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शुक्रवार, 10 जून 2016

स्मार्ट कार्ड हुये फ्लाप, नाकारा साबित हो रहे सरकारी डाक्टर व अस्‍पताल

छत्तीसगढ़ 10 जून 2016 (रवि अग्रवाल). जिले में संचालित शासकीय अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से इलाज कराने की सुविधा होने के बाद भी मरीजों का रूझान यहां इलाज कराने में नहीं है। कम से कम जिला अस्पताल में तो निजी अस्पतालों की अपेक्षा अधिक संसाधन व डॉक्टर हैं, मगर मरीज यहां उपचार कराना नहीं चाहते। इसके चलते साल भर में जिला अस्पताल में महज 3 हजार 58 लोगों ने स्मार्ट हेल्थ कार्ड के सहारे उपचार कराया। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि लोगों का रूझान निजी अस्पतालों के प्रति कितना है।

इसी तरह सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में 5 हजार 864 लोगों ने उपचार कराया है, जबकि जिले भर के निजी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड से ईजाल कराने वालों की संख्या 15 हजार 984 है। केन्द्र व राज्य शासन द्वारा लोगों के निःशुल्क उपचार के लिए स्मार्ट हेल्थ कार्ड की योजना संचालित की जा रही है। इस कार्ड के सहारे जरूरतमंद लोग शासकीय व निजी अस्पतालों में निर्धारित राशि तक का निःशुल्क उपचार करा सकते हैं। इस कार्ड से यह राशि संबंधित अस्पतालों को मिल जाती है। वर्ष 2013 में लगभग 4 लाख स्मार्ट कार्ड बनाने के बाद जो लोग छूट गए हैं। उनका कार्ड बनाने का आदेश नहीं आया है। लोगों को शासकीय अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड के माध्यम से उपचार कराने से परहेज है। इसके कारण सरकारी अस्पतलों में कार्ड के माध्यम से उपचार कराने वालों की संख्या साल भर में 8 हजार 922 तक पहुंची है, जबकि निजी अस्पतालों में स्मार्ट हेल्थ कार्ड के जरिए उपचार कराने वालों की संख्या 15 हजार 984 है। 

एक ओर राज्य शासन द्वारा शासकीय अस्पतालों में प्रशिक्षित, डिग्रीधारी लोगों का चयन किया जाता है, ताकि अस्पताल पहुंचे मरीजों को बेहतर से बेहतर स्वास्थ्य लाभ मिल सके, वहीं दूसरी ओर शासन द्वारा हर साल शासकीय अस्पतालों में विभिन्न नए-नए उपकरणों में लाखों रूपए खर्च किया जाता है, बावजूद इसके लोगों को जिले के शासकीय अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में लोगों का मोह निजी अस्पतालों के प्रति ज्यादा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले में संचालित निजी अस्पतालो में 1 मार्च 2015 से 28 फरवरी 2016 तक 15 हजार 984 लोगों ने अपना स्मार्ट कार्ड का प्रयोग किया है, जबकि दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व जिला में अस्पताल में साल भर में मात्र 8 हजार 922 मरीजों ने अपना उपचार कराया है। इनमें आयुष्मान नर्सिग होम्स में 97, बिरथरे नर्सिग होम्स में 47, क्रिस्चन हास्पिटल चांपा में 3 हजार 681, हेमीन बाई नर्सिग होम में 729, स्व. बंशीचंद मुकीमचंद स्मृति हास्पिटल अकलतरा में 1 हजार 666, मां सर्जिकल नर्सिग होम जांजगीर में 552, मोदी नर्सिग होम जांजगीर में 658, नायक नर्सिग होम चांपा में 2 हजार 169, ओशो धारा नर्सिग होम चांपा में 649, संकल्प नेत्रालय पामगढ़ में 960, गणेश विनायक नेत्रालय चांपा में 3 हजार 78 व बीएलहोम हास्पिटल चांपा में 1 हजार 698 मरीजों ने उपचार कराते हुए स्मार्ट कार्ड का उपयोग किया है, जबकि दूसरी ओर स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित शासकीय अस्पतालों में बीडीएम अस्पताल चाम्पा में 539, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बम्हनीडीह में 20, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जैजैपुर में 252, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मालखरौदा में 181, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र डभरा में 544, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अकलतरा में 1 हजार 280, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बलौदा में 1 हजार 251, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पामगढ़ में 702, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सक्ती में 1 हजार 95 व जिला अस्पताल में 3 हजार 58 मरीजों ने स्मार्ट कार्ड से उपचार कराया है। जिला अस्पताल में सोनाग्राफी, एक्सरे आदि की सुविधा होने व विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ चिकित्सक होने के बाद भी मरीज यहां उपचार कराने से परहेज कर रहे हैं।
  
सरकारी अस्पताल में उपचार के फायदे -
राज्य शासन द्वारा मरीजों को स्मार्ट कार्ड के जरीए निर्धारित मूल्य तक निशुल्क उपचार सुविधा दी जाती है। सरकारी अस्पताल में ईलाज कराने पर मरीजों द्वारा स्मार्ट कार्ड के प्रयोग के दौरान काटी गई का राशि का उपयोग अस्पताल के विकास व मरीजों को सुविधा दिलाने के लिए किया जाता है। इनमें से 40 प्रतिशत राशि मुख्यमंत्री अस्पताल विकास कोष में जमा की जाती है। वहीं अन्य शेष 60 प्रतिशत राशि का भुगतान अस्पताल के लिए किया जाता है। इनमें 25 प्रतिशत राशि का भुगतान अस्पताल स्टाफᆬ को प्रोत्साहन राशि के रूप वितरण किया जाता है। वहीं शेष बचे 35 प्रतिशत राशि जीवन दीप समिति में जमा हो जाती है। अस्पतालों में बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के लिए खर्च की जाती है। यदि अस्पताल प्रबंधन द्वारा अस्पताल की सुविधाओं में वृद्घि करने के लिए राज्य शासन से मांग की जाती है तो मुख्यमंत्री अस्पताल कोष में जमा राशि दी जाती है। इस तरह सरकारी अस्पतालों में स्मार्ट कार्ड का उपयोग कर ईलाज करवाने से इन अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ेगी, मगर लोग इस दिशा में विचार नहीं करते, दूसरी ओर निजी अस्पतालों को स्मार्ट कार्ड के माध्यम से उपचार के बदले जो राशि मिलती है उसका उपयोग अस्पताल प्रबंधन अपने हित में करते हैं।

''लोगों को स्मार्ट हेल्थ कार्ड के बारे में जानकारी दी जा रही है। जिले में संचालित शासकीय अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधा दी जा रही है। शीघ्र ही जिले में संचालित 31 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में स्मार्ट कार्ड की सुविधा मिलेगी। वहीं जिले के स्मार्ट कार्ड से वंचित 1 लाख 76 हजार लोगों का स्मार्ट कार्ड बनाने की प्रक्रिया मई से प्रारंभ करने की योजना है'' - गिरिश कुर्रे, डीपीएम

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