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शनिवार, 1 अक्तूबर 2016

कानपुर - नवरात्र में माँ की अराधना के लिए लगा भक्तों का सैलाब

कानपुर 1 अक्‍टूबर 2016 (मोहित गुप्‍ता). नवरात्र के प्रथम दिन आज बारह देवी मंदिर परिसर में एकत्र भक्तों में माँ के दर्शन की अपार लालसा दिखाई दी। तड़के 3 बजे मंदिर का पट खुला जिसके बाद एक के बाद एक कतार में लगकर लाखों श्रद्धालुओं ने माँ के दर्शन किए। जय माता दी, जय माँ बारह देवी के जयकारे से मंदिर परिसर गूँज उठा।



क्या है मंदिर की कहानी -
मंदिर प्रबंधक राघवेंद्र के मुताबिक माँ बारा देवी बर्रा की रहने वाली थीं, यह 12 बहनें थीं। इनके पिता ने माँ बारह देवी की शादी अर्रा में की थी, पर उनको विदा नहीं किया था। एक दिन किसी बात को लेकर पिता से अनबन हुई तो पिता ने उन्हें डंडा लेकर दौड़ा लिया, वह अपनी 11 बहनों के साथ घर से भाग निकलीं। किदवई नगर चौराहे के पास आकर एक पेड़ के नीचे वह बहनों के साथ आराम करने लगीं। तभी उनके पिता लठुआ बाबा आ गये। उन्होंने पिता को पत्थर हो जाने का शाप दिया और खुद सभी बहनों के साथा पत्थर की हो गयीं। यहीं उनके पूर्वजों ने मंदिर बनवा दिया। आज यह मंदिर भक्तों की अटूट श्रद्धा का केंद्र है। मां के दरबार में आने वाले भक्तों की मनोकामना जरूरी पूरी होती है। नवरात्र के 9 वें दिन शाम की आरती में माँ तपेश्वरी की जलती हुई ज्योति से बारह देवी की आरती की जाती है तब पूजा पूर्ण होती है।

क्या है सुरक्षा के इंतजाम -
सुरक्षा व्यवस्था के लिए देर रात से ही स्थानीय पुलिस तथा मंदिर की समिति के लोग लगे रहे। प्रशासन ने मंदिर के मुख्य द्वार से लेकर चप्पे चप्पे को कैमरे की निगरानी में रखा। महिलाओं व पुरूषों की अलग-अलग कतारे लगी थीं। सभी ने एक के बाद एक आराम से माता के दर्शन किये।

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