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मंगलवार, 5 जुलाई 2016

एसईसीएल के अधिकारी पीएम मोदी के स्‍वच्‍छता अभियान को लगा रहे पलीता

छत्तीसगढ़ 5 जुलाई 2016 (अरमान हथगेन). कोल इण्डिया की मनीरत्न कम्पनी साउथ इस्टर्न कोल लिमिटेड (एसईसीएल) अपने श्रमिकों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने का लाखों दावा करती है पर हकीकत में वो सभी दावे सिर्फ कागज़ी हैं। जिसका जीता जागता उदाहरण चिरमिरी इलाके की तमाम कालरी में देखने को मिलाता है, जहां चारों तरफ गंदगी पसरी हुई है।

साफ–सफाई के नाम पर एसईसीएल करोड़ों रूपये कागजों में प्रति वर्ष फूंक देती है मगर समस्या जस की तस दिखाई पड़ती है। यह मामला छत्तीसगढ़ के जिला कोरिया के एसईसीएल चिरीमिरी की शाखा वेस्ट चिरीमिरी, बरतुंगा, डोमनहील, एनसीपीएच कालोनियों का है, यहां निवासरत हजारों श्रमिक परिवार के लोगों को एसईसीएल प्रबंधन द्वारा काफी समय से छला जा रहा है। यूं तो एसईसीएल श्रमिकों तक तमाम तरह की सुविधाएं पहुंचाने की दलीलें पेश करता है मगर वास्तविक रूप में ये सभी दलीलें पूरी तरह खोखली है। इसका स्पष्ट प्रमाण कालरी क्षेत्रों में देखने को मिला। इन सभी कालरी क्षेत्रों में जहां तक निगाह पहुंचती हैं वहां तक चारों तरफ सिर्फ गंदगी पसरी हुई है और सड़ांध की जानलेवा दुर्गंध ने खड़ा रहना मुश्किल कर दिया, ऐसे स्थानों पर हजारों श्रमिक परिवारों का रहना होता है, इन सभी परिवारों के लिए इन कालरी क्षेत्रों में रहना ही नरक से कम नहीं। इन कालोनियों से बेहतर अवस्था में तो बूचड़खाना व कांजी हाउस होता है। इन इलाको में गाजर घास और बेशरम के पौधों ने अपना पैर जमा रखा है।

ऐसा ही नज़ारा श्रमिक कलोनियों के पीछे का भी पाया गया। अधिकांश सेप्टिक टैंक टूटी हुई है, नालियां जाम है, यहां वहां गंदगी भरी पड़ी है, शायद दस-बीस वर्ष पहले यहां पर सफाई हुई रही होगी क्योंकि स्थिति तो ऐसा ही दर्शा रही है। ऐसी ही साफ सफाई के नाम पर एसईसीएल द्वारा करोड़ों रूपये खर्च करना इस पर सवालिया निशान खड़ा कर रहा है? साफ सफाई कहां कहां होती है, इसकी जानकारी ठेकेदार, एसईसीएल और भगवान को ही होगी क्योंकि यह जानकारी होना आम नागरिकों के बस की बात नहीं है। इसके लिए भी संभवतः सीआईडी से ही जांच करानी पड़ जाएगी? बहरहाल एसईसीएल द्वारा कई करोड़ रूपये खर्च किए गए साफ सफाई पर बावजूद इसके समस्या हमेशा की तरह आज भी जस की तस बनी हुई है। न जाने कब एसईसीएल इस कुम्भकर्णीय नींद से जागेगा और श्रमिकों के हित में सार्थक पहल करेगा ताकि श्रमिकों को इस विकट, विकराल व दुर्गंधयुक्त समस्या से निजात मिल सकेगी।

वर्षों से जमे ठेकेदार –
कोल इण्डिया की कम्पनी एसईसीएल चिरीमिरी में ऐसे दर्जनों ठेकेदार है, जो लगभग पिछले 20 वर्षों से एक ही काम करते आ रहे है। इलाके के ठेकेदारों ने आपस में सासमंजस्य बना रखा है और कोई किसी के कार्य में हस्तक्षेप नहीं करता, मसलन जो आज गाजर घास और कालोनियों मे पोताई का काम कर रहा है वो लंबे समय से यही काम करता आ रहा है। नालियों की सफाई या अन्य कार्य सभी ने बांट रखा है। एसईसीएल के जिम्मेदार अधिकारी कभी भी इन इलाकों में होने वाले कार्य देखने नहीं आतें हैं इसलिए भी ठेकेदारों की मौज रहती है। अफसरों को तो सिर्फ अपना तय कमीशन मिलना चाहिए, अब ऐसे में सफाई कैसे हो। 

मोदी का सपना चकनाचूर –
पूरे देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत अभियान चलाया और इस सपने को पूरा करने का प्रत्येक से आह्वान भी किया मगर चिरमिरी एसईसीएल को शायद साफ-सफाई पसंद नहीं व दुर्गंध से अधिक प्रेम है, एसईसीएल को न ही पीएम मोदी की योजना और न ही उनके आह्वान से ही कोई लेना देना है। एसईसीएल उच्चाधिकारियों, अधिकारियों व ठेकेदारों ने मिलजुल कर पीएम मोदी के स्वच्छ भारत अभियान की ऐसी की तैसी करे हैं। इससे समझ सकते हैं कि वाकई एकता में बल होता है अन्यथा किसी ने तो अपनी जिम्मेदारी निभाई ही होती। यही कारण है की कई करोड़ रुपये खर्च कर भी एसईसीएल इलाके को साफ सुथरा और स्वच्छ नहीं बना पाई है।

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