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सोमवार, 5 सितंबर 2016

कानपुर - कौन लिखेगा भगवान की मूर्तियां गढ़ने वालों का नसीब

कानपुर 5 सितम्बर 2016(मोहित गुप्ता). वो बड़े मन से भगवान की मूर्तियां गढ़ते हैं, लेकिन लगता है भगवान उनका नसीब गढ़ना भूल गया है। बड़े बड़े पंडालों में उनकी बनाई मूर्तियां सजती हैं। लोग बड़ी आस्था के साथ इनके सामने सिर झुकाते हैं, लेकिन इन मूर्तियों को बनाने वाले किसी भी पहचान से महरूम जैसे तैसे अपना पेट पाल रहे हैं।

अपने घर से बेघर होकर ये कलाकार बंजारों की तरह दिन रात मेहनत करते हैं। इसके बावजूद हाथ में इतना नहीं आ पाता की ठीक से पेट भी भर सके। जी हां हम बात कर रहे है उन मूर्तिकारों कि जो दूर दराज के शहरों से यहाँ इस आशा में आये हैं कि मूर्तियां बनाते बनाते शायद एक दिन उनकी भी जिंदगी संवर जायेगी। आज सालों के बाद जब ये लोग पीछे मुड़कर देखते हैं तो सिर्फ बेचारी, लाचारी और बंजारापन नजर आता है। ऐसे ही मूर्तिकार हैं संदीप जो पिछले कई सालों से अपने खानदानी काम को आगे बढ़ाते हुए मूर्तियां बनाते आ रहे हैं। अाज कल संदीप गणेश जी की मूर्तियां बना रहे हैं । इसके बाद फिर डिमांड के मुताबिक देवी की मूर्तियां बनती रहेंगी।

मुख्‍य शिल्‍पकार गौतम के पास लगभग 40 लोगों की टीम है। यह सभी मिट्टी से मूर्तियां बनाते हैं। हालांकि यह इतना आसान भी नहीं होता। आपको बता दे कि छियां का आटा, तूतिया, खड़िया मिट्टी और तरह तरह के रंग तालाब की चिकनी मिट्टी छानकर उसे मूर्ती में इस्तेमाल करते है।कई मुश्किल प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद एक मूर्ती बनती है। 4 फ़ीट की मूर्ती तैयार करने में करीब चार हजार रूपए का खर्च आता है। यह बाजार में 5100 रूपए में बिकती है । इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक मूर्ति के पीछे कितना पैसा बचता है।
इसके बाद भी मुश्किलें तब बढ़ जाती है। जब सरकार की तरफ से कोई सहयोग नहीं मिलता है। शिल्पकार संदीप ने  बताया कि सूदकारों से कर्ज लेकर उन्हें अपनी ज़रूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। सरकार की तरफ से उन्हें किसी भी तरह की कोई भी मदद नहीं मिलती, जबकि कई शहरों में शिल्पकारों को सरकार की ओर से पैसा मुहैया कराया जाता है। इन सबके बीच पुलिस वालों की प्रताड़ना भी शामिल है। जो इन मूर्तिकारों से रोड पर मूर्तियां सजाने के एवज में पैसे की डिमांड करते है। 
त्यौहार के मौसम में इन कलाकारों के पास कानपुर से पडोसी जिलों फर्रुखाबाद, हमीरपुर, फतेहपुर, उन्नाव, लखनऊ, बांदा, झांसी, उरई आदि से आर्डर मिलते हैं। मूर्तियां बनाने के बाद पैसा न डूबे इसलिये ये आर्डर मिलने पर ही मूर्तियां बनाते हैं। हाँ कभी कभी इनकी ज़िन्दगी में थोड़ी सी ख़ुशी भी आती है। जब इन्हें किसी पार्टी से सम्मान मिलता है। शिल्पकार गौतम पाल को ऐसे ही गुजरात में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्‍मान मिल चुका है। ऐसी ही कुछ मीठी यादें और खट्टी परिस्तिथयों के बावजूद यह कलाकार अपनी कला को नया रंग देने में जुटे हैं और  अपनी जिंदगी सँवारने के लिए मूर्तियों को सजाते जा रहे हैं।



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