काल सभी प्रभावित मजदूरों को 20-20 लाख रुपए की आर्थिक मदद देनी चाहिए। हम भी अपनी तरफ से प्रभावितों को हर संभव मदद करेंगे। - प्रमोद दुबे महापौर रायपुर 

* हमारी प्राथमिकता पहले सभी मजदूरों को मलबे से निकाल कर उनका बेहतर उपचार करना है। इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है, यह बाद में देखेंगे। घटना के सभी पहलुओं की जांच कराई जाएगी। लेकिन, इससे पहले हमें मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालना है। - ओपी चौधरी, कलेक्टर रायपुर 


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