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गुरुवार, 1 सितंबर 2016

आरटीआई कार्यकर्ता ने किया भ्रष्टाचार उजागर, आरोप लगा राज्‍य के गृहमंत्री पर

छत्तीसगढ़ 01 सितंबर 2016 (जावेद अख्तर). अम्बिकापुर के आरटीआई कार्यकर्ता एंव अधिवक्ता डी.के. सोनी ने छत्तीसगढ़ प्रदेश के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा पर स्वेच्छा अनुदान की राशि में घोटाला करने का आरोप लगाया है। दरअसल प्रदेश के कैबिनेट मंत्री को एक वर्ष में एक करोड़ रूपए स्वेच्छा अनुदान के तहत दिया जाता है ताकि आर्थिक रूप से अक्षम व गरीब लोगों को सहयोग दिया जा सके। मगर छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के गृहमंत्री ने इसमें भी व्यापक स्तर पर भ्रष्टाचार करने का खुलासा आरटीआई दस्तावेज़ों से किया है।

आरटीआई से हुआ खुलासा -  
सूचना के अधिकार से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर किए गए खुलासे में आरटीआई कार्यकर्ता ने गृहमंत्री पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का भी गंभीर आरोप लगाया, वहीं गृहमंत्री ने आरोपों को साबित करने की चुनौती दी है। डीके सोनी ने खुलासा द विज़न को जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के गृहमंत्री रामसेवक पैकरा ने स्वेच्छा अनुदान में बड़ा गोलमाल किया है और लगभग तीस से भी अधिक अपात्रों को निजी लाभ देने की मंशा के चलते अनुदान राशि में से स्वेच्छा अनुदान द्वारा रकम वितरित कर दिया गया। वहीं गृहमंत्री के पास आय से अधिक लगभग ढाई गुना अधिक की संपत्ति अर्जित कर ली गई है। कई बड़े भूखण्ड व दो फ्लैट अलग अलग पाश इलाकों में, एक पत्नी व एक रिश्तेदार के नाम पर, शेयर मार्केट में भी बड़ी रकम के शेयरधारक, गोल्ड व चांदी में भी बड़ा निवेश किया गया है। इसके अलावा तीन चारपहिया महंगे वाहनों को भी खरीदा गया है। आखिरकार इतना सब कुछ मात्र ढाई वर्ष में कमाना अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न है ? 

नियम -  
स्वेच्छा अनुदान के नियमों के मुताबिक विधवा महिलाओं, गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों की पुत्रियों का विवाह, गरीब व्यक्तियों के बच्चों की शिक्षा हेतु, उपचार हेतु, ग्रामीण क्षेत्र के नाट्य मंडली और वाद्ययंत्र आदि के क्रय के लिए दिया जाता है। 

स्वेच्छा अनुदान में भी घोटाला - 
गृहमंत्री ने अपने कार्यकाल मे 70 से अधिक ऐसे लोगों को स्वेच्छा अनुदान दिया है जो इसकी पात्रता ही नहीं रखते हैं। इस खुलासे में जो बात सामने आई है उसमे गृहमंत्री के हिस्से का स्वेच्छा अनुदान उनकी पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं के अलावा अधिवक्ता, गांव के संपन्न व्यक्ति, पार्षद, भाजपा मण्डल अध्यक्ष, ठेकेदारों के साथ ही शासकीय कर्मचारी भी शामिल हैं। 

इच्छानुसार किसी को भी देने का अधिकार - 
गृहमंत्री ने अपनी सफाई में कहा कि जिन्होंने आरोप लगाया प्रमाणित करके दिखाए क्योंकि स्वेच्छा अनुदान हमारा अधिकार है हम गरीब अमीर किसी को भी दे सकते हैं। 

तय दिशा निर्देश - 
स्वेच्छा अनुदान देने के लिए गाइड लाइंस तय की गई है बावजूद इसके गृहमंत्री का ऐसा कहना, हम अपनी इच्छानुसार अमीर व गरीब को दे सकतें हैं, मापदंड का उल्लंघन है। क्योंकि स्वेच्छा अनुदान देने के लिए पहली शर्त यही है कि जो अनुदान उसे ही दिया जाए जो लेने का वास्तविक हकदार हो, जो साधन संपन्न न हो, सरकारी ए ग्रेड का कर्मचारी न हो, आय के एक से अधिक स्त्रोत न हो यानि कि गरीब तबके से हो। 

सुरक्षा की मांग - 
स्वेच्छा अनुदान राशि में हेरफेर का आरोप गृहमंत्री पैकरा पर लगाने वाले आरटीआई कार्यकर्ता डी.के. सोनी ने पुलिस अधीक्षक से अपनी सुरक्षा की मांग की है। क्योंकि उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा महसूस किया हूं कि मुझ पर निगरानी की जा रही हो और कोई लगातार मेरी दैनिक दिनचर्या पर निगाह रखे हुए हो। पुलिस अधीक्षक ने आश्वाासन दिया कि पुलिस सुरक्षा जल्द ही मुहैय्या कराई जाएगी क्योंकि पुलिस प्रशासन का काम प्रत्येक नागरिकों की सुरक्षा करना है। 

गृहमंत्री के खिलाफ खुलासा, आरटीआई कार्यकर्ता की गिरफ्तारी - 
गृहमंत्री रामसेवक पैकरा के स्वेच्छानुदान राशि में बंदरबांट करने का खुलासा करने वाले आरटीआई एक्टिविस्ट डीके सोनी को पुलिस सुरक्षा तो नहीं मिल पाई बल्कि सुरक्षा प्राप्त होने से पहले ही डीके सोनी को एक मामले में पूछताछ करने के लिए पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हालांकि सोनी को गिरफ्तार कर हिरासत में पूछताछ करने का विरोध भी शुरू हो गया। 

भड़के आरटीआई एक्टिविस्ट - 
डीके सोनी की गिरफ्तारी पर आरटीआई एक्टिविस्टों ने जमकर नाराजगी व्यक्त की है। ह्यूमन फार सोसायटी के संचालक भूपेंद्र सिंह व सचिव पंकज दास भी इस कार्यवाही को गलत करार देते हैं तथा राज्य सरकार, मंत्री, संत्री, नेताओं सहित प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि इस तरह से आरटीआई एक्टिविस्टों का दमन किया गया तो वे लोग चुप नहीं बैठेंगे और लामबंद होकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलेंगे। राजधानी की जानी मानी दबंग सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता व आरटीआई एक्टिविस्ट ममता शर्मा ने खुलकर विरोध प्रदर्शित करते हुए इसे शर्मनाक कार्रवाई बताया है और कहा कि गृहमंत्री पुलिस प्रशासन के दम पर आरटीआई कार्यकर्ताओं की आवाज नहीं दबा सकतें हैं, राज्य सरकार व भ्रष्ट राजनेता इस गफलत में कत्तई न रहे अन्यथा सरकार के खिलाफ व्यापक स्तर पर विरोध व धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा। आरटीआई एक्टिविस्ट को दूसरे मामले में फंसाकर गिरफ्तार करना पूर्ण रूप से अवैधानिक, अनैतिक व नाजायज़ है। अगर गृहमंत्री सही हैं तो उन्हें आरोपों का सामना करना चाहिए और तथ्यों की जांच करवाएं, सच्चाई खुद-ब-खुद सामने आ जाएगी। इस तरह से तानाशाही करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रहार करना है। हम सभी इस तरह की प्रक्रियाओं का खुला विरोध करेंगे और राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक आवाज उठाएंगें। 

* आरटीआई कार्यकर्ता ने तथ्य उजागर किया कि गृहमंत्री ने पार्टी विशेष के लोगों को, जो उस कैटेगरी में नहीं आते थे, उन्हें सहायता राशि उपलब्ध कराई, इस पर जांच, तथ्य की छानबीन होनी थी। गलती करने वालों से रिकवरी की जाए, लेकिन जांच करने की बजाय आरटीआई एक्टिविस्ट डीके सोनी को बंद करने का काम हुआ। विधानसभा में यह बात जरूर उठेगी। - टीएस सिंहदेव (कांग्रेस विधायक) नेता प्रतिपक्ष 

 * आरटीआई कार्यकर्ता डीके सोनी का आरोप निराधार है। जरूरतमंदों को ही स्वेच्छानुदान से राशि दी गई है। उनके खिलाफ दूसरी शिकायतें दर्ज हैं। शिकायतों के आधार पर पुलिस कार्रवाई कर रही है। - रामसेवक पैकरा, गृहमंत्री

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