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शनिवार, 21 जनवरी 2017

नियमों को ताक पर रख कर LPG से चल रही हैं खटारा स्कूली वैन

अल्हागंज 21 जनवरी 2017. एटा जैसे सड़क दुर्घटना को लेकर भले ही लोग सजग क्यों न हों, लेकिन लापरवाही इस सजगता पर भारी है। क्षेत्र में कई विद्यालयों में संचालकों ने LPG से चलने वाली खटारा वाहनों को लगा रखा है। इसमें भूसे की तरह बच्चों को भरकर स्कूलों को ले जाया जाता है। सफर के दौरान बच्चों की मानसिक तथा शारीरिक तथा मानसिक यन्त्रणा से उनको कोई ताल्लुक नहीं रहता है। संचालकों को तो केवल आर्थिक लाभ से मतलब रहता है।
नियमानुसार स्कूली वाहनों में CNG गैस अथवा डीजल प्रेट्रोल का उपयोग होना चाहिए लेकिन विद्यालयों के संचालक बच्चों के भविष्य तथा उनके जीवन से खिलवाड़ करते हुऐ वाहनों को LPG गैस से चलवा रहे हैं। क्षेत्र में कई ऐसे विद्यालय हैं जिनके पास शासकीय मान्यता भी नहीं है, लेकिन बच्चों को अच्छी शिक्षा, प्रशिक्षित शिक्षक, हवादार कमरे और फिल्टर, ठंडा पानी, खेल का मैदान होने का दावा करते हुऐ सुविधायें उपलब्ध कराने का ढोंग करते हैं। अगर इन विद्यालयों का निरीक्षण कर लिया जाऐ तो किसी के पास खेल का मैदान भी नहीं है। लेकिन इन सुविधाओं को उपलब्ध कराने का ढोंग करते हुए अभिभावकों से मनमाना शुल्क वसूल करके उनके साथ ठगी करते हैं।

शिक्षा विभाग के मानकों के तहत स्कूली वाहनों में खिड़कीयों में जाली, चिकित्सीय सुविधा के साथ-साथ पीले रंग की पट्टी तथा स्कूल वैन आदि लिखा होना आवश्यक है। लेकिन विभागीय अधिकारीगण इसको बराबर अनदेखा कर रहे हैं। उन्हें तो केवल अपने सुविधा शुल्क से मतलब होता है। नियमों को ताक पर रखते हुये आफिस में बैठकर अधिकारीगण सब ओके होने का प्रमाण दे देते हैं।

मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिस्टिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमेंटेशन के डेटा के अनुसार 2001 में जहां सड़क दुघर्टना में 14 वर्ष से कम उम्र के 19,667 स्कूली बच्चों की मौत हुई, वहीं 2012 में यह बढ़कर 21,332 हो गई। यह भी सही है कि इन वर्षों में दुघर्टना के शिकार होने वाले 14 वर्ष से कम उम्र के कुल स्कूली बच्चों में मौत का शिकार होने वाले बच्चों के प्रतिशत में कमी देखने को मिली है। यह भी देखने को मिला कि सड़क दुघर्टना से ज्यादा डूबने और बिल्डिंग गिरने की घटनाओं में ज्यादा बच्चों की मौत हुई।

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