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बुधवार, 31 अगस्त 2016

आतंकवाद से निपटने में भारत को सहयोग देगा US, सेनाओं में हुआ समझौता

वाशिंगटन, 30 अगस्त 2016 (IMNB). अमेरिका के दौरे पर पेंटागन पहुंचे रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और उनके समकक्ष अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। पर्रिकर ने इस सौदे के बाद दावा किया है कि अमेरिका ने भारत के पड़ोस से जारी आतंकवादी गतिविधियों से निपटने में उसका पूरा साथ देने का भी वादा किया है।

बता दें कि इससे दोनों देश रक्षा क्षेत्र में साजो-सामान संबंधी निकट साझेदार बन जाएंगे। इस समझौते के बाद दोनों देशों की सेनाएं मरम्मत एवं आपूर्ति के के लिए एक दूसरे की रिसोर्सेज और सैनिक अड्डों का इस्तेमाल कर सकेंगी। साजो-सामान संबंधी आदान-प्रदान समक्षौते (लेमोआ) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत करते हुए रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर और अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि यह समझौता व्यवहारिक संपर्क और आदान-प्रदान के लिए अवसर प्रदान करेगा। यह समझौता दोनों देशों की सेना के बीच साजो-सामान संबंधी सहयोग, आपूर्ति एवं सेवा की व्यवस्था प्रदान करेगा। समझौते पर हस्ताक्षर के बाद जारी साझा बयान में कहा गया कि यह व्यवस्था रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार सहयोग में नवोन्मेष और अत्याधुनिक अवसर प्रदान करेगा। अमेरिका ने भारत के साथ रक्षा व्यापार और प्रौद्योगिकी को साझा करने को निकटम साझेदारों के स्तर तक विस्तार देने पर सहमति जताई है। बयान में कहा गया है कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध उनके साक्षा मूल्यों एवं हितों पर आधारित है।
 
कार्टर के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में पर्रिकर ने संवाददाताओं से कहा, भारत में किसी भी सैन्य अडडे को स्थापित करने या इस तरह की किसी गतिविधि का कोई प्रावधान नहीं है। एलईएमओए भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच प्रतिपूर्ति के आधार पर साजो-सामान संबंधी सहयोग, आपूर्ति और सेवाओं का प्रावधान करता है। यह इनके संचालन की रूपरेखा उपलब्ध कराता है। इसमें भोजन, पानी, घर, परिवहन, पेट्रोल, तेल, कपड़े, चिकित्सीय सेवाएं, कलपुर्जे, मरम्मत एवं रखरखाव की सेवाएं, प्रशिक्षण सेवाएं और अन्य साजो-सामान संबंधी वस्तुएं एवं सेवाएं शामिल हैं।
 
मनोहर पर्रिकर रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुददों पर अपने अमेरिकी समकक्ष एश्टन कार्टर के साथ वार्ता के लिए सोमवार को पेंटागन पहुंचे थे. पेंटागन में कार्टर ने उन्हें विशिष्ट सम्मान दिया। बता दें कि पर्रिकर एक वर्ष से कम समय में दूसरी बार अमेरिकी यात्रा पर आए हैं। ऐसा सम्मान विशिष्ट अतिथियों को ही दिया जाता है। सामान्य सत्कार के दौरान पेंटागन की सीढ़ियों पर आगंतुक का अभिवादन किया जाता है और हाथ मिलाकर स्वागत किया जाता है जिसके बाद उसे भवन के अंदर ले जाया जाता है। लेकिन विशिष्ट सम्मान के दौरान राष्ट्रीय गीत बजाया जाता है। अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि एलईएमओए दोनों देशों को एकसाथ काम करने में सक्षम बनाने में बेहद महत्वपूर्ण है।
 
कार्टर ने कहा कि यह हमारे एकसाथ काम करने को संभव एवं आसान बनाता है। उन्होंने कहा, यह पूरी तरह आपसी सहमति पर आधारित है। दूसरे शब्दों में कहें तो, इस समक्षौते के तहत हम एक-दूसरे को पूरी तरह से साजो-समान संबंधी पहुंच एवं सुगमता मुहैया कराते हैं। यह किसी भी तरह से सैन्य अडडे स्थापित करने वाला समक्षौता नहीं है। लेकिन यह संयुक्त अभियानों से जुड़े साजो-सामान की आपूर्ति बेहद आसान बनाता है। यह समक्षौता न सिर्फ जरूरी सहयोग को वित्तीय मदद देने के लिए अतिरिक्त माध्यम उपलब्ध कराता है, बल्कि इसके तहत अलग-अलग मामलों के लिए दोनों देशों की सहमति भी जरूरी है।

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