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शुक्रवार, 26 अगस्त 2016

अनोखी मिसाल - 30 साल से एक मुस्‍लिम परिवार मनाता है जन्माष्‍टमी

कानपुर 25 अगस्त 2016 (मोहित गुप्ता/रोहित कुमार). कानपुर में गंगा जमुनी तहजीब की अनोखी मिसाल बना एक परिवार पिछले 30 साल से धूमधाम से श्रीकृष्ण जन्माष्‍टमी मनाता रहा है। यह परिवार जन्माष्टमी का त्यौहार बिलकुल उसी तरह मनाता है जिस तरह कोई हिन्दू परिवार मनाता है।
हिन्दू -मुस्लिम एकता और गंगा जमुनी तहजीब की कई मिसालें मुग़ल शासक अकबर के ज़माने से ही इतिहास अपने आगोश में समेटे हुए है। अकबर के महल में उनकी रानी जोधाबाई श्री कृष्ण जन्माष्टमी मनाया करती थी। उस ज़माने में भी कट्टरपंथी हुआ करते थे और शायद वे आज के समय से ज्यादा कट्टर थे, पर अकबर बादशाह के चलते उनकी दाल नहीं गल पाती थी। उसी गंगा-जमुनी तहजीब की जिंदा मिसाल हैं कानपुर के डा. एस. अहमद मियां जो पिछले कई सालों से अपने परिवार के साथ मिल जुल कर जन्माष्टमी का त्यौहार बिलकुल उसी तरह मानते हैं जिस तरह कोई हिन्दू परिवार मनाता है।

बर्रा विश्व बैंक निवासी डा. एस. अहमद मियाँ के तीन बेटे और दो बहुए हैं। विगत कई वर्ष पहले उनकी पत्नी का देहावसान हो चुका है और वह पिछले 30 वर्षों से जन्माष्‍टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। अबकी बार भी उन्होंने मनमोहक कृष्ण जी की झाकियां एक कमरे में सजाई, जिसमें कई प्रकार की लाइटें व झालर झांकियों के साथ लगाई थी। एक बात विशेष रही डा अहमद ने इस झांकी में सभी धर्मो के भगवान को एक साथ रखा था। डा. अहमद का कहना है कि सभी धर्मों को एकजुट होकर रहना चाहिए, मैं लोगों को इस पावन पर्व पर यह सन्देश देना चाहता हूं की वो एकजुट होकर रहे और एकता की मिसाल कायम करें।

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